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अटकी सड़क परियोजनाओं के ठेके होंगे खत्म

मेघा मनचंदा / नई दिल्ली 09 14, 2017

परियोजनाओं की कुल लागत करीब 5,000 करोड़ रुपये

ज्यादातर परियोजनाएं उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और ओडिशा में

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण मंजूरी मिलने में देरी के कारण लंबे समय से अटकी करीब 10 राजमार्ग परियोजनाओं के अनुबंध जल्दी समाप्त कर दिए जाएंगे। ये परियोजनाएं तमिलनाडु, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में हैं और इनकी कुल लागत 5,000 करोड़ रुपये है। गडकरी का कहना है कि इन परियोजनाओं को बहाल करना बहुत मुश्किल है।

गडकरी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ साक्षात्कार में यह बात कही। हालांकि उन्होंने उन कंपनियों के नाम नहीं बताए जिन्हें इन परियोजनाओं के ठेके दिए गए हैं लेकिन कहा कि इनके लिए फिर से नीलामी आयोजित की जाएगी। अटकी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का औसत पिछले तीन साल से 25 फीसदी है और सरकार इसे 15-20 फीसदी तक लाने की योजना बना रही है। अनुबंध समाप्त होने की प्रक्रिया पूरी होने के 45 दिन बाद ही इन परियोजनाओं के लिए फिर से बोली प्रक्रिया शुरू होगी। अनुबंध समाप्त करने की प्रक्रिया बहुत लंबी और बोझिल है। इसमें कई महीने लग सकते हैं।

ईवाई इंडिया में पार्टनर और पीपीपी लीडर अभय अग्रवाल का कहना है कि अनुबंध खत्म करने के लिए आमतौर पर एक नोटिस अवधि होती है जिसे दोनों पक्ष मिलकर तय कर सकते हैं। लेकिन सरकार को एक समिति गठित करनी चाहिए जिसमें सड़क परिवहन मंत्रालय, एनएचएआई और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों को शामिल करना चाहिए। इस समिति को समाधान का रास्ता निकालना चाहिए ताकि ये मामले मध्यस्थता अदालतों में न पहुंचें।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक इस समय देश में बुनियादी क्षेत्र में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 351 ऐसी परियोजनाएं चल रही हैं। फरवरी तक इनमें से 127 परियोजनाएं देरी से चल रही हैं जबकि 115 की लागत बढ़ चुकी है। इसी तरह 51 ऐसी परियोजनाएं हैं जिनकी लागत भी बढ़ चुकी है और वे समय से पीछे भी चल रही हैं। देरी से चल रही परियोजनाओं में 122 राजमार्ग परियोजनाएं हैं जिनमें से करीब 90 परियोजनाएं एनएचएआई के जिम्मे है। इन परियोजनाओं में देरी का कारण विभिन्न तरह की मंजूरी मिलने में देरी, बुनियादी ढांचे की कमी, कानून व्यवस्था की समस्या, निगम से अनुमति मिलने में देरी, यूटिलिटीज को हटाने में देरी, परियोजना पूर्व गतिविधियां और उपकरण आपूर्ति, फंड की समस्या आदि हैं।
Keyword: परियोजना, नितिन गडकरी, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी, राजमार्ग,
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