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पंजीकरण की बढ़ी समय-सीमा से कंपोजिशन स्कीम में 10 लाख

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 08 20, 2017

योजना के लिए बढ़ा आकर्षण

16 अगस्त तक 9,38,165 फर्मों ने कराया पंजीकरण
21 जुलाई तक की आखिरी समय सीमा तक महज 1 लाख फर्मों ने कराया था पंजीकरण
कुल 11 फीसदी जीएसटी करदाताओं ने चुना यह विकल्प
जिन करदाताओं का सालाना कारोबार 75 लाख रुपये तक वे कर सकते हैं आवेदन

करीब 10 लाख करदाताओं ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत छोटे कारोबारों के लाभ के लिए सरकार की कंपोजिशन योजना का विकल्प चुना है जिसका पालन करना आसान है और इसकी कर की दर भी समान है। शुरुआत में इस कंपोजिशन स्कीम में लोगों ने कम दिलचस्पी दिखाई लेकिन अब इसकी रफ्तार में तेजी आ रही है। इस योजना के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 16 अगस्त तक 9,38,165 फर्मों ने पंजीकरण कराया है जबकि पहले की अंतिम तिथि 21 जुलाई तक महज एक लाख फर्मों ने पंजीकरण कराया था।

दूसरे शब्दों में यह कह सकते हैं कि कुल 11 फीसदी जीएसटी करदाताओं ने कंपोजिशन स्कीम का विकल्प चुना है। जिन करदाताओं का सालाना कारोबार 75 लाख रुपये तक है वे इस योजनाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस योजना के कारोबारी को एक फीसदी कर का भुगतान करने, विनिर्माणकर्ता को 2 फीसदी और रेस्तरां कारोबार वालों को 5 फीसदी कर भुगतान की अनुमति है।

एक सरकारी अधिकारी का कहना है, 'जब हमने योजना के लिए आवेदन करने की समय सीमा बढ़ाई तब इसको लेकर प्रतिक्रिया में तेजी आई क्योंकि कारोबारों को बेहतर योजना बनाने और फैसला करने के लिए समय दिया गया था। वैसे कारोबार जो इस कंपोजिशन स्कीम के तहत पंजीकरण कराने में असफल रहे हैं उन्हें अगले साल ही मौका मिल पाएगा। हालांकि इतनी जल्दी आंकड़ों की तुलना करना मुश्किल होगा क्योंकि इस पैमाने वाली योजना और एकरूपता पहले की कर व्यवस्था में उपलब्ध नहीं थी।'

मूल्य वर्धित कर व्यवस्था के तहत कंपोजिशन स्कीम हरेक राज्य में भिन्न है और यह ज्यादातर कार्य अनुबंधों के लिए उपलब्ध है। जीएसटी परिषद द्वारा जून में कंपोजिशन स्कीम की पात्रता शर्तें 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 75 लाख रुपये सालाना कारोबार कर दी गईं। कंपोजिशन स्कीम के तहत पंजीकृत डीलर को सामान्य करदाता के मामले में विस्तृत रिकॉर्ड बनाए रखने की जरूरत नहीं है। विशेषज्ञों का तर्क है कि अगर शर्तें सख्त न होती तो योजना को अच्छी प्रतिक्रिया मिलती।

वस्तुओं का कारोबार करने वाले कंपोजिशन स्कीम का विकल्प चुन सकते हैं लेकिन सेवा प्रदाताओं में रेस्तरां क्षेत्र को छोड़कर बाकी को बाहर ही रखा गया है। इसके अलावा कंपोजिशन डीलर को इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा लेने की अनुमति नहीं है। ऐसे डीलर एक टैक्स इनवॉयस भी जारी नहीं कर सकते हैं। अगर कोई कंपोजिशन डीलर से खरीदारी कर रहा है तो वह इन वस्तुओं पर इनपुट टैक्स का दावा नहीं कर सकेगा, इससे योजना कम लोकप्रिय रही। इसके अलावा रिवर्स चार्ज प्रणाली को इस योजना में कवर नहीं किया जाएगा। ये कर एक सामान्य करदाता के रूप में भुगतान करने के लिए जवाबदेह होगा।

वित्त मंत्री अरुण जेटली और राजस्व सचिव हसमुख अढिया दावा करते रहे हैं कि कंपोजिशन योजना का फायदा छोटे कारोबारों को होगा लेकिन ये फर्म इस विकल्प को चुनने के लिए आश्वस्त नहीं दिखती हैं। कंपोजिशन डीलर को केवल एक ही रिटर्न दाखिल करने की जरूरत होती है मसलन, जीएसटीआर-4 तिमाही आधार पर और सालाना रिटर्न के लिए फॉर्म जीएसटीआर-9ए की जरूरत होती है। पहले सामान्य करदाताओं को मासिक आधार पर तीन फॉर्म दाखिल करने की जरूरत है। पीडब्ल्यूसी इंडिया के प्रतीक जैन का कहना है कि योजना पर प्रतिक्रिया की तुलना और मूल्यांकन मुश्किल है। हालांकि उनका कहना है कि अगर इसका विस्तार छोटे सेवा प्रदाताओं तक किया जाता तो बेहतर होता।

उन्होंने कहा, 'खुदरा विक्रेताओं के अलावा ज्यादातर रेस्तरां ने इस योजना के विकल्प को अपनाया है क्योंकि इनके पास इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने के लिए ज्यादा कुछ नहीं था।' कंपोजिशन स्कीम वस्तुओं की अंतरराज्यीय आपूर्ति पर उपलब्ध नहीं है। डेलॉयट के एम एस मणि का कहा है कि जो व्यक्ति दूसरे राज्य में आपूर्ति कर रहा है उसे अपने राज्य में एक सामान्य करदाता के साथ आपूर्ति करार करने के लिए वक्त चाहिए जो दूसरे राज्य में आपूर्ति कर सके।

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