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जीआईसी को हिस्सा बेचने के बाद अब रीट्स नहीं लाएगी डीएलएफ!

करण चौधरी / नई दिल्ली 08 28, 2017

बदली रणनीति
कंपनी ने कहा कि जीआईसी जैसी नकदी संपन्न साझेदार मिलने के बाद वह अभी नहीं करेगी पूंजी बाजार का रुख
अब कंपनी सिर्फ वही परियोजना बेचेगी, जो पूरी होने वाली होगी

सिंगापुर की सॉवरिन वेल्थ फंड जीआईसी की सहायक को 8,900 करोड़ रुपये में हिस्सेदारी बेचने का सौदा करने के बाद देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट डेवलपर डीएलएफ लिमिटेड शायद रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट) जल्द पेश नहीं करेगी। डीएलएफ साइबर सिटी डेवलपर्स लिमिटेड (डीसीसीडीएल) की 33.34 फीसदी हिस्सेदारी 8,900 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी डीएलएफ लिमिटेड के निदेशक मंडल से हासिल करने के बाद सोमवार को इन्वेस्टर कॉल में कंपनी ने कहा कि जीआईसी जैसी नकदी संपन्न साझेदार मिलने के बाद वह पूंजी बाजार का रुख अभी नहीं करेगी। डीएलएफ को डीसीसीडीएल की 33.34 फीसदी हिस्सेदारी जीआईसी को बेचने से 8,900 करोड़ रुपये मिले हैं, बाकी 3,000 करोड़ रुपये डीसीसीडीएल की तरफ से प्रवर्तकों केपी सिंह व परिवार की हिस्सेदारी खरीद से मिलेगी और इस तरह के सौदे की कुल रकम 11,900 करोड़ रुपये हो जाएगी।

क्या डीएलएफ अभी रीट्स पेश करेगी, कंपनी के आला प्रबंधन ने कहा कि अब हमारे ऊपर दबाव नहीं है। वरिष्ठ प्रबंधन ने कहा, सौदे का ढांचा मोटे तौर पर प्राइवेट ट्रस्ट जैसा है, ऐसे में हमें पूंजी बाजार जाने की दरकार नहीं होगी। जीआईसी के साथ इस साझेदारी के बाद ऐसा कोई दबाव नहीं होगा। डीएलएफ को कंपनी में 13,000 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है, जिससे कंपनी को आवासीय वर्टिकल के कर्ज में काफी ज्यादा कमी लाने में मदद मिलेगी।

पिछले साल तक डीएलएफ रीट्स पेश करने वाली पहली रियल एस्टेट डेवलपर बनना चाहती थी वह एसपीवी गठित करने की भी उसकी योजना थी। कंपनी ने 25 वैश्विक निवेशकों के साथ नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे। इसकी योजना दो चरणों में दो साल के भीतर 6,000 करोड़ रुपये का रीट्स पेश करने की थी। हालांकि यह योजना अब ठंडे बस्ते में डाल दी गई।

कंपनी की योजना मुंबई और बेंगलूरु में निवेश की है और वह जल्द परियोजना पेश करेगी, जब हिस्सेदारी बिक्री की रकम रियल एस्टेट कंपनी को मिल जाएगी। निकट भविष्य में आवासीय परिसंपत्तियां बेचने के लिए कंपनी ने अलग तरीका अपनाने का भी फैसला लिया है। कंपनी सिर्फ उन्हीं परियोजनाओं को बेचेगी, जो पूरी होने वाली होगी। प्रबंधन ने कहा, हम आवासीय परिसंपत्तियों के मामले में अलग तरीका अपनाएंगे। छूट के बजाय हम इन संपत्तियों को पूरा होने के आसपास ही बेचेंगे। कंपनी ने जून तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ में 58 फीसदी की कमी दर्ज की है और यह 109.01 करोड़ रुपये रह गया है। जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध कर्ज करीब 26,000 करोड़ रुपये था, जिसमें से 5,500 करोड़ रुपये किराया इकाई डीसीसीडीएल का है।
Keyword: real estate, property, DLF,,
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