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प्रदर्शन को इनाम

संपादकीय /  September 03, 2017

अगले लोकसभा चुनावों में करीब डेढ़ साल का वक्त रह जाने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में बहुप्रतीक्षित फेरबदल कर दिया है। इस फेरबदल में प्रशासनिक अनुभव रखने वाले नए लोगों को तरजीह देकर प्रधानमंत्री ने सरकार की क्षमता बढ़ाने की कोशिश की है। राज्यमंत्री बनाए गए नौ नए मंत्रियों में से चार पूर्व नौकरशाह हैं और अपने-अपने क्षेत्रों में उनका प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। इनमें से तीन मंत्रियों को महत्त्वपूर्ण मंत्रालयों का स्वतंत्र प्रभार दिया जाना दर्शाता है कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी पार्टी के भीतर काबिल लोगों की कमी जैसी समस्या का हल निकालने के इच्छुक हैं। प्रधानमंत्री ने कुछ पुराने मंत्रियों को उनके अच्छे प्रदर्शन का इनाम भी दिया है। यही वजह है कि धर्मेंद्र प्रधान और पीयूष गोयल को कैबिनेट रैंक का मंत्री बनाया गया है जबकि सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यही कारण है कि सुरेश प्रभु को भी संदेह का लाभ देते हुए दूसरे मंत्रालय में भेज दिया गया है। उनके रेल मंत्री रहते हुए रेलवे में गंभीर सुरक्षा खामियां दिखाई दी हैं। लगता है कि प्रधानमंत्री ने वाजपेयी सरकार के मंत्री के तौर पर प्रभु के पुराने प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए उन्हें वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी है। उम्मीद है कि वह व्यापार मुद्दों पर अधिक सकारात्मक रवैया अपनाने में सफल रहेगे और निर्यात का इस्तेमाल अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने वाले इंजन की तरह कर पाएंगे।  

 
इस पुनर्गठन में सबसे अचंभे में डालने वाली बात निर्मला सीतारामन को मिली पदोन्नति रही है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में सामान्य कामकाज रहने के बावजूद उन्हें रक्षा मंत्रालय का महत्त्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है। रक्षा मंत्री होने से वह मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति की भी पदेन सदस्य हो जाएंगी। इस समिति में पहले से ही विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मौजूद हैं। सुरक्षा संबंधी मामलों के शीर्ष नीति-निर्धारक निकाय में दो महिलाओं के शामिल होने का यह पहला अवसर होगा। हालांकि रक्षा मंत्री के तौर पर सीतारामन के समक्ष गंभीर चुनौतियां हैं। संभवत: अगले कुछ महीनों में होने वाले बड़े रक्षा सौदों के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने उनकी निष्ठा को ध्यान में रखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया हो।
 
इन मंत्रियों के चयन की तारीफ में कहने के लिए काफी कुछ है लेकिन कुछ असुविधाजनक सवाल भी हैं। मसलन, यह समझ पाना मुश्किल है कि पहले से रिक्त पड़े मंत्रालयों के साथ अतिरिक्त के तौर पर बर्ताव क्यों किया गया है? कौशल विकास को पेट्रोलियम के साथ जोड़ दिया गया है जबकि जल संसाधन को सड़क परिवहन मंत्री के जिम्मे दे दिया गया है। अजीबोगरीब ढंग से कोयला को रेलवे मंत्रालय के साथ जोड़ा गया है लेकिन खनन मंत्रालय को ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ संबद्ध कर दिया गया है। इसी तरह का बर्ताव पर्यावरण जैसे कुछ अन्य मंत्रालयों के साथ भी हुआ है। लगता है कि प्रधानमंत्री को राजनीतिक मजबूरियों के चलते भी कुछ मंत्रियों को जगह देनी पड़ी है। कर्नाटक से आने वाले अनंत कुमार हेगड़े को मंत्री बनाने के पीछे अगले साल वहां होने वाले चुनाव को वजह बताया जा रहा है। पांच बार के सांसद हेगड़े एक डॉक्टर को थप्पड़ मारने और 2016 में भड़काऊ भाषण देने के चलते चर्चा में रहे हैं।
 
इस फेरबदल से एक बात साफ है कि भले ही प्रदर्शन को इनाम मिलेगा लेकिन केवल प्रदर्शन ही काफी नहीं होगा। इसके अलावा नौ नए मंत्रियों में से छह का लोकसभा से आना भी यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने मंत्रिमंडल में पिछले दरवाजे से प्रवेश को अधिक पसंद नहीं करते हैं। साफ है कि प्रधानमंत्री मोदी की नजरें 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर टिक चुकी हैं। मंत्रिमंडल के नए चेहरों में दो-दो सदस्य उत्तर प्रदेश और बिहार से हैं। लोकसभा में कुल 120 सदस्यों के निर्वाचन की अपनी क्षमता को देखते हुए ये दोनों राज्य काफी अहम हो जाते हैं।
Keyword: narendra modi, development, cabinet,,
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