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चेयरमैन व एमडी हों अलग!, सेबी कर सकता है विचार

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई 09 05, 2017

सेबी उठाएगा कदम

हितों के टकराव को रोकने तथा कंपनी के बेहतर संचालन के दोनों पदों को अलग करने पर विचार
बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा विदेशी प्रवर्तकों को दिए जाने वाले रॉयल्टी भुगतान की भी होगी समीक्षा
उदय कोटक के नेतृत्व में गठित 21 सदस्यीय समिति अगले छह माह में सेबी को सौंप सकती है सिफारिशें
प्रबंध निदेशक को कंपनी के परिचालन की जिम्मेदारी संभालनी चाहिए जबकि चेयरमैन के जिम्मे बोर्ड का प्रबंधन होना चाहिए

सेबी की समिति भारतीय उद्योग जगत में सीएमडी के पद समाप्त करने पर कर रही विचार

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) सूचीबद्ध कंपनियों में चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) की भूमिका को अलग-अलग करने पर विचार कर सकता है। सेबी के इस कदम का मकसद एक ही व्यक्ति के दो पदों पर रहने से संभावित हितों के टकराव को दूर करना है। पूंजी बाजार नियामक भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अपने विदेशी प्रवर्तकों को दिए जाने वाले रॉयल्टी भुगतान की भी समीक्षा करने पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय उद्योग जगत में कारोबारी प्रशासन में सुधार के लिए सेबी द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति इन दो उपायों पर चर्चा कर रही है। कोटक महिंद्रा बैंक के कार्यकारी वाइस-चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक उदय कोटक के नेतृत्व में गठित 21 सदस्यीय समिति अगले छह माह में सेबी को अपनी सिफारिशें सौंप सकती है।

सार्वजनिक उपक्रमों सहित कई कंपनियों में अधिकारी सीएमडी के पद पर हैं। इनमें  रिलायंस इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी, कोल इंडिया, विप्रो, एनटीपीसी, भारत पेट्रोलियम, नेस्ले इंडिया और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी कुछ कंपनियां शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खासकर यूरोपीय देशों में दोनों पद अलग-अलग होते हैं और उनकी जिम्मेदारी अलग-अलग लोगों के हाथों में होती है।

प्रॉक्सी सलाहकार फर्म इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज के प्रबंध निदेशक श्रीराम सुब्रमण्यन ने कहा, 'एमडी को कंपनी के परिचालन की जिम्मेदारी संभालनी चाहिए जबकि चेयरमैन के जिम्मे बोर्ड का प्रबंधन होना चाहिए। दोनों की भूमिका अलग करने से कंपनी को ज्यादा पेशेवर तरीके से चलाना सुनिश्चित होगा और सभी शक्तियां किसी एक व्यक्ति के हाथों में केंद्रित नहीं होंगी।'

बीते समय में कई बार सीएमडी की भूमिका को अलग करने पर विचार किया जा चुका है। 2010 में सेबी की प्राथमिक बाजार सलाहकार समिति ने भी इस प्रस्ताव पर विचार किया था। वर्ष 2014 में सेबी ने कहा था कि सूचीबद्ध कंपनियां अच्छे प्रशासन के लिए स्वैच्छिक तौर पर चेयरमैन और प्रबंध निदेशक पद को अलग करने पर विचार कर सकती हैं। जनवरी 2015 में सरकार ने सार्वजनिक बैंकों में चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के पद को अलग-अलग कर दिया था। पिछले साल भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त मंत्रालय से इस मसले पर विचार करने को कहा था क्योंकि बोर्ड प्रक्रियाओं में सीएमडी का वर्चस्व हो सकता है।

बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा रॉयल्टी का भुगतान 

सेबी की समिति भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अपने प्रवर्तकों को किए जाने वाले रॉयल्टी भुगतान पर निगरानी के पक्ष में है और समिति चाहती है कि रॉयल्टी समझौतों को मंजूरी देते समय कंपनी बोर्ड व्यापक विचार करें। इसके साथ ही रॉयल्टी भुगतान को लेकर शेयरधारकों की भी राय जाननी चाहिए ताकि उनके रिटर्न प्रभावित न हों। इंस्टीट्यूशनल एडवाइजरी सर्विसेज (आईआईएएस) द्वारा संग्रहीत आंंकड़ों के अनुसार 2015-16 में बीएसई 500 में शामिल 32 बहुराष्ट्रीय कंपनियों का समेकित रॉयल्टी भुगतान 7,100 करोड़ रुपये रहा जो 2014-15 में 6,300 करोड़ रुपये था। इनमें से पांच कंपनियां - मारुति सुजूकी इंडिया, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एबीबी, नेस्ले इंडिया और बॉश की पिछले चार वर्षों में कुल रॉयल्टी भुगतान में 70 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी रही।

इन पांच कंपनियों ने 2015-16 में 5,540 करोड़ रुपये का रॉयल्टी का भुगतान किया, जो 32 कंपनियों के कुल 7,100 करोड़ रुपये के रॉयल्टी भुगतान का 78 फीसदी था। इनकी रॉयल्टी का हिस्सा उनके मुनाफे के हिस्से से कहीं ज्यादा था। आईआईएएस के मुताबिक रॉयल्टी वैध भुगतान है लेकिन इसे बिक्री में वृद्धि या उच्च मूल्य निर्धारण के अनुरूप होना चाहिए।समिति द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सेबी इस पर अंतिम निर्णय लेने से पहले प्रतिक्रिया लेने के लिए उसे सार्वजनिक कर सकता है। इसके अलावा समिति संबंधित पक्षों के बीच लेनदेन के संदर्भ में सेफगार्ड और खुलासा नियमों में भी सुधार की सलाह देे सकती है। सूचीबद्ध कंपनियों के लेख और ऑडिटिंग प्रणालियों पर भी विचार किया जा सकता है।

Keyword: सेबी, रॉयल्टी, उदय कोटक, परिचालन, पूंजी बाजार, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी, विप्रो,
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