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अन्नाद्रमुक के दोनों धड़ों का विलय

टी ई नरसिम्हन /  08 21, 2017

छह महीनों तक चले सियासी नाटक के बाद तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी अन्नाद्रमुक के दोनों विरोधी धड़ों का विलय हो गया है। एकजुट होने के साथ ही पार्टी की सजायाफ्ता महासचिव वी के शशिकला को पद से हटाने पर भी सहमति जताई गई है।
अन्नाद्रमुक का गत फरवरी में विभाजन हो गया था। पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता का लंबी बीमारी के बाद पिछले साल दिसंबर में निधन होने के बाद से ही अन्नाद्रमुक पर वर्चस्व की जंग शुरू हो गई थी। उस दौरान अन्नाद्रमुक का एक तरह से तीन हिस्सों में विभाजन हो गया था। एक धड़े का नेतृत्व जयललिता के भरोसेमंद सहयोगी और तीन बार मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम कर रहे थे तो दूसरे धड़े की अगुआई जयललिता की पुरानी मित्र शशिकला कर रही थीं। बाद में शशिकला का गुट भी दो हिस्सों में बिखर गया था। मौजूदा मुख्यमंत्री ई के पलनिस्वामी और शशिकला के भतीजे टी टी वी दिनाकरन इन गुटों के नेता थे।
सोमवार को पनीरसेल्वम और पलनिस्वामी की अगुआई वाले गुटों ने आपस में विलय की घोषणा कर दी। अन्नाद्रमुक के चेन्नई स्थित मुख्यालय में दोनों नेताओं ने हाथ मिलाते हुए विलय का ऐलान किया। इस घोषणा के ऐन पहले तक विलय के स्वरूप को लेकर दोनों गुटों के बीच कई दौर की बैठकें चलती रहीं।
दिनाकरन की अगुआई वाले धड़े ने विलय की पूरी कवायद से अपनी दूरी बनाए रखी। दिनाकरन गुट के सदस्य अलग से बैठक कर रहे थे। उनकी चर्चा का विषय यह था कि मौजूदा स्थिति में किस तरह के कानूनी कदम उठाए जाएं? विधानसभा में इस गुट के भी 18 विधायक हैं।
विलय की घोषणा के तत्काल बाद पार्टी के नवनियुक्त उप संयोजक एम पी वैदलिंगम ने यह ऐलान किया कि शशिकला को महासचिव पद से हटाने के लिए बहुत जल्द एक बैठक बुलाई जाएगी। शशिकला आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद जेल में बंद हैं।
दरअसल शशिकला को महासचिव पद से हटाए जाने की मांग को लेकर पनीरसेल्वम गुट अड़ा हुआ था। इसे विलय की एक शर्त भी बना दिया गया था। दरअसल पनीरसेल्वम फरवरी की शुरुआत में मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए शशिकला को ही जिम्मेदार मानते रहे हैं। गत 5 फरवरी को पनीरसेल्वम ने इस्तीफा देने के बाद कहा था कि शशिकला गुट के दबाव में आकर उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
शशिकला की बर्खास्तगी के अलावा पनीरसेल्वम गुट ने विलय के लिए जयललिता की मौत की जांच करवाने की भी शर्त रखी थी। पलनिस्वामी की अगुआई वाली राज्य सरकार ने पिछले हफ्ते ही जयललिता की मौत की जांच का आदेश देकर इस मांग को पूरा कर दिया था। राज्य सरकार ने एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में जांच समिति का गठन करने की बात कही है।
विलय का ऐलान होते ही तमाम प्रमुख नेता पार्टी संस्थापक एम जी रामचंद्रन और जयललिता के स्मारकों पर श्रद्धासुमन चढ़ाने के लिए पहुंचे। चेन्नई के समुद्र तट मरीना बीच पर स्थित इन स्मारकों पर श्रद्धांजलि देने के बाद नेताओं ने राजभवन का रुख किया जहां नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई।
पनीरसेल्वम को उप मुख्यमंत्री के साथ ही राज्य का नया वित्त मंत्री बनाया गया है। उनके गुट के कुछ सदस्यों को भी मंत्री बनाया गया है। माफोई पांड्यराजन को तमिल भाषा एवं संस्कृति मंत्रालय दिया गया है जबकि उदुमलय के राधाकृष्णन को पशुधन विकास मंत्री और पी बालकृष्ण रेड्डïी को खेल एवं युवा मामलों का मंत्री बनाया गया है।
इसके साथ ही पनीरसेल्वम एकजुट अन्नाद्रमुक के संयोजक भी बनाए गए हैं वहीं मुख्यमंत्री पलनिस्वामी इसके सह-संयोजक होंगे। इसके अलावा पार्टी की शीर्ष नीति-नियामक संस्था के तौर पर 11 सदस्यीय शासकीय निकाय भी बनाया गया है।
इन दोनों गुटों में विलय की प्रक्रिया भले ही संपन्न हो गई है लेकिन राजनीतिक विश्लेषक दिनाकरन गुट के अगले कदम को लेकर उत्सुक दिख रहे हैं। दिनाकरन विधानसभा में करीब 20 सदस्यों के समर्थन का दावा कर रहे हैं। गत फरवरी में जब पलनिस्वामी सरकार ने विश्वास मत पेश किया था तो उस समय अन्नाद्रमुक के 122 सदस्यों का समर्थन मिला था जबकि 11 विधायकों ने विरोध में मत दिए थे।
गौरतलब है कि राज्य विधानसभा की 234 सीटों में से अन्नाद्रमुक के कुल 134 विधायक थे। इस लिहाज से देखें तो दिनाकरन गुट के पास अगर वास्तव में 20 विधायक हैं तो वह सरकार के सामने मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
वहीं मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के नेता एम के स्टालिन ने अन्नाद्रमुक के विरोधी धड़ों के विलय की समूची कवायद को केंद्र के इशारे पर उठाया गया कदम बताया है। स्टालिन ने कहा, 'विलय की पूरी पटकथा और संवाद केंद्र से लिखे गए हैं।' वह पहले भी यह कहते रहे हैं कि केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की इच्छा के मुताबिक दोनों गुट विलय के लिए तैयार हुए हैं।

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