Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, September 24, 2017 10:39 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

आशा की किरण

संपादकीय /  September 12, 2017

बिजली मंत्रालय की उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) के सफल होने के प्रमाण सामने आ रहे हैं। नवंबर 2015 में इसकी शुरुआत के बाद से ही नीतिगत पर्यवेक्षक इस मसले पर गहरी निगाह रखे हुए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यह योजना वह काम करने के लिए बनाई गई है जिसे करने में पिछली दो सरकारें क्रमश: सितंबर 2003 और सितंबर 2012 में  विफल हो चुकी थीं। उदय योजना का मुख्य उद्देश्य है राज्यों की विद्युत वितरण कंपनियों की वित्तीय सेहत दुरुस्त करना। यह लक्ष्य परिचालन प्रदर्शन में सुधार के जरिये हासिल किया जाना है। खासतौर पर समग्र पारेषण और वाणिज्यिक नुकसान को कम करके ऐसा किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त आपूर्ति की औसत लागत के अंतर को समाप्त करके और इन कंपनियों के औसत राजस्व प्राप्ति के अंतर को कम करके भी ऐसा किया जा सकता है। मार्च 2015 तक यह 4 लाख करोड़ रुपये हो चुका था। वहीं वाणिज्यिक नुकसान की बात करें तो वर्ष 2014 तक वह 23 फीसदी के स्तर पर था। जाहिर है इन दोनों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता थी।
केंद्र सरकार के मुताबिक उदय के अधीन बिजली वित्त निगम की बिजली खरीद लागत, वाणिज्यिक नुकसान और ब्याज दर, सभी में कमी आनी शुरू हो गई। इसके चलते मौजूदा सरकार के कार्यकाल में राजस्व-लागत का अंतर 40 फीसदी तक कम हो गया है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि औसत वाणिज्यिक नुकसान वर्ष 2017 में घटकर 20 फीसदी हो गया है। 26 में से 18 राज्यों के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिला है।
परंतु यह भी सच है कि वर्ष 2019 तक 15 फीसदी का लक्ष्य हासिल करने के लिए अभी राज्यों को कड़ी मशक्कत करनी होगी। इसके अलावा छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और जम्मू कश्मीर समेत आठ राज्य ऐसे भी हैं जहां हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। हकीकत में इन राज्यों के ऋण पुनर्गठन योजना में शामिल होने के बाद वाणिज्यिक नुकसान में इजाफा ही हुआ है। इस नुकसान के अलावा बिजली खरीद लागत और बिक्री कीमत का अंतर भी बढ़ा है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, झारखंड और तमिलनाडु में यह अंतर 0.26 फीसदी से 2.55 फीसदी के बीच है। इस गिरावट के बावजूद इस अंतर का औसत वर्ष 2014 के 0.76 फीसदी से घटकर 0.46 फीसदी रह गया। जब तक कमजोर प्रदर्शन करने वाले इन राज्यों की वितरण कंपनियों की वित्तीय सेहत में सुधार नहीं दिखाई देता है तब तक उदय योजना का राष्टï्रीय स्तर पर अपने लक्ष्यों को हासिल करना मुश्किल ही माना जाएगा।
निश्चित तौर पर ऐसी कई वजह हैं जिनके चलते भाजपानीत केंद्र सरकार को उदय योजना को जारी रखना चाहिए। शुरुआती नतीजे सकारात्मक हैं। जो आठ राज्य पिछड़े हुए हैं उनमें से छह में भाजपा का शासन है। इसका मतलब यह हुआ कि पारेषण नीति सुगम हो सकती है क्योंकि केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल में कोई दिक्कत नहीं होगी। दूसरी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि जिन 26 राज्यों ने उदय योजना में शिरकत की है उनमें से 17 राज्य पिछले वित्त वर्ष में ही शामिल हुए हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि नीतिगत परिणाम हासिल करने के लिए अभी कुछ और प्रतीक्षा करना बेहतर होगा। उम्मीद की जा सकती है कि संकटग्रस्त कंपनियां भी जल्दी ही सुधार के एजेंडे पर आ जाएंगी। केंद्र और राज्यों के बीच इस विषय पर आपसी चर्चा के बाद काफी सुधार हो सकता है। उदाहरण के लिए आकलन के प्रति जागरूकता ने भी अच्छे परिणाम हासिल करने में मदद की है। मसलन प्रीपेड मीटर, मौके पर बिलिंग और निजी-सार्वजनिक भागीदारी इसके उदाहरण हैं। किफायत बढ़ाने के लिए इनका इस्तेमाल अन्य राज्यों में भी किया जा सकता है।"

Keyword: UDAY, Power, Discom,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
  आपका मत
 क्या बुलेट ट्रेन के लिए देश भर में बने हीरक चतुर्भुज?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.