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निफ्टी-100 की 10 में से 6 कंपनियों के आय अनुमान घटे

हंसिनी कार्तिक /  August 27, 2017

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की पेशकश की वजह से संभावित दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए बाजार ने जून तिमाही की आय के लिए अपने अनुमान को घटा दिया था। फिर भी, निफ्टी-100 की प्रत्येक 10 में से 6 कंपनियां इन घटे हुए अनुमानों को भी पूरा करने में विफल रही हैं। उन कंपनियों की तादाद अच्छी है जिनके आय अनुमानों में कमी दर्ज की गई है। विश्लेषकों का कहना है कि जल्द ही और बुरी खबरें सामने आ सकती हैं। 

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निफ्टी-100 की सिर्फ 40 फीसदी कंपनियां ही बाजार अनुमान के अनुरूप या उससे बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रही हैं। सन फार्मा, इमामी, डॉ. रेड्डïीज लैबोरेटरीज, ग्लेक्सोस्मिथक्लाइन फार्मास्युटिकल्स और हिंडाल्को उन कंपनियों में शामिल हैं जिनकी आय पहली तिमाही में अनुमानों से काफी कम रही है। आंकड़ों पर गहराई से विचार करें तो पता चलता है कि खराब प्रदर्शन मुख्य रूप से फार्मास्युटिकल, बैंकों (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां शामिल), हैवी इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल्स जैसे क्षेत्रों के शेयरों में दर्ज किया गया है। वहीं बेहतर प्रदर्शन के संदर्भ में, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, जेएसडब्ल्यू स्टील, एनएमडीसी, अल्ट्राटेक और सिप्ला ने जून तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया और इनके ईपीएस अनुमानों में 30-60 फीसदी के दायरे में तेजी दर्ज की गई। 
 
कमजोर आय वाली एक और तिमाही को देखते हुए ज्यादातर विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2018 के लिए अपने ईपीएस अनुमानों में फिर से कटौती कर दी है। निफ्टी-100 की 62 कंपनियों ने 30 जून से अपने ईपीएस अनुमानों में कमी दर्ज की है। आय अनुमानों में सबसे बड़ी कटौती सेल के मामले में 59 फीसदी की है जबकि आय में औसत गिरावट इन 62 कंपनियों के लिए 7 प्रतिशत है। इसी तरह आय अनुमानों पर सफल उतरने में फिल रही कंपनियों की सूची में भी कई ऐसे नाम शामिल हैं जिनके आय अनुमान में कमी की गई है। इनमें सेल, सन फार्मा, ल्यूपिन, डॉ. रेड्डïीज, बैंक ऑफ बड़ौदा और टाटा मोटर्स शामिल हैं। वित्त वर्ष 2018 के ईपीएस अनुमानों में कमी के संदर्भ में क्षेत्रीय रुझान भी यह बताने के लिहाज से स्पष्टï हैं कि कौन से सेक्टर ने पहली तिमाही में आय के मोर्चे पर कमजोर प्रदर्शन किया। दूसरी तरफ, सिर्फ 38 कंपनियों (जिनमें से सिर्फ एक टाटा स्टील के आय अनुमान को दो अंक में बढ़ाकर 11.1 फीसदी किया गया) के आय अनुमानों को ही अपग्रेड किया गया और इसके लिए इनकी औसत वृद्घि 2.6 फीसदी पर रही। 
 
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि टॉप 50 निफ्टी कंपनियों का प्रदर्शन ज्यादा कमजोर रहा। रिपोर्ट में कहा गया है, 'जून तिमाही में आय अनुमानों में कमी पिछली पांच तिमाहियों की मजबूती के बाद दर्ज की गई है। निफ्टी-50 फ्री फ्लोट आय में सालाना आधार पर 4.7 फीसदी तक की कमी की गई है जिसमें फार्मास्युटिकल (सालाना आधार पर 53 प्रतिशत कमी), एनर्जी (-13.9 प्रतिशत) और ऑटोमोबाइल्स (-22 प्रतिशत) का अहम योगदान है। आय अनुमानों में कमी के संदर्भ में सबसे ज्यादा योगदान धातु (142 फीसदी तक), खुदरा ऋणदाताओं (23 प्रतिशत) और एफएमसीजी (7.7 प्रतिशत तक की वृद्घि) का रहा।'
 
कमजोर वित्तीय परिणामों के बाद कोटक इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज के वरिष्ठï कार्यकारी निदेशक एवं सह-प्रमुख संजीव प्रसाद ने एक रिपोर्ट में कहा है कि यदि अर्थव्यवस्था नोटबंदी और जीएसटी क्रियान्वयन से पैदा हुई अस्थायी समस्याओं से तुरंत उबरने में सफल नहीं रहती है तो आय अनुमानों में और अधिक कमी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, 'यदि अर्थव्यवस्था जीएसटी से पैदा हुई चुनौतियों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम नहीं रहती है तो हम खपत, नियुक्तियों और औपचारिक अर्थव्यवस्था में निवेश में मंदी गहराने की आशंका से इनकार नहीं कर रहे हैं।'
 
विदेशी शोध फर्मों ने भी भारत की कॉरपोरेट आय पर इसी तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त की है। क्रेडिट सुइस के प्रबंध निदेशक एवं भारतीय इक्विटी के रणनीतिकार नीलकंठ मिश्रा का कहना है कि आय अनुमानों में कटौती की रफ्तार पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों के बाद तेज हो गई। यह कटौती लगभग 4 फीसदी थी, जो वित्त वर्ष 2018 के ईपीएस अनुमानों के लिए पिछली तीन तिमाहियों में दर्ज की गई दो फीसदी से कम की कटौती की तुलना में काफी अधिक है। उनका मानना है कि हेल्थकेयर, सीमेंट और एफएमसीजी कंपनियों के लिए आय अनुमानों में और अधिक कटौती की जा सकती है। दिलचस्प तथ्य यह है कि भारत वित्त वर्ष 2018 में अब तक आय अनुमानों में लगभग 8 फीसदी की कटौती के साथ एक वर्ष के संदर्भ में सर्वाधिक आय कटौती वाले देश के तौर पर सामने आया है, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के लिहाज से सबसे ज्यादा है। इस तथ्य की बाजार शायद अनदेखी कर रहे हैं। 
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