बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी से मिलों का आटा गीला
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जीएसटी से मिलों का आटा गीला

दिलीप कुमार झा / मुंबई September 19, 2017

देशभर में पंजीकृत कुल आटा मिलों में से करीब 1,400 इकाइयों यानी तीन-चौथाई पर बंद होने की तलवार लटक रही है। इसकी वजह यह है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में सभी ब्रांडेड उत्पादों को लाया गया है। इससे पहले जीएसटी परिषद ने घोषणा की थी कि खुले आटे और पंजीकृत लेकिन बिना ट्रेडमार्क के ब्रांडेड आटा पैकेटों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इसके चलते बहुत से पंजीकृत ट्रेडमार्क ब्रांड कर के दायरे से बाहर आने के लिए अपने लाइसेंस वापस करने लगे थे। इन मिलों ने अपने ब्रांड को न तो स्थानीय या राष्ट्रीय प्राधिकरणों के पास पंजीकृत कराया है और न ही अपने ब्रांड की पहचान के लिए कोई ट्रेडमार्क लिया है। लेकिन वे फिर भी अपना उत्पाद एक ऐसे ब्रांड के तहत बेच रही हैं, जिसे वे स्थानीय ब्रांड बता रही हैं। 
 
कर भुगतान से बचने के लिए आटा मिलों द्वारा अपने लाइसेंसी ब्रांडों की वापसी पर रोक लगाने के लिए जीएसटी परिषद ने 9 सितंबर को स्पष्टï किया, '5 मई 2017 को पंजीकृत ब्रांडों पर 5 फीसदी जीएसटी लगेगा, भले ही वे बाद में गैर-पंजीकृत हो जाएं।' जीएसटी परिषद ने आगे साफ किया कि कॉपीराइट ऐक्ट के तहत पंजीकृत ब्रांडों पर 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। नॉर्थ कर्नाटक रोलर फ्लोर मिल्स के प्रबंध निदेशक डी मानिकचंद गडिया ने कहा, 'सितंबर का स्पष्टीकरण सभी ब्रांडों को 5 फीसदी जीएसटी के तहत लाता है और यह 1 जुलाई यानी जीएसटी लागू होने की तिथि से प्रभावी होगा। आटा मिलें पहले ही शून्य शुल्क पर अपना उत्पाद बेच चुकी हैं, इसलिए उनके द्वारा ग्राहकों को पहले ही बेचे जा चुके उत्पाद पर जीएसटी संग्रहित करना मुश्किल है। अगर वे ऐसा नहीं करती हैं तो उन्हें अपनी जेब से जीएसटी का भुगतान करना होगा। इससे कम से कम आटा मिलों को अपना परिचालन बंद करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।' नॉर्थ कर्नाटक रोलर फ्लोर मिल डायमंड ब्रांड के तहत बेसन, आटा और मैदा बेचती है। 
 
देशभर में करीब 1,400 आटा मिलें प्राइवेट लेबल से गेहूं को पीसकर खुला आटा बेच रही हैं। भारतीय खाद्य संरक्षा मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने पैकेट पर सामग्री का ब्योरा और विनिर्माता एवं वितरक का पता छापना अनिवार्य कर दिया है। इसलिए इस विवरण छपाई को 'कार्रवाई लायक दावा' माना जाता है। इसका मतलब है कि अगर पैकेटबंद आटे की गुणवत्ता खराब होने से स्वास्थ्य को कोई नुकसान होता है तो ग्राहक इस नुकसान की भरपाई के लिए विनिर्माता और वितरक से संपर्क कर सकते हैं। 
 
रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की सचिव वीणा शर्मा ने कहा, 'हमें इसका सुनिश्चित पता नहीं है कि जीएसटी की दर बीती तारीख यानी 1 जुलाई से लागू की गई है। हम इस पर स्पष्टीकरण का इंतजार करेंगे। अगर जीएसटी को 1 जुलाई से प्रभावी बनाया गया तो मिलों के लिए अपना वजूद बचाना बहुत मुश्किल होगा। उद्योग ब्रांडेड और अनब्रांडेड उत्पादों की स्पष्ट परिभाषा चाहता है।' 
 
उद्योग के सूत्रों का अनुमान है कि देशभर में करीब 2,000 आटा मिलें चल रही हैं, जिनमें से करीब 600 के पास पंजीकृत ट्रेडमार्क है। शेष 1,400 मिलें आटा, मैदा और बेसन का उत्पादन करती हैं, जो ब्रेड और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य विनिर्माताओं को बेचा जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में मानिकचंद ने कहा, '5 फीसदी जीएसटी चुकाकर वजूद बचाना मुश्किल होगा क्योंकि इन स्थानीय ब्रांडों की कीमतें खुले उत्पादों की तुलना में बहुत अधिक नहीं होती हैं। इन्हें छोटे पैकेटों में इसलिए बेचा जाता है क्योंकि इससे इनकी ढुलाई आसान हो जाती है और उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं के लिए संभालना आसान हो जाता है। पैकेट पर नाम महज पैकेट की एक पहचान है। इसलिए यह स्पष्टï किए जाने की जरूरत है कि क्या कोई ट्रेडमार्क धारक गैर-पंजीकृत ब्रांड का उत्पादन कर सकता है।'
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी, wheat flour,,
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