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सितंबर से होगी निर्यात वृद्घि की परीक्षा

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली September 17, 2017

अगस्त में निर्यात में सालाना आधार पर 10.3 फीसदी की उछाल और लगातार 12 महीनों तक बढ़ोतरी के बावजूद विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वस्तु निर्यात की असली परीक्षा आने वाले महीनों में होगी। इसकी वजह यह है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद दो महीने से टैक्स रिफंड का मुद्दा बरकरार है, निर्यातक नकदी की किल्लत की शिकायत कर रहे हैं और रुपये के आने वाले महीनों में और मजबूत होने की संभावना है। भारतीय निर्यातकों के संगठन फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, 'हमें यह याद रखने की जरूरत है कि अगस्त, 2016 तक निर्यात में लगातार गिरावट आ रही थी और इसलिए सालाना आधार पर तुलना कम आधार पर होगी। सितंबर, 2016 के बाद निर्यात में बढ़ोतरी शुरू हुई थी और सितंबर, 2017 के आंकड़े उसके मुताबिक समायोजित होंगे।' निर्यात क्षेत्र लगातार इस मांग को उठा रहा है कि जीएसटी के तहत चुकाए गए करों के रिफंड की प्रक्रिया बहुत जटिल है। निर्यातकों को वस्तु आयात पर एकीकृत जीएसटी का भुगतान करना होगा और फिर जीएसटी के तहत इसके रिफंड का दावा करना होगा। उनका कहना है कि इससे निर्यातक कंपनियों को अपना कामकाज पूंजी पर चलाना पड़ रहा है। फियो का कहना है कि इसके परिणामस्वरूप विभिन्न उद्योगों और उत्पाद श्रेणियों के निर्यात ऑर्डर में 15 फीसदी तक की कमी आई है। सहाय ने कहा कि मुख्यत: उन निर्यात ऑर्डरों में कमी आई है जिनकी आपूर्ति अक्टूबर में होनी थी। उन्होंने कहा कि क्रेडिट की कमी के कारण निर्यात के ऑर्डरों में कमी आई है। सितंबर के निर्यात आंकड़ों में यह परिलक्षित होगा।
 
अमेरिका और यूरोप में त्योहारी मौसम नवंबर से शुरू होता है। इसे देखते हुए निर्यात ऑर्डर में कमी खासकर परिधान और दूसरी उपभोक्ता वस्तुओं के निर्यातकों लिए चिंता का विषय है। मुंबई के एक निर्यात विशेषज्ञ ने कहा कि अगस्त के आंकड़ों से साफ है कि रत्न एवं आभूषण, सिले सिलाए वस्त्र और हस्तशिल्प जैसे श्रमिक बहुत क्षेत्रों का निर्यात लगातार गिरा है या फिर उनमें बेहद मामूली वृद्घि हुई है। इन क्षेत्रों में छोटी और मझोली कंपनियों का दबदबा है। परिधान निर्यात में लगातार तीन महीने गिरावट के बाद अगस्त में 0.5 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी हुई। इसी तरह रत्न एवं आभूषण के क्षेत्र में 25 फीसदी से अधिक की गिरावट आई जबकि जुलाई में यह गिरावट 22 फीसदी थी। 
 
दूसरी तरफ इंजीनियरिंग सामान के निर्यात में तेजी आई है। इंजीनियरिंग एक्सपोट्र्स प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन टी एस भसीन ने कहा, 'इंजीनियरिंग सामान का निर्यात सम्मानजनक गति से बढ़ रहा है और इसका कारण यह है कि आधार धातुओं में तेजी आई है। लेकिन रुपये की कीमत चिंता का विषय है।' अर्थशास्त्रियों ने रुपये के लगातार मजबूत होने का अनुमान जताया है। रुपये के लगातार मजबूत होने से निर्यात बढ़ोतरी के प्रभावित होने और भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पद्र्घी क्षमता घटने की संभावना है। इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा, 'हमारे आकलन के मुताबिक इस वित्त वर्ष में रुपया कम से कम 2 से 2.5 फीसदी तक मजबूत होगा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारत में 25 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है और इसके अभी और बढऩे की संभावना है क्योंकि चीन भी निवेश अवसरों को खोज रहा है।' उन्होंने कहा कि कतर, उत्तर कोरिया और दूसरे  कई भूराजनीतिक कारणों से विदेशी पूंजी का प्रवाह प्रभावित नहीं हुआ है। बीते शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 64.08 के स्तर पर बंद हुआ था। इस साल अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 6 फीसदी मजबूत हो चुका है जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारत में 6.76 अरब डॉलर इक्विटी में और 20.31 अरब डॉलर डेट में झोंके हैं। 
 
जीएसटी से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए सरकार ने राजस्व सचिव हसमुख अढिय़ा की अगुआई में एक समिति का गठन किया है। यह समिति निर्यातकों की समस्या को सुलझाने के लिए एक संस्थागत व्यवस्था बनाने की कोशिश करेगी। इस दौरान सरकार ने इस क्षेत्र की कुछ समस्याओं को सुलझाने की कोशिश की है। मर्केंडाइज एक्सपोट्र्स फ्रॉम इंडिया जैसी निर्यात संवद्र्घन योजनाओं में शेयरों की बिक्री पर जीएसटी के तहत 12 फीसदी कर लगाया था लेकिन एक ही महीने में इसे घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया। साथ ही 20 लाख रुपये से कम टर्नओवर वाले कारोबारी को जीएसटी के तहत पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं है। कच्चे तेल की कीमतें बढऩे से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में आई तेजी भी एक निर्यातकों के लिए अस्थायी लाभ हो सकता है। अमेरिका में चक्रवाती तूफान हार्वी के गुजरने के बाद तेल शोधक कारखानों में एक फिर सामान्य स्थिति बहाल होने से कच्चे तेल की कीमतों में फिर गिरावट आ सकती है।
Keyword: import, export,,
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