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कपास के बढ़े खरीदार, हुए निर्यात करार

रॉयटर्स / मुंबई September 14, 2017

कपास के सबसे बड़े निर्यातक अमेरिका में भीषण तूफान आने के बाद आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत में दुनिया के बड़े कपास खरीदारों की तादाद बढ़ गई है। दुनिया के बड़े-बड़े कपास खरीदार एशिया के ही हैं। डीलरों का कहना है कि अमेरिका में तूफान की वजह से फसल का रकबा और उसकी किस्म प्रभावित हुई है। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े कपास निर्यातक भारत ने पिछले हफ्ते ही कपास की करीब 10 लाख गांठों की बिक्री के लिए चीन, ताइवान, वियतनाम, पाकिस्तान, बांग्लादेश और इंडोनेशिया की फर्मों के साथ करार किया है। ये फर्में एचऐंडएम, इंडिटेक्स की स्वामित्व वाली कंपनी जारा और वॉलमार्ट स्टोर्स इंक जैसे ब्रांडों की प्रमुख गारमेंट सप्लायर हैं। करीब दो हफ्ते पहले भी 3 लाख गांठों के लिए करार किया गया था।
 
डीलरों को उम्मीद है कि पिछले हफ्ते की तरह ही आगामी कुछ महीनों में भी इसी तरह के अनुबंध हो सकते हैं और अक्टूबर में शुरू होने वाले 2017-18 के सीजन में देश के निर्यात में एक-चौथाई तक की वृद्धि हो सकती है। एक प्रमुख निर्यातक जयदीप कॉटन फाइबर्स प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्याधिकारी चिराग पटेल कहते हैं, 'इस साल देश के कपास के लिए काफी अच्छा मौका है। एशियाई खरीदार अमेरिका के बजाय भारतीय कपास की ओर उम्मीदें लगाए हैं।'
 
डीलरों के मुताबिक तबाही मचाने वाले तूफान 'हार्वे और इरमा' की वजह से बड़े कपास राज्यों टैक्सस और जॉर्जिया में बड़े पैमाने पर फसल बरबाद हुई है। टैक्सस इस तूफान से काफी प्रभावित हुआ। शिकागो की कंपनी प्लेक्सस कॉटन लिमिटेड में जोखिम प्रबंधक पीटर एगली ने सबसे बड़े उत्पादक अमेरिका के इस राज्य में हार्वे तूफान के असर के बारे में बताया, 'टैक्सस में कपास की फसल खराब हुई है। करीब 5 लाख से 6 लाख गांठें तूफान में नष्ट हो गईं।'
 
अमेरिका के कृषि विभाग के मुताबिक वर्ष 2016 में अमेरिका ने अपने 86 फीसदी कपास का निर्यात किया जिसमें से 69 फीसदी एशिया गया। अमेरिका से कम आपूर्ति होने का फायदा दूसरे कपास उत्पादक देशों मसलन ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया को भी हो सकता है लेकिन भारत ने जिस कीमत की पेशकश की है, उतनी कीमत लेना इन देशों के लिए मुश्किल होगा क्योंकि भारत में बंपर फसल की वजह से दरें कम रहने की संभावना है। भारत के कारोबारियों ने अमेरिका से होने वाली आपूर्ति के मुकाबले कम दर पर निर्यात करार किया है। 
 
पटेल का कहना है कि भारत में अक्टूबर से शुरू होने वाले 2017/18 सीजन में कपास की 4 करोड़ गांठों की उम्मीद है। ऐसे में घरेलू कीमतें कम होंगी और निर्यात दर ज्यादा प्रतिस्पद्र्धी होगी। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक नए सीजन में किसानों ने 1.2 करोड़ हेक्टेयर कपास की बुआई की है जो एक साल पहले की तुलना में 19 फीसदी अधिक है। भारत में वर्ष 2016/17 के  सीजन में कपास की 3.4 करोड़ गांठें पैदा हुई थीं। एक प्रमुख कपास निर्यातक खिमजी विसराम ऐंड संस में पार्टनर नयन मिरानी का कहना है कि फसल के अनुरूप मौसम होने से नए सत्र में देश को दुनिया के बाजार में कपास की 75 लाख गांठें बेचने में मदद मिलेगी जो पिछले साल की  60 लाख गांठों के मुकाबले अधिक होगी। 
 
कुछ कारोबारियों का मानना है कि अगर दुनिया का सबसे बड़ा कपास उपभोक्ता देश चीन अपने आयात को बढ़ा देता है तो देश का कपास  निर्यात 80 लाख गांठों के स्तर को पार कर सकता है। चीन ने अपने भंडार से 6 मार्च को कपास की बिक्री शुरू की थी और उसने अगस्त के अंत तक रोजाना नीलामी बंद करने की योजना बनाई थी। लेकिन इसने कम आपूर्ति के बीच स्थानीय कीमतें बढऩे के बाद एक अतिरिक्त महीने तक बिक्री करने का फैसला किया है जिससे संकेत मिलता है कि उसे अपना कम भंडार पूरा करने की जरूरत होगी। 
 
एक वैश्विक ट्रेडिंग कंपनी के मुंबई के डीलर का कहना है कि उन्हें पिछले कुछ हफ्ते में काफी ऑर्डर मिले हैं, खासतौर पर दिसंबर तिमाही में निर्यात के ऑर्डर मिले हैं। रुपये के मूल्य में बढ़ोतरी, वैश्विक कीमतें आकर्षक न होने से कुछ हफ्ते पहले तक देश निर्यात करार के लिए मशक्कत कर रहा था लेकिन हाल में वैश्विक कीमतों में आई तेजी के कारण विदेश में होने वाली बिक्री ज्यादा प्रतिस्पद्र्धी हो गई है। 
Keyword: cotton, कपास बुआई america,,
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