बिजनेस स्टैंडर्ड - रबर की वस्तुओं के निर्यात में 10 प्रतिशत इजाफे की उम्मीद
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रबर की वस्तुओं के निर्यात में 10 प्रतिशत इजाफे की उम्मीद

दिलीप कुमार झा / मुंबई August 23, 2017

अमेरिका और यूरोपीय संघ की मांग में तीव्र वृद्धि के कारण भारत के रबर की वस्तुओं के निर्यात में मौजूदा वित्त वर्ष में 10 प्रतिशत से ज्यादा तक उछाल की संभावना है। रेलवे, रक्षा, पनडुब्बी, राजमार्गों और ऐसे ही अन्य क्षेत्रों में इस्तेमाल के लिए करीब 35,000 उच्च अभियांत्रिकी वाले रबर उत्पादों के विनिर्माण कारोबार में 6,000 से ज्यादा इकाइयां लगी हुई हैं। इसमें से तकरीबन 100 बड़ी और 3,000 मध्य आकार की इकाइयों ने अमेरिका और यूरोपीय संघ की मांग पूरी करने के लिए अपनी पुरानी इकाइयों के आधुनिकीकरण के लिए निवेश किया है। इन कंपनियों ने 3एम, डूपों, सैबिक जैसी उन वैश्विक विशाल कंपनियों के साथ गठजोड़ किया हुआ है जिन्होंने भारत में अपने अनुसंधान केंद्र स्थापित किए हुए हैं। इस गठजोड़ का उद्देश्य कार्यक्षमता में वृद्धि के लिए सिंथेटिक रबर में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना है। हालांकि शेष छोटे स्तर की करीब आधी इकाइयां निवेश क्षमता के अभाव में अपना वजूद बचाते हुए घरेलू कारखानों पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए छोटे स्तर की इन इकाइयों को अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता रहा है।
ऑल इंडिया रबर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एआईआरआईए) के वरिष्ठï उपाध्यक्ष और देश में रबर की वस्तुओं के सबसे बड़े निर्यातकों और उत्पादकों में शुमार ओरियंटल रबर इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक विक्रम माकर ने कहा कि जहां एक ओर हमारे कच्चे माल - प्राकृतिक और सिंथेटिक रबर की आपूर्ति कुछेक बड़े कॉरपोरेट घरानों द्वारा नियंत्रित होती है, वहीं दूसरी ओर हम उपभोक्ता बाजार में चीन के विनिर्माताओं से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करते हैं। इन बाजारों में अमेरिका और यूरोपीय संघ शामिल है। इसलिए हमें अनुकूल सरकारी नीतियों की जरूरत है। सबसे पहले हमें अपने मसलों को सरकार के सामने ले जाने के लिए रबर निर्यात संवर्धन परिषद जैसी किसी समर्पित संस्था की जरूरत है। फिलहाल व्यक्तिगत कंपनियों द्वारा अपने मसलों को सरकार के सामने ले जाया जाता है जिन पर ध्यान ही नहीं दिया जाता है। दूसरे, कार्यशील पूंजी पर उच्च ब्याज दर, कच्चे माल की उपलब्धता पर दीर्घावधि नीति आदि से संबंधित कारोबारी बाधाओं पर हमारे प्रयासों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत व्यावसायिक सूचना एवं सांख्यिकी महानिदेशालय (डीजीसीआईएस) द्वारा एकत्रित किए गए आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत का रबर की वस्तुओं का निर्यात (नॉन-टायर और प्राकृतिक रबर को छोड़कर) वित्त वर्ष 2016-17 में 2,280 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 2,008 करोड़ रुपये था।
भारत के कुल रबर उत्पादों के निर्यात में अमेरिका और यूरोपीय संघ मिलकर करीब 70 प्रतिशत का योगदान करते हैं। वर्तमान में चीन की बाजार हिस्सेदारी 11 प्रतिशत है, जबकि भारत की 1.48 प्रतिशत। हालांकि भारतीय निर्यातक आने वाले दो सालों में विश्व बाजार में भारत की हिस्सेदारी में पांच प्रतिशत इजाफे की उम्मीद कर रहे हैं।

Keyword: rubber, articles, tyre,
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