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आयात पर पाबंदी से दाल में उबाल

राजेश भयानी / मुंबई 08 22, 2017

थोक बाजार में अरहर, उड़द और मूंग में 5 से 10 प्रतिशत की तेजी

► 5 अगस्त को सरकार अरहर आयात की सीमा पहले की कर चुकी थी तय
सोमवार को मूंग और उड़द का आयात कोटा भी हुआ निर्धारित

अरहर, मूंग और उड़द आदि दालों की आयात सीमा तय होने का घरेलू बाजार में इनकी कीमतों पर तत्काल असर दिख रहा है। सरकार के इस फैसले के बाद इनकी कीमतें ऊपर चढ़ीन शुरू हो गई हैं, जो पहले न्यूतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी नीचे थीं। भारत दुनिया में दलहन का सबसे बड़ा आयातक देश है।

अगस्त से अरहर, उड़द और मूंग की कीमतें नवी मुंबई के थोक बाजार मेंं 5 से 10 प्रतिशत अधिक हो गई हैं। हालांकि कुछ मंडियों में सरकारी आंकड़ों के अनुसार कीमतें अब भी एमएसपी से ऊपर नहीं पहुंच पाई हैं। सोमवार को सरकार ने मूंग और उड़द दाल की आयात सीमा 3 लाख टन तय कर दी थी। इस घोषणा के बाद तूर और मूंग की कीमतें 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल बढ़कर क्रमश: 4,800 रुपये और 5,000 रुपये हो गई हैं। हालांकि अरहर की कीमतें अब भी एमएसपी से थोड़ी कम हैं।

आयात सीमा तय होने के बाद भारत से दलहन की मांग कम होने लगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अरहर की कीमतें अगस्त में 400 डॉलर प्रति टन से कम होकर 300 डॉलर प्रति टन रह गईं। पिछले कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादातर दालों की कीमतें 10-15 प्रतिशत कम हैं। घरेलू बाजार में दलहन की कीमतें थामने के प्रयासों और आयात सीमा तय होने के बाद कीमतों में कमी देखी गई है।

इससे पहले 5 अगस्त को सरकार ने अरहर दाल को प्रतिबंधित जिंसों की सूची में डाल दिया था और चालू वित्त वर्ष के लिए इसकी आयात सीमा मात्र 2 लाख टन तय कर दी थी। इसके बाद सोमवार को उड़द और मूंग दालें भी प्रतिबंधित जिसों की सूची में डाल दी गईं और चालू वित्त वर्ष के लिए इनकी आयात सीमा सालाना 3 लाख टन तय कर दी गई। हालांकि सरकार के किसी द्विपक्षीय/क्षेत्रीय आयात समझौतों पर ये पाबंदी लागू नहीं होंगी।

एक बड़े दाल आयातक ने इस पर कहा, 'इस साल अप्रैल से अरहर का आयात लगभग 2 लाख टन रहा है, जो इसकी तय सीमा के लगभग करीब है। इसी तरह, मूंग, उड़द की तय आयात सीमा में अप्रैल तक आधी मात्रा का आयात हो चुका है। इस लिहाज से अब इनके आयात के सीमित संभावनाएं हैं।' हालांकि मटर, चना और कुछ मात्रा में राजमा का आयात जारी रहने की उम्मीद है। जहां तक चने की बात है तो इसकी कीमत एमएसपी से ऊपर है, इसलिए किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं। 5 अगस्त को अरहर आयात की सीमा तय होने के बाद कारोबारियों ने उड़द और मूंग आयात पर पर भी पाबंदी लगाने की मांग की थी। 5 अगस्त के बाद अरहर की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं और अब हाजिर बार में उड़द और मूंग की कीमतों में भी तेजी आई है।

सरकार ने लगभग 4 साल बाद अरहर के आयात की सीमा तय की थी। इससे पहले 1977 में आयात पर पाबंदी लगाई गई थी।इंडिया पल्सेस ऐंड ग्रेंस एसोसिएशन (आईपीजीए) के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2016 में दलहन आयात  57 लाख टन रहा था जबकि वित्त वर्ष 17 की पहली तीन तिमाहियों में यह आंकड़ा 54 लाख टन था। दलहन कारोबारियों के अनुसार मार्च 2017 तिमाही में 6 लाख टन दाल का आयात होने का अनुमान था।

इस सत्र में किसानों ने दलहन का रकबा 1.07 करोड़ हेक्टेयर से बढ़ाकर 1.14 करोड़ हेक्टेयर कर दिया है। हालांकि अरहर का रकबा फिर भी कम रहा है। पिछले साल दलहन की रिकॉर्ड पैदावार होने के बाद सरकार ने किसानों से एमएसपी पर लगभग 20 लाख टन दलहन खरीदा था। हालांकि आयात जारी रहने से कीमतें एमएसपी से नीचे रहीं।

आईपीजीए के वाइस चेयरमैन विमल कोठारी ने कहा, 'सरकार की नीति में निरंतरता होनी चाहिए। म्यांमार और कुछ अफ्रीकी देश भारत की मांग पूरी करने लिए ही दलहन का उत्पादन करते हैं। अगर ये देश दहलन उत्पादन रोक दें या इसमें कमी कर दें तो संकट के समय भारत इन देशों से पर्याप्त मात्रा में आयात नहीं कर पाएगा।'कोठारी ने कहा कि प्रसंस्कृत दलहन के निर्यात की अनुमति दी जानी चाहिए, जिससे इसके आयात और निर्यात में असंतुलन दूर करने में मदद मिलेगी। हालांकि वाशी एपीएमसी के फ्रैंडशिप ब्रोकिंग में पार्टनर देवेंद्र वोरा ने कहा कि आयात पर पाबंदी तय कर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) नियमों का अनुपालन करने में आसानी होगी, साथ ही भारत को दलहन उत्पादन में आत्म निर्भर होने में मदद मिलेगी।

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