Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, September 23, 2017 08:16 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम निवेश खबर

सपाट रह सकता है परिधान निर्यात: एईपीसी

विनय उमरजी / अहमदाबाद September 03, 2017

भारतीय परिधान निर्यात इस वर्ष सपाट रहने या फिर इसमें बेहद मामूली बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इसका कारण वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) क्रियान्वयन, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में मजबूती और वैश्विक मांग में मंदी है। उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि कच्चे माल की लागत बढऩे और कपड़ा मूल्य शृंखला में व्यवधान के कारण परिधान निर्यात में वृद्घि एकल अंक की संभावना है। क्लोथिंग मेन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन इंडिया (सीएमआईए) के अध्यक्ष राहुल मेहता ने मुताबिक न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी और रुपये की मजबूती के कारण परिधान निर्यात में बहुत कम बढ़ोतरी हुई है।
 
पिछले साल अगस्त में रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले 66.5 थी जो अब 64.2 पहुंच चुकी है। इससे पहले लगातार 6 वर्षों तक रुपया कमजोर रहा था। भारत ने वित्त वर्ष 2016-17 में 17 अरब डॉलर के परिधान निर्यात किए थे। परिधान निर्यात संवद्र्घन परिषद (एईपीसी) के एक अधिकारी ने बताया कि अप्रैल से जुलाई के दौरान 6.9 अरब डॉलर के परिधान निर्यात किए गए जो पिछले वर्ष की तुलना में महज 5 फीसदी अधिक है। मेहता ने कहा, 'हम परिधान निर्यात में 15 फीसदी बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन अब लगता है कि चीजें मंद गति से बढ़ रही हैं। जीएसटी क्रियान्वयन और रुपये की मजबूती के अलावा कच्चे माल की कीमतों और मजदूरी में बढ़ोतरी ने भी उद्योग को प्रभावित किया है।'
 
इक्रा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि साथ ही दुनिया में परिधान कारोबार के भी पटरी पर लौटने के कोई संकेत नहीं हैं जिसके परिणामस्वरूप दुनिया के कई प्रमुख देशों में मांग कम हो गई है। इससे भारत का परिधान निर्यात कमजोर रह सकता है।  इक्रा के वरिष्ठï उपाध्यक्ष और ग्रुप प्रमुख (कॉरपोरेट सेक्टर रेटिंग्स) जयंत रॉय ने कहा, 'पिछले 18 महीनों के दौरान कई चरणों में थोड़े अंतराल के लिए वृद्घि हुई है लेकिन यह रुझान अस्थायी रहा है और यह विश्वास बहाल करने में नाकाम रहा है। ऐसी स्थिति में भारत के परिधान निर्यात में स्थायी वृद्घि एक चुनौती बनी हुई है। हाल के महीनों में रुपये की मजबूती के कारण यह चुनौती और गहरा गई है। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पद्र्घी क्षमता में वैश्विक निर्यातकों की तुलना में कमी आई है।'
 
रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी और जीएसटी के कारण पैदा हुए अस्थायी व्यवधान के कारण परिधान और फेबरिक उद्योग मुश्किलों का सामना कर रहा है। बुरी तरह बिखरे फेबरिक उद्योग इससे ज्यादा प्रभावित हुआ है। 2017-18 की पहली तिमाही में फेबरिक का उत्पादन एक फीसदी गिरा है। 2015-16 में यह सपाट रहा था जबकि 2016-17 में इसमें 2 फीसदी की गिरावट आई थी। इक्रा की रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे माल की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी के बावजूद 2017-18 की पहली तिमाही में फेबरिक निर्माताओं का राजस्व 4 फीसदी बढ़ा है जो उत्पादन के मुकाबले बिक्री में जबर्दस्त गिरावट का इशारा करता है। रॉय ने कहा कि इसका कारण यह है कि बिचौलियों ने जीएसटी लागू होने से पहले अपनी इनवेंट्री क्लीयर कर दी थी।
 
इक्रा के मुताबिक मजबूत हेजिंग व्यवस्थाओं के कारण निर्यातकों का मुनाफा बरकरार रहा लेकिन रुपये के लगातार मजबूत बने रहने से उनकी मूल्य क्षमता पर दबाव बढ़ सकता है और इस तरह मांग और मुनाफा भी प्रभावित होगा। रिपोर्ट में कहा गया है, 'मुनाफे पर दबाव की संभावना के बावजूद कर्ज के स्तर में कमी आने की उम्मीद है क्योंकि उद्योग का जोर मौजूदा परिसंपत्तियों के अधिक से अधिक इस्तेमाल पर है। साथ ही कर्ज लेकर क्षमता बढ़ाने की गतिविधियां सीमित हैं। इक्रा को उम्मीद है कि भारतीय निर्यातकों और घरेलू परिधान और फेबरिक निर्माताओं का वित्तीय जोखिम निकट भविष्य में स्थिर रहने की संभावना है।'
Keyword: textiles, कपड़ा निर्यातक,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
  आपका मत
 क्या बुलेट ट्रेन के लिए देश भर में बने हीरक चतुर्भुज?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.