बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी : सिलेसिलाए कपड़ों का निर्यात 3.84 प्रतिशत तक गिरा
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जीएसटी : सिलेसिलाए कपड़ों का निर्यात 3.84 प्रतिशत तक गिरा

टीई नरसिम्हन / चेन्नई September 18, 2017

अगस्त में सिले-सिलाए कपड़ों के निर्यात में 3.84 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। निर्यातकों का कहना है कि वे जीएसटी के बाद ऑर्डर निश्चित करने में असमर्थ हैं क्योंकि शुल्क वापसी और राज्य की लेवी में छूट का फैसला होना अभी बाकी है। अगस्त 2017 में 8,556.35 करोड़ रुपये मूल्य के सिलेसिलाए कपड़ों का निर्यात किया गया, जबकि पिछले साल 8,897.77 करोड़ रुपये का निर्यात किया गया था। इसमें 3.84 प्रतिशत की गिरावट आई है।

 
तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजा एम षड़मुगम ने कहा कि यह रुख जारी रहेगा क्योंकि जीएसटी लागू किए जाने के बाद से निर्यातक नए ऑर्डर लेने में असमर्थ हैं। निर्यातकों को शुल्क वापसी में 5-6 प्रतिशत कमी का जोखिम सता रहा है। सितंबर के बाद शुल्क वापसी की दर में गिरावट आएगी और अक्टूबर से जीएसटी की असली दिक्कत शुरू होगी। उन्होंने कहा कि सिलेसिलाए कपड़ों की निर्यात वृद्धि में यह एक बड़ा जोखिम बनने वाला है।
 
निर्यातकर्ताओं ने अधिकारियों से इस विसंगति को सुधारने की गुजारिश की है। अगर यही रुख जारी रहता है तो सिले-सिलाए कपड़ों के वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी में इस साल 3.5 प्रतिशत और अगले साल तीन प्रतिशत गिरावट की अशंका है। षणमुगम ने कहा कि भारत की स्थिति मौजूदा छठे स्थान से गिरकर नौवें स्थान पर आ जाएगी और सैकड़ों लोग नौकरी खो देंगे।
 
एक चिंता इस बात की भी है कि 1 जनवरी से अभी मिलने वाले सारे फायदे बंद हो जाएंगे। दरअसल, भारत ने विश्व व्यापार संगठन में इस बात पर सहमति जताई है और हस्ताक्षर किए हैं कि देश की प्रति व्यक्ति आय लगातार तीन सालों तक 1,000 डॉलर पर पहुंचने के बाद कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा। देश पहले ही इस स्थिति में पहुंच चुका है। उद्योग के इस परिदृश्य पर निर्यातकों ने कहा कि यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर अंंतिम फैसला लेने में देरी करने से चीन, वियतनाम और बांग्लादेश को अवसर हथियाने का मौका मिला है।
 
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सीआईटीआई) ने कहा कि फैब्रिक स्टेज पर (फैब्रिक स्टेज और इससे संबंधित ठेके के कार्य पर पांच प्रतिशत जीएसटी के साथ) संचयी इनपुट टैक्स क्रेडिट के रिफंड की अनुमति नहीं दी जाने से संसाधित फैब्रिक - खासतौर पर सूती वस्त्र पर खासा प्रभाव पड़ा है क्योंकि पिगमेंट, रसायन और ईटीपी रसायन महंगे हैं और इन पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगता है।
 
कपड़ा विनिर्माण की 80 प्रतिशत से ज्यादा इकाइयां व्यापक रूप से छोटे-छोटे खंडों में बिखरी हुई हैं और मुख्यत: ठेके पर काम करती हैं। सीआईटीआई ने कहा कि इस प्रतिकूल शुल्क का उत्पादन की लागत, कीमत वृद्धि और निर्यात की प्रतिस्पर्धी क्षमता पर खासा असर पड़ेगा। विनिर्माण के हर चरण में संचयी इनपुट टैक्स क्रेडिट का रिफंड भरना जरूरी है, खासतौर पर संसाधित (रंग और प्रिंटेड) वस्त्रों पर।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी, textiles,,
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