Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, September 24, 2017 11:07 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम जिरह खबर

रेल सुरक्षा को पटरी पर लाने की चुनौती

ज्योति मुकुल /  09 14, 2017

हादसों का सफर

आम भारतीयों के लिए रेल में सफर करना बेहद खतरनाक हो गया है।
आखिर रेलवे में क्या गलत हुआ है?

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने गुरुवार को देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखी। यह ट्रेन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से अहमदाबाद के बीच दौड़ेगी। 1.10 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाली इस परियोजना को 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना की नींव रखे जाने से कुछ ही सप्ताह पहले उत्तर प्रदेश में खतौली के करीब भीषण रेल दुर्घटना हुई थी। खतौली के करीब उत्कल एक्सप्रेस के कई डिब्बे पटरी से उतर गए थे और इसमें 23 लोगों की मौत हो गई थी। यह ऐसा हादसा था जिसे रोका जा सकता था। इसके बाद भी कई छोटे-बड़े हादसे हुए और आखिरकार रेल मंत्री सुरेश प्रभु को रेल मंत्रालय से हटा दिया गया और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ए के मित्तल को इस्तीफा देना पड़ा।

नए रेल मंत्री पीयूष गोयल और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्विनी लोहानी भारत को बुलेट ट्रेन चलाने वाले विशिष्ट देशों के क्लब में शामिल करने की तैयारियों में जुटे हैं लेकिन देश के आम नागरिकों के लिए रेलवे में सफर करना खतरनाक होता जा रहा है। रेल सुरक्षा वर्षों से एक मुद्दा है। रेल मंत्रालय के मुताबिक संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के पहले कार्यकाल में रेल दुर्घटनाओं में 759 लोगों की मौत हुई थी जबकि संप्रग-दो के दौरान यह संख्या 938 पहुंच गई। यह संख्या अपने आप में बहुत ज्यादा है।

रेल मंत्रालय का दावा है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पहले तीन वर्षों में रेल दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या घटकर 652 रह गई है। लेकिन मंत्रालय से मेल नहीं खाता है कि नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में रेलवे में सुरक्षा पर निवेश 60 फीसदी बढ़कर सालाना 54,031 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है जो संप्रग-2 के दौरान औसतन 33,972 करोड़ रुपये था। मंत्रालय का यह भी दावा है कि मौजूदा सरकार ने सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न श्रेणियों में 37,510 लोगों को भर्ती किया है और इस सप्ताह एक अप्रैल तक सुरक्षा से जुड़े कुल कर्मचारियों की संख्या 635,940 हो गई है। अगर मंत्रालय का दावा सही है तो फिर रेल सफर इतना जोखिमभरा क्यों हैं?

इसका एक कारण यह हो सकता है कि सरकार की प्राथमिकताएं सही नहीं हैं। उत्कल एक्सप्रेस के पटरी से उतरने के 5 दिन बाद 26 अगस्त को प्रभु ने सीटी की एक रिपोर्ट को ट्वीट किया। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि समर्पित मालभाड़ा गलियारे के निर्माण, स्टेशनों के पुनर्विकास और लोकोमोटिव कारखानों के निर्माण का काम चल रहा है। बुलेट ट्रेन जैसी परियोजनाएं भी आकार ले रही हैं। अलबत्ता रिपोर्ट में कहा गया था कि फैसला लेने और परियोजना मूल्यांकन में काफी सुधार आया है और इसमें अब परियोजनाओं को मंजूरी मिलने में 24 महीने के बजाय 6 महीने का समय लगता है। इन परियोजनाओं के बाद भरोसेमंद सेवा देने की रेलवे की क्षमता में सुधार आएगा।

रेलवे बोर्ड के पूर्व सलाहकार (सुरक्षा) रहे सुनील कुमार कहते हैं कि प्रभु का जोर केवल निवेश बढ़ाने और ट्विटर और वाई-फाई जैसी चीजों को बढ़ाने पर लगा रहा जबकि उन्होंने रेलवे के बुनियादी परिचालन को नजरअंदाज किया। उनका कहना है कि प्राथमिकता में इस बदलाव के कारण रेलवे के भारीभरकम ढांचे में अनुशासनहीनता का माहौल बन गया। कुमार ने कहा, 'भारतीय सेना की तरह रेलवे भी बहुत बड़ा संगठन है। सैनिकों के लिए तो शायद जीवन में एक बार लड़ाई लडऩी पड़ती है लेकिन रेल कर्मचारियों को तो हर दिन जूझना पड़ता है। ऐसे में आप गलती करने का जोखिम नहीं उठा सकते।' 

वह साथ ही दावा करते हैं कि रेल मंत्री, रेल बोर्ड और रेल कर्मचारियों के बीच पूरी तरह संवादहीनता की स्थिति बन गई थी। यह भी सच है कि दो साल के सेवा विस्तार पर चल रहे रेलवे बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष मित्तल रेलवे स्टोर्स से आए थे और उनके पास रेलवे परिचालन का अनुभव नहीं था। शायद रेलवे के कामकाज को प्रभावित करने में इसकी भी भूमिका होगी। उनकी नियुक्ति ऐसी ही है जैसे आर्मी सप्लाई कोर के अधिकारी को सेना प्रमुख बना दिया जाए। रेलवे में विभिन्न विभागों के बीच प्रतिद्वंद्विता भी एक गंभीर समस्या है। कई डिवीजनों में उनकी सेवा के कई अधिकारियों को प्रमुख बनाया गया।

