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कहीं से भी हो सकता है कर आकलन

श्रीमी चौधरी / मुंबई September 15, 2017

करदाताओं के कर का आकलन अब कर क्षेत्र से मुक्त होगा। आगामी अक्टूबर महीने से आयकर विभाग मुंबई और दिल्ली में नई व्यवस्था की प्रायोगिक परियोजना पेश करेगी, जिससे नई व्यवस्था की खामियां दूर की जा सकें। उसके बाद इस परियोजना का विस्तार पहले चरण में 100 शहरोंं तक किया जाएगा। इस व्यवस्था में किसी खास करदाता के प्रोफाइल को देश का कोई भी अधिकारी विशेष सॉफ्टवेयर से देख सकेगा। मौजूदा व्यवस्था में करदाता के कर का आकलन किसी खास क्षेत्र में ही किया जाता है, जहां उसका निवास होता है। 
 
इस कदम का मकसद विभाग में भ्रष्टाचार को खत्म करना और कर के आकलन करने वाले से करदाता के उत्पीडऩ को रोकना है। इस मामले से जुड़े एक वरिष्ठ आईटी अधिकारी ने कहा, 'यह अनूठी पहल है, जो पहली बार की जा रही है। इसके तहत न तो करदाता और न ही कर अधिकारी एक दूसरे को पहचान सकेंगे।' इस व्यवस्था में कर से संबंधित सभी तरह के मामले का समाधान होगा, जिसमें रिटर्न दाखिल कराना, मामलों की जांच और अन्य चीजें शामिल हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस व्यवस्था से 18 मुख्य कर क्षेत्र देश से खत्म हो जाएंगे, जो प्रत्यक्ष कर संग्रह का काम करते हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मौजूदा कर कानून में कुछ खामियों का उल्लेख किया था और आईटी विभाग को निर्देश दिया था कि आईटी विभाग को करदाताओं के लिए नई व्यवस्था बनानी चाहिए। 
 
नई व्यवस्था के तहत अगर कर विभाग किसी व्यक्ति के खिलाफ दिल्ली में जांच शुरू करता है तो सॉफ्टवेयर उससे संबंधित जानकारियां देगा और एक विशेष पहचान संख्या देगा। यह संख्या या कोड बगैर किसी क्रम के किसी भी आकलन अधिकारी को दिया जा सकता है, चाहे वह मुंबई, गुवाहाटी या कि सी अन्य शहर में बैठा होगा। आकलन अधिकारी उस व्यक्ति के बारे मे नहीं जान सकेगा, जिसकी जांच की जा रही है। यह जांच मामले के विस्तृत ब्योरे और मौजूद दस्तावेजों के आधार पर होगी। नई व्यवस्था में आकलन अधिकारी के पास विवेकाधीन अधिकार भी नहीं होगा, जिससे कि वह अतिरिक्त दस्तावेज, रिकॉर्ड या करदाता को खुद उपस्थित होने के लिए कह सके। 
Keyword: income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान home,,
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