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कपड़ा उद्योग की बढ़ी चिंता

विनय उमरजी / अहमदाबाद September 15, 2017

जीएसटी प्रणाली के तहत राहत की मांगें जारी रखते हुए अब कपड़ा उद्योग ने कपड़ा मूल्य शृंखला की लागत बढऩे का हवाला देते हुए कपड़ा विनिर्माण के स्तर पर एकत्रित इनपुट टैक्स क्रेडिट के रिफंड की मांग की है। उद्योग के प्रतिनिधियों ने कहा कि एकत्रित इनपुट टैक्स क्रेडिट के रिफंड में देरी से कपड़े के आयात में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे पावर लूम, हैंड लूम और प्रोसेसिंग क्षेत्रों में रोजगार कम होने की आशंका है। कपड़ा उद्योग की चिंता है कि इससे कपड़ा उद्योग की लागत 3 से 5 फीसदी बढ़ सकती है, जिससे क्षमता उपयोग प्रभावित हो सकता है। 

 
सदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन (सीमा)  नव निर्वाचित चेयरमैन और केपीआर समूह के प्रबंध निदेशक पी नटराज के मुताबिक लागत बढ़ोतरी में यह हिस्सा पावरलूम, हैंडलूम और प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों की बिक्री कीमत पर एकत्रित इनपुट टैक्स क्रेडिट के अनुपात में है। हाल में एक ज्ञापन में सीमा ने आगाह किया था कि कुछ जीएसटी विसंगतियों के कारण कुछ बड़ी दिक्कतें पैदा हुई हैं। इनके तत्काल समाधान की जरूरत है ताकि कपड़ा उद्योग के सभी भागीदारों को जीएसटी के दायरे में लाया जा सके और भारतीय कपड़ों और परिधान उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी रखा जा सके। 
 
नटराज ने कहा, 'भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग पिछले तीन साल से लगातार मंदी के दौर से गुजर रहा है। इसकी वजह वैश्विक बाजारों में कम मांग, वियतनाम एवं बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को मिल रहा एफटीए/पीटीए प्रतिस्पर्धी लाभ और यूरोपीय संघ, अमेरिका, कनाडा और चीन जैसे प्रमुख कपड़ा बाजारों में भारतीय कपड़ा एवं परिधान उत्पादों पर ऊंचा शुल्क लगाया जाना हैं। पिछले तीन साल से कुल कपड़ा एवं परिधान निर्यात करीब 40 अरब डॉलर पर स्थिर बना हुआ है।'
 
सीमा और अन्य कपड़ा संस्थाओं ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि फैब्रिक स्टेज में इक्ट्ठा इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड किया जाए ताकि लागत बढऩे से बचा जा सके। उद्योग के मुताबिक लागत बढऩे से बचाव के अलावा समय पर रिफंड से कपड़े के ज्यादा आयात और क्षमता उपयोग में गिरावट पर रोक लगेगी, जिनसे रोजगार घटने की आशंका है। उदाहरण के लिए सूरत के बुनाई उद्योग में 6,50,000 पावरलूम हैं, जिनमें से 40 फीसदी से अधिक पिछले एक महीने से बंद पड़े हैं। इससे अब तक 1,200 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। सीमा के मुताबिक प्रोसेसिंग चार्ज में डाई और रसायनों का हिस्सा 30 फीसदी है, जिन पर 18 फीसदी जीएसटी है, जबकि कपड़े या जॉब वर्क पर 5 फीसदी जीएसटी है। पांडेसरा वीवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशिष गुजराती ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि ट्विस्टिंग जॉब वर्क पर 5 फीसदी जीएसटी के तहत एकत्रित इनपुट टैक्स क्रेडिट 1.25 रुपये प्रति मीटर से घटकर 80 पैसे प्रति मीटर रह गया है।  
 
अब यह उद्योग स्यूइंग थे्रड फिलामेंट यार्न सहित मेन-मेड फाइबर (एमएमएफ) स्पन यार्न पर जीएसटी की दर 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी करने की मांग कर रहा है। पावरलूम क्षेत्र और स्वतंत्र बनाई इकाइयों पर धागे पर 18 फीसदी जीएसटी का बोझ आ गया है। ये बने हुए कपड़े का 95 फीसदी उत्पादन करती हैं। हालांकि संपूर्ण उत्पादन करने वाली इकाइयों के सामने ऐसी दिक्कत नहीं है क्योंकि उन्हें धागों पर 18 फीसदी और कपड़े पर केवल 5 फीसदी जीएसटी देना होगा और उनके लिए लागत में अंतर 5 से 7 फीसदी है। उद्योग ने जीएसटी परिषद से आग्रह किया है कि विनिर्माण के किसी चरण विशेष रूप से प्रसंस्कृत कपड़े के चरण में इकट्ठा इनपुट टैक्स क्रेडिट की रिफंडिंग की विसंगति दूर की जाए। इसके अलावा फिलामेंट स्यूइंग थ्रेड्स सहित एमएमएफ स्पन यार्न पर जीएसटी की दर 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी की जाए। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी, textiles,,
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