बुनियादी गलतियों की भारी कीमत चुकानी पड़ती है। उदाहरण के लिए 20 अगस्त को हुए उत्कल एक्सप्रेस हादसे में यातायात को रोके बिना हरिद्वार-दिल्ली लाइन पर मरम्मत का काम चल रहा था। इसके कारण न केवल उत्कल एक्सप्रेस पटरी से उतर गई बल्कि रेल लाइन के करीब स्थित एक घर से टकरा गई। कुमार ने कहा, '20 लोग केवल इसलिए मर गए क्योंकि मरम्मत स्थल से 1,000 मीटर पहले चेतावनी वाला लाल कपड़ा नहीं लगाया गया था।' उन्होंने साथ ही आरोप लगाया कि 2016 में हुई परीक्षा के परिणाम इसलिए रोके गए हैं क्यांकि रेलवे अपने परिचालन अनुपात को 100 से ऊपर नहीं जाने देना चाहता है। परिचालन अनुपात राजस्व के लिए परिचालन व्यय का प्रतिशत है। यह जितना कम होगा, रेलवे की कार्यकुशलता उतनी ही अच्छी होगी। इसके 100 से ऊपर पहुंचने का मतलब है कि रेलवे कमाई से ज्यादा खर्च कर रहा है। अप्रैल-दिसंबर 2016 के दौरान यह 100 से ऊपर चला गया था लेकिन रेलवे मार्च 2017 तक इसे 96.9 तक लाने में सफल रहा।

रेलवे के एक अधिकारी ने कुमार की दलीलों को दरकिनार करते हुए कहा कि 2009-10 और 2013-14 के दौरान सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों के कुल मंजूर पदों में से 18.65 फीसदी खाली थे। 2014 से 2017 के दौरान कुल मंजूर पदों में 5 फीसदी बढ़ोतरी के बावजूद 2017 में खाली पदों की संख्या घटकर 16.86 फीसदी रह गई। रेलवे में कर्मचारियों की कुल संख्या 13.3 लाख है। 

कुमार का कहना है कि सुरक्षा कर्मचारियों में एक बड़ी संख्या चालकों की है जिन पर काम का बहुत बोझ है। तो फिर मंत्री या शीर्ष रेलवे अधिकारी को बदलकर सुरक्षा संबंधी मुद्दों को हल किया जा सकता है? सूत्रों के मुताबिक गोयल उन बुनियादी मुद्दों को सुलझाने में लगे हैं जिनसे सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उनकी पिछले सप्ताह अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में कहा गया कि रेल हादसों की मुख्य वजह बिना फाटक वाले रेलवे क्रॉसिंग और पटरियों में गड़बड़ी है। 

लेकिन रेलवे का बुनियादी ढांचा खस्ताहाल है। चाहे ट्रेन के डिब्बे हों या फिर रेल पटरियां। कुमार का कहना है कि इसका एक कारण यह है कि 2001 में तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार द्वारा बनाए गए विशेष रेलवे सुरक्षा कोष को बंद कर दिया गया है। इस कोष को 2007-08 के पाद पैसा नहीं मिला है। राजग सरकार के तहत वित्त मंत्रालय ने रेल बजट का आम बजट में विलय किए जाने तक दूसरा कोष बनाने में देरी की। इस साल इसे अंजाम दिया गया और वित्त मंत्री ने खुद ही रेलवे के लिए बजट प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने सुरक्षा संबंधी अहम कामों के लिए राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष गठित करने की घोषणा की। इस कोष में अगले 5 साल के दौरान एक लाख करोड़ रुपये जमा किए जाने हैं।

रेल सुरक्षा को बढ़ाने के लिए कुछ कदम उठाए जा रहे हैं। रेलवे ने हाल में एक बयान में कहा कि तमिलनाडु की इंटिग्रल कोच फैक्टरी ने ऐसे कोच बनाने बंद कर दिए हैं जो हादसे के समय एकदूसरे पर चढ़ जाते हैं। इस समय रेलवे के पास ऐसे 40,000 कोच हैं जो उसकी कुल क्षमता का 90 फीसदी है। इन डिब्बों को सेवा से हटाया नहीं जा सकता है लेकिन उन्हें सुरक्षित बनाने के उपाय किए जा रहे हैं। पटरियों में दरारों का पता लगाने की प्रणाली भी अपनाई जा रही है और दुर्घटना संभावित लाइनों पर खराब पटरियों को प्राथमिकता के आधार पर बदलने के आदेश दिए जा चुके हैं। कुमार कहते हैं कि रेल सुरक्षा के लिए जो भी कदम उठाए जा रहे हैं उन्हें अमली जामा पहनाने में दो साल का समय लग जाएगा। इसका मतलब है कि रेलवे भले ही बुलेट ट्रेन जैसी उच्च तकनीक को पटरी पर उतार ले लेकिन उसकी मुख्य सेवा बदहाल ट्रैक पर ही चलती रहेगी।
Keyword: रेलवे, बुलेट ट्रेन, परियोजना, राजधानी, खतौली, रेल दुर्घटना, रिपोर्ट, रेलवे बोर्ड,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
  आपका मत
 क्या अतिरिक्त व्यय से सुधरेगी अर्थव्यवस्था की चाल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.