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आवक ज्यादा फिर भी प्याज महंगा

रामवीर सिंह गुर्जर / नई दिल्ली August 23, 2017

आवक घटने के साथ ही प्याज या किसी भी जिंस के दाम बढऩे तो स्वाभाविक हैं। लेकिन पिछले साल अगस्त के मुकाबले इस महीने प्याज की आवक में भारी बढ़ोतरी के बावजूद इसके दाम कई गुना बढ़ गए हैं। प्याज के दाम बढऩे के पीछे सटोरियों का खेल चलने की आशंका बताई जा रही है। खरीफ वाले प्याज की फसल कम होने का हवाला देकर दाम बढ़ाए जा रहे हैं। फसल 30 फीसदी कमजोर बताई जा रही है। खपत से अधिक आपूर्ति के बीच दाम बढऩे को सामान्य स्थिति नहीं कहा जा सकता।
मुख्य उत्पादक  राज्य महाराष्टï्र की प्रमुख मंडी लासलगांव व दिल्ली की मंडी में प्याज की आवक व कीमतों के बारे में राष्टï्रीय बागवानी अनुसंधान विकास प्रतिष्ठïान (एनएचआरडीएफ) द्वारा जारी आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि दाम बढऩे की वजह आवक में कमी नहीं है। क्योंकि इस माह लासलगांव मंडी में 23 अगस्त तक करीब 2.75 लाख क्विंटल आवक हुई, जो पिछले अगस्त की आवक करीब 1.50 लाख क्विंटल से 80 फीसदी अधिक है। इसी तरह दिल्ली में इस अगस्त अब तक करीब 2 लाख क्विंटल प्याज आया, जो पिछले अगस्त के 1.55 लाख टन से करीब 30 फीसदी ज्यादा है। कीमतों के तुलनात्मक अध्ययन से पता चलता है कि  लासलगांव में 80 फीसदी ज्यादा आवक के बावजूद पिछले अगस्त माह में 300-950 रुपये बिकने वाला प्याज इस अगस्त 500-2,650 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका। इसी तरह दिल्ली में 30 फीसदी आवक के बावजूद पिछले अगस्त 300-1,250 रुपये बिकने वाला प्याज इस अगस्त 500-2,625 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका। जाहिर है 30 से 80 फीसदी तक अधिक आवक होने के बाद प्याज के दाम 2 से 3 गुना तक बढऩा दर्शाता है कि प्याज के सटोरिये कृत्रिम रूप से दाम बढ़ा रहे हैं।
एनएचआरडीएफ के वरिष्ठï अधिकारी ने बताया कि खरीफ में प्रतिकूल बारिश और पिछले साल कम दाम मिलने से 30 फीसदी प्याज कम लगा है। जिससे खरीफ की नई फसल कम हो सकती है। उत्पादक क्षेत्रों में नया प्याज आने लगा है। हालांकि इस साल इसमें देरी है। अधिकारी ने आगे नई फसल की आपूर्ति होने पर प्याज के दाम गिरने की संभावना जताई। आजादपुर मंडी स्थित आलू-प्याज कारोबारी संघ के महासचिव राजेंद्र कुमार शर्मा कहते हैं कि नई आपूर्ति से बीते कु छ दिनों में 200 रुपये क्विंटल प्याज की कीमतें गिर चुकी हैं। शर्मा मानते हैं कि पर्याप्त आपूर्ति के बावजूद प्याज के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसकी वजह उत्पादक क्षेत्रों के सटोरियों द्वारा दाम बढ़ाना है।

प्याज की स्टॉक सीमा तय करें राज्य : केंद्र
केंद्र सरकार ने प्याज की जमाखोरी को रोकने और इसकी कीमतों में आगे और तेजी रोकने के लिए राज्य सरकारों से प्याज के व्यापारियों पर स्टॉक रखने की सीमा तय करने को कहा है।  सूत्रों ने बताया कि प्याज की स्थानीय आपूर्ति को बढ़ाने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकार न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी )को लागू करने के जरिये इसके निर्यात पर भी अंकुश लगाने के बारे में विचार कर रही है।
 सरकारी आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में प्याज की खुदरा कीमत साल भर पहले के 22 रुपये किलो से बढ़कर अब 38 रुपये किलो हो गई है। मुंबई में इसकी कीमत 34 रुपये किलो, कोलकाता में 40 रुपये किलो और चेन्नई में 29 रुपये किलो है।  खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने ट्वीट किया, 'प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए राज्यों सरकारों को प्याज के व्यापारियों- थोक विक्रेताओं पर स्टॉक रखने की सीमा को लागू करने का परामर्श दिया गया है।'  इस संदर्भ में एक पत्र राज्य सरकारों को भेजा गया है जो आवश्यक जिंस कानून के तहत प्याज व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अधिकृत हैं। पुराने स्टॉक के कम होने तथा इस वर्ष खरीफ बुआई का रकबा 20 से 30 प्रतिशत कम रहने की वजह से उत्पादन कम रहने की चिंताओं के कारण पिछले कुछ सप्ताह से प्याज की कीमतों में तेजी आई है।  हाल में पासवान ने प्याज के निर्यात को रोकने के मकसद से इस पर 450 डॉलर प्रति टन का एमईपी लगाने तथा इसके निर्यात के लिए व्यापारियों को दी जाने वाली सहायताओं को वापस लेने के लिए वाणिज्य मंत्रालय को पत्र लिखा था। इस मुद्दे पर सचिवों की समिति की हाल की बैठक में विचार विमर्श किया गया था जिसने भी न्यूनतम निर्यात मूल्य लगाने का पक्ष लिया।     भाषा

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