बिजनेस स्टैंडर्ड - धन के अग्रिम इस्तेमाल का प्रस्ताव खारिज
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धन के अग्रिम इस्तेमाल का प्रस्ताव खारिज

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना / हैदराबाद/नई दिल्ली September 10, 2017

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद से राज्यों पर नकदी का दबाव है। ऐसे में कुछ राज्यों ने सुझाव दिया था कि एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) के तहत मिले 37,000 करोड़ रुपये के अग्रिम (डब्ल्यूएमए) इस्तेमाल की अनुमति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से मिलनी चाहिए। बहरहाल जम्मू कश्मीर के वित्त मंत्री हसीब द्राबू व कुछ अन्य की ओर से दिया गया यह प्रस्ताव जीएसटी परिषद ने खारिज कर दिया।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि आईजीएसटी क्रेडिट करदाताओं से संबंधित है और इसका इस्तेमाल सरकारें तब तक नहीं कर सकती हैं, जब तक कि यह उनके पास सीजीएसटी और एसजीएसटी के तहत कर के रूप में नहीं आ जाता।
उन्होंने कहा, 'माना जाता है कि करदाता उसका इस्तेमाल सीजीएसटी और एसजीएसटी के भुगतान के लिए कर सकते हैं। इसे किसी दूसरे उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ऐसा तभी हो  सकता है जब सीजीएसटी या एसजीएसटी के भुगतान के लिए इसका इस्तेमाल हो जाए, जो केंद्र व संबंधित राज्यों से जुड़ा होता है।'
द्राबू ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि उन्होंने यह सुझाव दिया था कि आईजीएसटी क्रेडिट को आरबीआई से अग्रिम सुविधा बढ़ाने की छूट मिलनी चाहिए, जो राज्यों को आनुपातिक आधार पर मिले। उन्होंने कहा कि, 'वित्तीय स्थिति तनावग्रस्त है। इसके पहले इसका संग्रह महीने की पहली तारीख को होता था। अब इसका संग्रह 15 तारीख को होगा। इस तरह से एक चक्र पूरा होने का वक्त लंबा होगा। इसके पीछे मूल रूप से विचार यह है कि हमें अग्रिम सुविधा बढ़ाने की जरूरत है, जिससे बदलाव के दौर में नकदी का प्रबंधन हो सके।' इसके लिए मौजूदा आईजीएसटी क्रेडिट के मामले में छूट दिए जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर पहली बाद आरबीआई से मिलने वाली ओवरड्रॉफ्ट (ओडी) सुविधा को पार कर गया है। द्राबू ने कहा कि हम ओडी पार कर चुके हैं। हम विशेष ओडी के दौर में हैं। ओडी को भूल जाएं, हम अग्रिम सुविधा भी पार कर गए हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादातर राज्योंं ने ओडी पार कर लिया है। द्राबू ने कहा कि उनका राज्य नकदी के संकट की वजह से वेतन भुगतान करने की स्थिति में नहीं है।
बहरहाल जेटली ने कहा कि यह लेन देन संबंधी मसले हैं।
महीने की शुरुआत में धन का बड़ा हिस्सा आईजीएसटी के रूप में आ रहा है। जब सीजीएसटी और एसजीएसटी की देनदारी बढ़ती है तो प्रतिदिन इसमें बदलाव होता है।
जेटली ने कहा कि यह मसला पहले महीने का ज्यादा है, दूसरे व तीसरे महीने में स्थितियां तुलनात्मक रूप से ठीक हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों को एसजीएसटी मिल गया है और आईजीएसटी का कुछ हिस्सा पहले ही राज्यों को जा चुका है। साथ ही राज्यों के पास जून महीने का लंबित वैट भी है, जिसका भुगतान जुलाई में किया गया था। जेटली ने कहा, 'अगर आप इन तीनोंं को जोड़ दें और इसमें उपकर से मुआवजा भी जोड़ दें तो अंतर बहुत कम रह जाएगा।'
सरकार ने करीब 48,000 करोड़ रुपये एकीकृत जीएसटी से वसूले हैं। इसमें से 10,000 करोड़ रुपये का समायोजन केंद्र व राज्यों के बीच कर दिया गया है। इस तरह से करीब 37,000 करोड़ रुपये खाते में लंबित है।
खेतान ऐंड कंपनी के सलाहकार अभिषेक रस्तोगी ने कहा कि नकदी के संकट की उम्मीद जीएसटी लागू होने के शुरुआती महीने में की गई थी। उन्होंने कहा, 'बहरहाल राज्यों को डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि उन्हें राजस्व संग्रह में होने वाले किसी भी नुकसान के  मुआवजे की गारंटी दी गई है। व्यवस्था में कोई भी बदलाव अभी बहुत जल्दबाजी होगी।'
डेलॉयट के एमएस मणि ने कहा कि अग्रिम सुविधा के लिए आईजीएसटी में ढील देने का विचार जीएसटी ढांचे के अनुकूल नहीं है। आईजीएसटी का भुगतान उपभोक्ता द्वारा वस्तुओं के अंतर राज्यीय आपूर्ति पर किया जाता है, इसका इस्तेमाल इनपुट टैक्स क्रेडिट के ररूप में किया जा सकता है, क्योंकि वह अंतिम उपभोक्ता नहीं होता है। डब्ल्यूएमए एक व्यवस्था है, जिसका इस्तेमाल रिजर्व बैंक अस्थायी रूप से नकदी प्रवाह के अंतर को पाटने के लिए  करता है।

Keyword: GST, States, Cash,
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