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डीएलएफ: कर्ज-मुक्त दर्र्जे से मिलेगी मदद

राम प्रसाद साहू /  August 27, 2017

डीएलएफ की सहायक इकाई डीएलएफ साइबर सिटी डेवलपर्स (डीसीसीडीएल) के तहत रेंटल ऐसेट व्यवसाय में प्रवर्तकों द्वारा नियंत्रित 40 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना के तीन साल बाद डीएलएफ और उसके प्रवर्तकों ने फिलहाल एक नया सौदा करने की घोषणा की है। सिंगापुर की जीआईसी रियल एस्टेट की सहयोगी रीको डायमंड डीसीसीडीएल में प्रवर्तकों की 33 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी, जबकि शेष हिस्सेदारी अगले एक साल में डीसीसीडीएल द्वारा खरीदी (कुल वैल्यू 11,900 करोड़ रुपये) जाएगी।

 
एक घरेलू ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषक ने कहा है कि यह सौदा डीएलएफ के लिए सकारात्मक है, हालांकि इसका बड़ा असर शेयर कीमतों पर पहले ही दिख चुका है। वर्ष की शुरुआत के बाद से यह शेयर 67 प्रतिशत चढ़ चुका है। सौदा पूरा होने और रियल एस्टेट की मांग में तेजी आने की उम्मीद से इस शेयर में मजबूती आई है। हालांकि सौदे का मूल्यांकन संपत्तियों के लिए 12,000-14,000 करोड़ रुपये (इक्विटी वैल्यू) के बाजार अनुमान की तुलना में कम है। इसलिए विश्लेषकों का कहना है कि इस सौदे के पूरा होने में समय लगेगा (चालू वित्त वर्ष में पूरा होने की उम्मीद) और साथ ही डीएलएफ में प्रवर्तक के संदर्भ में 75 प्रतिशत के मानक (मौजूदा समय में 74.95 फीसदी पर है) का उल्लंघन किए बगैर प्रर्वतकों द्वारा निवेश पर भी बाजार की नजर लगी रहेगी। 
 
सौदे के तहत प्रवर्तकों को डीसीसीडीएल में 40 फीसदी हिस्सेदारी के लिए 11,900 करोड़ रुपये मिलेंगे, जो 35,617 करोड़ रुपये की उद्यम वैल्यू के बराबर है। प्रवर्तकों के लिए मिलने वाली यह रकम डीएलएफ में ही लगाए जाने की उम्मीद है जिससे कंपनी को अपना 25,898 करोड़ रुपये का कुल कर्ज (30 जून, 2017 तक) घटाने में मदद मिलेगी। कंपनी अतिरिक्त इक्विटी के लिए तरजीही पात्र नियोजन (क्यूआईपी) लाने और फिर राइट इश्यू पर विचार कर सकती है, जबकि प्रवर्तक शेयरधारिता तय स्तर से नीचे बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर 
सकती है। 
 
मान लीजिए कि यदि प्रवर्तकों द्वारा कंपी में 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया हो तो मौजूदा कीमतों पर इक्विटी में कमी लगभग 23 फीसदी की होगी। इससे डीएलएफ के रेजीडेंशियल सेगमेंट को कर्ज-मुक्त होने में मदद मिलेगी। 26,000 करोड़ रुपये के कुल कर्ज में से लगभग 14,000 करोड़ रुपये डीसीसीडीएल के लिए है जबकि 12,000 करोड़ रुपये आवासीय परियोजनाओं से संबंधित हैं। रेजीडेंशियल सेगमेंट के विपरीत, डीसीसीडीएल मजबूत नकदी प्रवाह से संपन्न है और उसने वित्त वर्ष 2017 में 3,622 करोड़ रुपये के राजस्व पर की-पूर्व स्तर पर लगभग 1100 करोड़ रुपये हासिल किए। जून तिमाही में, जहां रेजीडेंशियल और रेंटल सेगमेंटों के लिए राजस्व 1,000 करोड़ रुपये पर समान बना रहा, वहीं 660 करोड़ रुपये पर डीसीसीडीएल का परिचालन मुनाफा रेजीडेंशियल सेगमेंट की तुलना में लगभग तीन गुना पर था। ऋण बोझ में और कमी और इक्विटी वृद्घि क्यूआईपी और राइट इश्यू पर 
निर्भर करेगी। 
 
जहां कर्ज में कमी होने से डीएलएफ को लगभग 3,000 करोड़ रुपये के सालाना ब्याज को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी वहीं उसे सुस्त मांग परिदृश्य को देखते हुए इक्विटी घटने से आय को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। इस बीच, रियल एस्टेट रेग्युलेशन ऐक्ट को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने मई से अपनी सभी परियोजनाओं की पूर्व-बिक्री भी रोक दी है जिससे सितंबर तिमाही में भी उसे बिक्री के कमजोर आंकड़ों का सामना करना पड़ेगा। 
 
जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों का मानना है कि बिक्री से पहले संपूर्ण परियोजनाओं की आवासीय रणनीति में बदलाव को देखते हुए व्यवसाय के लिए मुक्त नकदी प्रवाह वित्त वर्ष 2018 के लिए कमजोर बना रहेगा, लेकिन वित्त वर्ष 2019 से इसमें सुधार आएगा, क्योंकि मौजूदा परियोजनाओं का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। विश्लेषकों को उम्मीद है कि चालू वर्ष में व्यवसाय दो अंक की वृद्घि प्रदान करने में सफल रहेगा। दरअसल, डीएलएफ प्रबंधन ने भी यह संकेत दिया है कि कंपनी द्वारा परियोजनाओं को सिर्फ पूरा होने पर ही बेचने की रणनीति की वजह से प्रति तिमाही 750 करोड़ रुपये का परिचालन नकदी प्रवाह घाटा अगली दो-तीन तिमाहियों के दौरान बना रहेगा।
 
कुल मिलाकर, जहां डीसीसीडीएल में प्रवर्तक हिस्सेदारी की बिक्री सकारात्मक है, वहीं निवेशकों को बिक्री के रुझानों को लेकर स्थिति स्पष्टï होने का इंतजार करना चाहिए। निवेशकों को खासकर कंपनी के मुख्य बाजार एनसीआर में बिक्री को ध्यान में रखकर और कंपनी में किसी निवेश से पहले इक्विटी हिस्सेदारी में कमी की मात्रा और कर्ज में कमी के लिए समय-सीमा आदि पर भी ध्यान देना चाहिए। 
Keyword: real estate, property, रियल एस्टेट (नियमन एवं विकास) अधिनियम, DLF,,
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