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आईपीएल का प्रसारण अधिकार बदल सकता है राजस्व आधार

मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  September 15, 2017

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का प्रसारण अधिकार नहीं मिलने के बाद सोनी क्या करेगा? सोनी ने केवल टेलीविजन अधिकार हासिल करने के लिए अलग से बोली क्यों नहीं लगाई थी? क्या स्टार ग्रुप को आईपीएल का प्रसारण मिलने के बाद भारत में अपना राजस्व आधार बढ़ाने का भी मौका मिल जाएगा? स्टार इंडिया को आईपीएल के प्रसारण का वैश्विक अधिकार मिलने के बाद से ही ऐसे कई अनुत्तरित सवाल उठ रहे हैं। 

 
पिछले हफ्ते रुपर्ट मर्डोक के नियंत्रण वाली कंपनी ट्वïेंटी फस्र्ट सेंचुरी फॉक्स की भारतीय इकाई को आईपीएल के सभी प्रसारण अधिकार मिले हैं। भारत के अलावा दुनिया भर में आईपीएल के टेलीविजन एवं डिजिटल प्रसारण अधिकार हासिल करने के लिए स्टार ने 16,347.50 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। स्टार ने पांच वर्षों का प्रसारण अधिकार हासिल करने के लिए जो समग्र बोली लगाई थी वह विभिन्न श्रेणियों में लगाई गई बोलियों से अधिक थी। मसलन, फेसबुक ने भारत में डिजिटल अधिकार हासिल करने के लिए 3,900 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। वहीं सोनी ने भारत में टेलीविजन अधिकार पाने के लिए 11,050 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी।
 
इन आंकड़ों में ही इस स्तंभ की शुरुआत में पूछे गए पहले दो सवाल निहित हैं। सोनी पिक्चर्स नेटवर्क (एसपीएन) को अपने 4,500 करोड़ रुपये के राजस्व का एक तिहाई आईपीएल से ही मिल रहा था। उसने वर्ष 2008 में आईपीएल का प्रसारण अधिकार एक अरब डॉलर (उस समय करीब 5,000 करोड़ रुपये) में हासिल किया था। विश्लेषकों का कहना है कि पिछले दस वर्षों में एसपीएन ने इस क्रिकेट टूर्नामेंट के प्रसारण से 10,000 करोड़ रुपये से अधिक कमाए हैं। विपणन एवं वितरण पर हुए खर्च को हटा दें तो इन दस वर्षों में एसपीएन ने आईपीएल से 2,500 करोड़ रुपये से भी अधिक मुनाफा कमाया है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि उसने इन अधिकारों को आगे भी अपने पास रखने के लिए आखिरी सांस तक मुकाबला क्यों नहीं किया? आखिर उसे फेसबुक या एमेजॉन के साथ मिलकर गोलबंदी करने से किसने रोका था? फेसबुक और सोनी की बोलियों को एक साथ मिलाकर देखें तो आंकड़ा 14,950 करोड़ रुपये पर पहुंचता है। अगर सोनी अपने साथ एक और साझेदार को जोड़ लेता तो आईपीएल का वैश्विक प्रसारण अधिकार उसके नाम पर होता। 
 
एसपीएन के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) एन पी सिंह से जब इस मसले पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो वह उपलब्ध नहीं हो सके। लेकिन कुछ महीनों पहले जब मैंने उनसे यह पूछा था कि आईपीएल का अधिकार गंवाने की सूरत में सोनी क्या करेगा तो उन्होंने कहा था, 'फिर भी हमारे पास पांच देशों के क्रिकेट बोर्ड के प्रसारण अधिकार होंगे। इसके साथ ही हम फुटबाल समेत दस खेलों से जुड़े हुए हैं। हमारे पास फीफा विश्व कप 2018, चैंपियंस लीग और ली लीगा जैसे बड़े फुटबाल टूर्नामेंट के अधिकार हैं। सच तो यह है कि इंगलिश प्रीमियर लीग और बुंडेसलीगा को छोड़कर बाकी सभी बड़े फुटबाल टूर्नामेंट के प्रसारण अधिकार हमारे पास हैं।'
 
वैसे सोनी अरसे से क्रिकेट से इतर खेलों में अपनी पकड़ बनाने में लगा हुआ है। उसने इसी साल ज़ी समूह से 2,600 करोड़ रुपये में टेन स्पोट्र्स चैनल खरीदे हैं। टेन स्पोट्र्स के आगमन से सोनी के राजस्व में 600 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी लेकिन आईपीएल का अधिकार छिन जाने से उसे 1,500 करोड़ रुपये का घाटा भी होगा। ऐसे में एसपीएन का राजस्व आधार घटकर करीब 3,800 करोड़ रुपये पर सिमट सकता है। 
 
इस स्तंभ का तीसरा सवाल इसी से जुड़ा हुआ है। क्या ऑनलाइन अधिकार राजस्व के लिहाज से वाकई में गंभीर माध्यम बनने की स्थिति में पहुंच गए हैं? सोनी के सीईओ रह चुके  कुणाल दासगुप्ता ने स्टार की तरफ से लगाई बोली का विश्लेषण किया है। फिलहाल मीडिया सलाहकार के रूप में सक्रिय दासगुप्ता कहते हैं, 'ऑनलाइन वीडियो फीड को टीवी प्रसारण के ही साथ बिना किसी विलंब के प्रसारित करने की क्षमता टीवी प्रसारण और डिजिटल फीड को समेकित बना देती है। फेसबुक जैसे दिग्गज ने भी डिजिटल प्रसारण को पांच मिनट की देरी से प्रसारित करने के लिए 4,000 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। लेकिन स्टार ने टीवी के साथ ऑनलाइन फीड को भी एक साथ मुहैया कराने की बोली लगाई। मेरा मानना है कि ऐसा होने से स्टार के डिजिटल ब्रांड हॉटस्टार के दर्शकों की संख्या एक साल में टीवी दर्शकों को भी पीछे छोड़ सकती है। डेटा उपभोग की दरें कम होने से स्मार्टफोन पर आईपीएल देखने वाले भी बढ़ेंगे। हो सकता है कि हॉटस्टार पर आईपीएल मैचों की विज्ञापन दरें भी अगले पांच वर्षों में टीवी को पीछे छोड़ देंगी। अगर आईपीएल के एक मैच में टीवी विज्ञापन से 35 करोड़ रुपये मिलते हैं तो डिजिटल विज्ञापन भी करीब उतना ही राजस्व कमा लेगा।'
 
हालांकि इस आकलन के सही साबित होने में कई किंतु-परंतु हैं। आईपीएल के किसी बड़े मुकाबले को टीवी पर एक साथ पांच करोड़ दर्शक देखते हैं। इतने बड़े दर्शकों को लगभग उसी समय पर ऑनलाइन स्ट्रीम भी मुहैया कराना बड़ी चुनौती होगी क्योंकि भारत में अलग-अलग बैंडविथ हैं। इसके अलावा टीवी की तुलना में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की विज्ञापन दरें काफी कमजोर होती हैं। हालांकि स्टार अगर टीवी प्रसारण के ही समय पर ऑनलाइन स्ट्रीम मुहैया करा पाता है और टीवी के ही बराबर विज्ञापन दरें ऑनलाइन को भी मिलने लगती हैं तो फिर स्टार को आईपीएल का वैश्विक अधिकार मिलना अहम माना जाएगा। इससे डिजिटल प्लेटफॉर्म को वह अहमियत मिल सकेगी जो पहले कभी नहीं मिल पाई थी।
Keyword: IPL, star india, इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल),
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