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छोटी-छोटी बैटरियां बदलकर दौड़ेगी गाड़ी

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली 09 12, 2017

इलेक्ट्रिक बसों में होगा छोटी बैटरी का इस्तेमाल

► एक बार चार्ज करने पर चल सकती हैं 50 किलोमीटर
चार्जिंग के बजाय बैटरी देकर ली जाएगी पहले से चार्ज की गई बैटरी
2-3 मिनट में हो जाएगी बैटरियों की अदलाबदली

सरकार पेट्रोल और डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन के बजाय बैटरी या मिश्रित ईंधन से चलने वाले वाहनों पर जबानी जोर ही नहीं दे रही है, उसके लिए वह बाकायदा योजना भी तैयार कर रही है। शुरुआत में सरकार ने बिजली से चलने वाले तिपहिया और बसों की बिक्री प्रोत्साहित करने के लिए खाका तैयार किया है। इसमें एक बार चार्ज होने पर 50 किलोमीटर तक वाहन चलाने वाली छोटी बैटरियों को चुना गया है।

बैटरियां छोटी होने से इलेक्ट्रिक वाहनों को हाथोहाथ लिया जा सकेगा क्योंकि बैटरियों को चार्ज करने की दिक्कत खत्म हो जाएगी। असल में सरकार की योजना बैटरियों की अदलाबदली करने की है यानी जब वाहन की बैटरी में चार्ज बहुत कम रह जाएगा तो उसका मालिक बैटरी को चार्जिंग स्टेशन पर ले जाएगा और बदले में चार्ज की हुई बैटरी ले लेगा। इसमें 2-3 मिनट का वक्त लगेगा और बैटरियों को देर तक चार्ज करने का झंझट नहीं रहेगा। जो बैटरियां स्वैपिंग स्टेशन पर पहुंचेंगी, उन्हें पूरी रात चार्ज किया जा सकेगा। सरकारी सूत्रों ने बताया कि 15 विनिर्माताओं ने भारत में लीथियम आयन बैटरियां बनाने में दिलचस्पी दिखाई है।

सरकार ने बड़ी बैटरी नहीं चुनी हैं। ये बैटरियां एक बार चार्ज होने पर गाड़ी को 120 से 200 किलोमीटर तक तो खींच ले जाती हैं, लेकिन इन्हें चार्ज करना आसान नहीं है। उसके लिए 45 डिग्री सेंटीग्रेड पर दो घंटे से भी अधिक समय तक फास्ट चार्जिंग की जरूरत पड़ती है। इससे उनके काम करने की अवधि में एक तिहाई कमी हो जाती है और इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की लागत भी बढ़ जाती है। फास्ट चार्जिंग स्टेशन बनाने में 15-20 लाख रुपये का खर्च भी आता है। सरकार ने वाहन उद्योग और बैटरी निर्माता कंपनियों से बैटरी पर चर्चा की है।

अपने इस्तेमाल के लिए सरकार जो इलेक्ट्रिक वाहन खरीदेगी, उनका शुरुआती ठेका इसी तरह की बैटरी वाले वाहनों का होगा। सरकार नवंबर में निविदा जारी करने के बारे में सोच रही है। यह निविदा सरकारी कंपनियों के जरिये जारी की जाएगी और इसमें 50,000 तिपहिया खरीदने का ठेका होगा। अगले साल जनवरी में 12 शहरों में 10,000 बसें खरीदने की योजना बन रही है।

इस परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, 'इस योजना में करीब 50 कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है। इनमें वाहन, बैटरी और उपप्रणालियां बनाने वाली कंपनियां तो हैं ही, एग्रीगेटर कंपनियां भी हैं और वे कंपनियां भी शामिल हैं, जो बैटरियों की अदलाबदली और चार्जिंग का बुनियादी ढांचा तैयार करना चाहती हैं। हमने तिपहिया और बसों के लिए योजना बना ली है और टैक्सियों के लिए योजना तैयार कर रहे हैं। आखिर में हम यात्री कारों के बारे में योजना बनाएंगे। उसमें बैटरी के आकार के बारे में अभी तक अंतिम फैसला होना है।'

अधिकारी ने कहा कि ज्यादातर सिटी बसों ने प्रति ट्रिप 30 किलोमीटर से कम का सफर तय किया और दो ट्रिप के बीच 10 मिनट का अंतर था, जो बैटरी की अदला-बदली के लिए पर्याप्त वक्त है। अधिकारी ने कहा कि 12 शहरों में 200 से ज्यादा बैटरी अदला-बदली स्टेशन गठित करने की योजना है।

विनिर्माता बिना बैटरी के वाहन बेचेंगे। तिपहिया व बसों के लिए बैटरी विशेष का मानकीकरण तय है, लिहाजा इसका विनिर्माण अलग-अलग वेंडर करेंगे। बैटरी की लागत 30 फीसदी घटाने के लिए सरकार ने उद्योग व शिक्षण संस्थानों के साथ काम किया है। अधिकारियों ने कहा कि बिक्री में इजाफे के साथ 250 डॉलर वाली लीथियम आयन बैटरी की कीमत 2020 तक घटकर 150 डॉलर रह जाने की उम्मीद है।

इसका खाका तैयार किया गया है, जिसमें कहा गया है कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को आगे बढ़ाने के लिए बहुत ज्यादा सब्सिडी मुहैया नहींं कराएगी। यह चीन व अमेरिका के उलट है, जहां इलेक्ट्रिक वाहनों पर काफी ज्यादा सब्सिडी मुहैया कराई जाती है और यह उनकी लागत के 60 फीसदी तक है। टैक्सी के लिए तैयार योजना में बैटरी की अदला-बदली और फिक्स्ड चार्जिंग का संयोजन शामिल है। एक बार चार्ज करने पर ऐसी बैटरी 110 से 160 किलोमीटर चल सकता है।

Keyword: इलेक्ट्रिक बस, बैटरी, चार्जिंग, पेट्रोल, डीजल, जीवाश्म ईंधन, बिजली, तिपहिया,
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