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आरबीआई की रिपोर्ट : लौट आए 99 फीसदी बंद नोट

अनूप राय / मुंबई 08 30, 2017

आरबीआई ने सालाना रिपोर्ट में दी जानकारी

► नए नोटों की छपाई की लागत वित्त वर्ष 2017 में 7,965 करोड़ रुपये रही, जो वित्त वर्ष 2016 में 3,421 करोड़ रुपये थी
4 नवंबर, 2016 तक चलन में मुद्रा 17.97 लाख करोड़ रुपये
चलन से बाहर किए गए 500 और 1,000 के नोट 15.44 लाख करोड़ रुपये
नोटबंदी के दौरान जमा कराए गए चलन से बंद नोटों का मूल्य 15.28 लाख करोड़ रुपये
वापस नहीं आने वाले 1,000 के नोटों का कुल मूल्य 8,900 करोड़ रुपये

नोटबंदी के बाद चलन से बाहर किए गए 500 और 1,000 रुपये के करीब 99 फीसदी नोट वापस बैंकिंग प्रणाली में आ गए। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी। इस कवायद से सरकार को केंद्रीय बैंक से विशेष लाभांश के तौर पर मोटी रकम मिलने की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। अधिकतर नोटों के बैंकिंग प्रणाली में जमा होने से काला धन और भ्रष्टाचार का हवाला देकर नोटबंदी करने के सरकार के निर्णय पर विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है। वित्त मंंत्री अरुण जेटली ने कहा, 'धन किसका है अब इसकी पहचान करनी है। जिन लोगों को काले धन से निपटने की कम समझ है वही बैंकों में आई नकदी को नोटबंदी से जोड़ रहे हैं। नोटबंदी का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में नकदी पर निर्भरता कम करना, डिजिटलीकरण करना, कर दायरा बढ़ाना और काले धन से निपटना था।

आरबीआई ने अपनी सालाना रिपोर्ट में यह कहा है कि नोटबंदी के दौरान महज 41 करोड़ रुपये के जाली नोट पकड़ में आए। रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी के बाद लोगों ने बंद हुए 15.44 लाख करोड़ रुपये में से 15.28 लाख करोड़ रुपये बैंकिंग प्रणाली में जमा कराए दिए। यह आंकड़ा चलन से बाहर किए गए 500 और 1,000 रुपये के नोटों का करीब 98.96 फीसदी है।

हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसमें कुछ संशोधन हो सकता है। आरबीआई के पास पुराने नोट सीधे तौर पर जमा कराए गए या बैंक शाखाओं और डाकघरों के जरिये आए। कुछ नोट अब भी करेंसी चेस्ट में पड़े हैं। ऐसे में आरबीआई नोटों के केवल अनुमानित मूल्य ही बात सकता है कि और वास्तविक आंकड़े नहीं दे सकता है। हालांकि संशोधित आंकड़ों में अनुमानित आंकड़ों से ज्यादा अंतर नहीं होगा। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2017 तक करीब 8,900 करोड़ रुपये मूल्य के 1,000 नोट वापस नहीं आए। 500 रुपये के नए और पुराने नोटों का अलग-अलग आंकड़ा स्पष्ट नहीं है। 

नोटबंदी की घोषणा कालाधन, भ्रष्टाचार और जाली नोटों पर अंकुश लगाने के मकसद से की गई थी। इस बारे में रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2016-17 के दौरान नए नोटों की छपाई पर आरबीआई को 7,965 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े जबकि इससे पिछले साल नोटों की छपाई पर 3,421 करोड़ रुपये का खर्च आया था। इस कवायद का असर वित्त वर्ष 2016-17 में सरकार को आरबीआई से मिलने वाले लाभांश पर पड़ा है, जो करीब आधा घटकर 30,659 करोड़ रुपये रहा। जून तक करीब 15.3 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में आ गए थे जबकि नोटबंदी के पहले 17.9 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में थे।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इससे लगता है कि सरकार ने काले धन का अनुमान बढ़ा चढ़ाकर किया था। लेकिन कर संग्रह बढऩे और कर दायरा बढऩे से दीर्घावधि में सरकार को फायदा होगा। चिदंबरम ने ट्वीट किया, 'नोटंबदी के बाद सिर्फ एक फीसदी बंद नोट ही बैंकिंग प्रणाली में वापस नहीं लौटे। यह रिजर्व बैंक के लिए शर्म की बात है जिसने नोटबंदी की सिफारिश की थी।'

Keyword: आरबीआई, रिपोर्ट, नए नोट, नोटबंदी, बैंकिंग, रिजर्व बैंक, लाभांश, काला धन, भ्रष्टाचार,
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