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आईपीओ की रफ्तार होगी और ज्यादा दमदार

समी मोडक / मुंबई September 19, 2017

आईसीआईसीआई लोम्बार्ड और एसबीआई लाइफ  जैसे बड़े आकार के आईपीओ की वजह से 2017 में आईपीओ का औसत आकार घरेलू बाजारों के इतिहास में सर्वाधिक है। इस साल अब तक करीब 30,385 करोड़ रुपये की कुल पूंजी जुटाने के लिए लगभग 23 आईपीओ बाजार में आ चुके हैं और इस हिसाब से प्रत्येक निर्गम का औसत आकार 1,320 करोड़ रुपये का है। यह पिछले साल के मुकाबले 30 प्रतिशत की वृद्घि है और वर्ष 2010 के औसत निर्गम आकार की तुलना में दोगुना है।  उद्योग के जानकारों का कहना है कि औसत आईपीओ आकार में सुधार बाजार के लिए मजबूत संकेत है क्योंकि इससे निवेश बैंकों को मदद मिलती है, उनकी निर्धारित लागत सौदे के आकार की परवाह किए बगैर एक समान बनी रहती है और साथ ही बड़े आकार के उन निवेशकों की भागीदारी बढ़ती है जो अक्सर छोटे आकार के निर्गमों में निवेश नहीं करना चाहते। 
 
इस साल पांच आईपीओ का आकार 1700 करोड़ रुपये से अधिक का दर्ज किया गया है जिनमें से तीन वित्तीय क्षेत्र से हैं। वित्त क्षेत्र शेयर बाजार के निवेशकों के लिए पसंदीदा साबित हो रहा है। डॉयचे इक्विटीज इंडिया में इक्विटी कैपिटल मार्केट्ïस के प्रबंध निदेशक संजय शर्मा ने कहा, 'हम बाजार में अरबों डॉलर के निर्गम आने की उम्मीद कर रहे हैं जिनमें से ज्यादातर वित्त क्षेत्र से हैं। इससे आईपीओ के औसत आकार में और इजाफा होगा। नकदी की स्थिति को देखते हुए हमें उम्मीद है कि बाजार इन बड़े आकार के निर्गम सौदों के अनुकूल रहेगा। खासकर वित्त क्षेत्र में जीवन बीमा, सामान्य बीमा और परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) जैसे नए उप-क्षेत्रों के जुडऩे से आईपीओ बाजार में बड़ा बदलाव दिखने की उम्मीद है।'
 
हालांकि पिछले दो कैलेंडर वर्ष भी आईपीओ बाजार के लिए अच्छे थे, लेकिन बैंकरों की शिकायत है कि इन अवधि में आए आईपीओ का आकार कम था। उदाहरण के लिए वर्ष 2015 में 21 आईपीओ आए, लेकिन उनके द्वारा जुटाई गई कुल रकम सिर्फ 13,614 करोड़ रुपये थी, जो प्रत्येक निर्गम के आधार पर 650 करोड़ रुपये से भी कम है। एक निवेश बैंकर ने नाम नहीं बताने के अनुरोध के साथ कहा, 'बड़े आकार के आईपीओ कई मायने में सकारात्मक हैं। ये मार्केट फ्री फ्लोट को बढ़ाते हैं। मौजूदा समय में समान शेयरों में बड़ी मात्रा में नकदी लगाई जाती है और इससे मूल्यांकन को लेकर बुलबुले जैसी स्थिति पैदा होती है।'
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