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कांग्रेस की कमान लेने के लिए तैयार राहुल

अर्चिस मोहन /  09 12, 2017

बोले राहुल

► जल्दबाजी में नोटबंदी और जीएसटी लागू करने से गंभीर आर्थिक समस्याएं पैदा हुईं
भारत में राजनीति से लेकर कारोबार तक में है वंशवाद
देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती नौकरियां पैदा करना है
देश में शीर्ष स्तर की 100 कंपनियों को तवज्जो मिलती है
कांग्रेस पार्टी में आया अहंकार, लोगों से संवाद करना किया बंद

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि अगर पार्टी उन्हें अध्यक्ष की भूमिका देना चाहेगी तो वह उसे निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। लेकिन उन्होंने इस संबंध में निर्णय का फैसला पार्टी पर छोड़ते हुए संकेत दिया कि महत्त्वपूर्ण पदों के लिए पार्टी के संरक्षकों और युवा नेताओं के बीच एक संगठनात्मक प्रक्रिया के जरिये फैसला किया जाता है और यह प्रक्रिया इस समय जारी है। कांग्रेस फिलहाल संगठनात्मक चुनाव आयोजित कराने की प्रक्रिया में है जो अक्टूबर में हो सकता है।

 देश के लिए अपने नजरिये पर विस्तार से बात करते हुए राहुल ने नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना की। सोमवार को अमेरिका के बर्कली में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया में छात्रों और शिक्षकों के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने वंशवादी शासन, 1984 के सिख विरोधी दंगे और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की दूसरी पारी की सरकार में भ्रष्टाचार से जुड़े सवालों के जवाब दिए।

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों खासतौर पर नोटबंदी और जल्दबाजी में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने की वजह से देश बेरोजगारी, किसानों में निराशा बढऩे, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 2 फीसदी की कमी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि हर दिन बाजार में 30,000 युवा रोजगार के लिए आते हैं लेकिन सरकार प्रतिदिन महज 500 रोजगार के मौके तैयार कर पाती है।

उनका कहना था, 'आर्थिक वृद्धि में कमी चिंताजनक है और इससे देश में रोष बढ़ रहा है।' उन्होंने कहा कि तकरीबन 1.2 करोड़ युवा देश के रोजगार के लिए बाजार में हर साल आते हैं और देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती नौकरियां पैदा करना है। उन्होंने कहा, 'हमें चीन के तौर तरीकों से हटकर लोकतांत्रिक माहौल में रोजगार के मौके तैयार करने होंगे। हम कुछ लोगों द्वारा नियंत्रित बड़े-बड़े कारखानों का मॉडल नहीं अपना सकते हैं।

राहुल ने कहा कि भारत में नौकरियां लघु एवं मध्यम श्रेणी के उद्योगों से आएंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को बड़ी तादाद में लघु एवं मध्यम उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में तब्दील करना होगा। उन्होंने कहा, 'फिलहाल देश में शीर्ष स्तर की 100 कंपनियों को तवज्जो मिलती है। बैंकिंग तंत्र पर उनका एकाधिकार होता है और सरकार के दरवाजे भी उनके लिए हमेशा खुले हुए हैं। उनके ही द्वारा कानून के बारे में सुझाव दिए जा रहे हैं।'

हालांकि उन्होंने मोदी की प्रमुख योजनाओं 'मेक इन इंडिया' और 'स्वच्छ भारत' को अच्छा विचार बताया। लेकिन कहा कि 'मेक इन इंडिया' का उनका अपना विचार कुछ हटकर है। राहुल ने कहा कि वह 'मेक इन इंडिया' में छोटे और मध्यम दर्जे के उद्योगों पर अधिक ध्यान देना चाहेंगे।

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि देश में राजनीति से लेकर कारोबार तक वंशवाद एक सामान्य चीज है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में कई ऐसे लोग थे जिनका ताल्लुक किसी राजनीतिक परिवार से नहीं है और कुछ लोग उनकी तरह भी हैं जिनके पिता, दादी, परनाना राजनीति में थे। राहुल ने कहा, 'असली सवाल यह है कि क्या उस व्यक्ति में काबिलियत है और क्या वह संवेदनशील है।'

कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी सरकार ने वर्ष 2014 से जितनी भी योजनाओं को अमलीजामा पहनाया है उसकी परिकल्पना कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार की थी। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की निर्णय लेने वाली केंद्रीकृत संरचना के बजाय कांग्रेस मूलत: लोगों और नेतृत्व के बीच संवाद स्थापित करने वाली पार्टी। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि साल 2012 के करीब पार्टी में थोड़ा घमंड आ गया और इसने लोगों से संवाद करना बंद कर दिया।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वह अमेरिका से भारत के करीबी रिश्ते और अमेरिका से दोस्ती पर अपना समर्थन देते हैं लेकिन यह भारत को अलग-थलग करने की कीमत पर नहीं, क्योंकि यह खतरनाक हो सकता है। उन्होंने भारत के पड़ोसी देशों पर चीन के बढ़ते प्रभाव पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में नफरत, गुस्सा, हिंसा और ध्रुवीकरण की राजनीति ने अपना सिर उठा लिया है और इससे पिछले 70 सालों में हासिल सफलता पर पानी फिर रहा है।

अमेरिका में दिए गए राहुल के बयान के बाद भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल को एक नाकाम वारिस और नाकाम राजनेता करार दिया। 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से राहुल के खिलाफ ईरानी खड़ी थीं। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी द्वारा अमेरिका में मोदी सरकार की आलोचना करने पर उन्हें आड़े हाथ लेते हुए  कहा कि उन्होंने विदेश में जाकर सरकार की आलोचना नहीं करने की भारतीय राजनीति की स्थापित परंपरा को तोड़ा है तथा उन्हें सरकार के प्रदर्शन पर राहुल के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं है।

Keyword: Congress, rahul gandhi, Prime minister,
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