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'चिंताजनक नहीं है स्थिति आगे बेहतर होगा मॉनसून'

संजीव मुखर्जी /  August 20, 2017

इस सीजन के शुरुआती दो महीनों में अच्छा रहने के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में अगस्त की शुरुआत से कुछ ठहराव आ गया है। इससे देश के कुछ भागों में कृषि बिगडऩे के डर से चिंता पैदा हो गई है। भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक केजे रमेश ने संजीव मुखर्जी के साथ बातचीत में कहा कि धरातल पर स्थिति बहुत चिंताजनक नहीं है। विदर्भ, मराठवाड़ा, कर्नाटक और तेलंगाना में जहां मॉनसून अब तक कमजोर रहा है, आने वाले 10-12 दिनों में वह यहां फिर से बरसने के लिए तैयार है। प्रस्तुत हैं बातचीत के संपादित अंश ...

अगस्त में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून असामान्य रूप से कमजोर रहा है। क्या हालात काफी चिंताजनक हैं?
अगर आप पूरे भारत की तस्वीर देखें तो संपूर्ण संचयी मॉनसून में 5 प्रतिशत की कमी (19 अगस्त तक) रही है। हालांकि संकट वाले कुछ भाग हैं, लेकिन अच्छी खबर यह है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब सक्रिय चरण में प्रवेश कर चुका है और अगले 10-12 दिनों में हालात में बड़ा सुधार होगा। खासतौर पर उन हिस्सों में जहां बारिश कम हुई है।

अगस्त में परिवर्तन कैसे हुआ क्योंकि आपकी भविष्यवाणी में कहा गया था कि दीर्घ अवधि औसत की 99 प्रतिशत बारिश होगी?
30 जुलाई के बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून दो कमजोर चरणों का प्रत्यक्षदर्शी रहा। परंपरागत दृष्टिï से मैं इसे रुकावट नहीं कहूंगा क्योंकि इस बीच रुक-रुक कर बारिश हो रही थी। रुकावट का कारण तो यह था कि मॉनसून हिमालय की तलहटी की ओर बढऩे लगा। अगर आप निष्पक्ष तरीके से आकलन करें तो हफ्ते-दर-हफ्ते खरीफ की बुआई के आंकड़ों को देखकर इस रुकावट के असर को देख सकते हैं। ये आंकड़े साफ तौर पर दर्शाते हैं कि कुछ भागों में मॉनसून के कमजोर रहने वाली अवधि के दौरान भी प्रगति होती रही है। यहां मेरा केवल यही कहना है कि अगर बारिश इतनी ही अपर्याप्त है तो खरीफ की बुआई हफ्ते-दर-हफ्ते क्यों बढ़ रही है? 18 अगस्त के आंकड़े दर्शाते हैं कि इस साल खरीफ का कुल रकबा पिछले साल की तुलना में कुछ ही कम है।

महाराष्टï्र के बीड जिले में किसानों ने गलत भविष्यवाणी करने के लिए भारतीय मौसम विभाग के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इस पर आपको क्या कहना है?
क्षेत्र में हम समय-समय पर किस प्रकार की फसल के लिए परामर्श जारी कर रहे हैं या जून के बाद से जहां कहीं हमने किसानों को सलाह दी है, यह देखने के लिए कोई भी भारतीय मौसम विभाग, पुणे की वेबसाइट पर जा सकता है। अपने परामर्श में हमने साफतौर पर कहा है कि जब तक खेत में 75 मिलीमीटर बारिश न हो जाए, तब तक बुआई की शुरुआत न करें। इसके बावजूद किसान क्यों आगे बढ़े और बुआई शुरू कर दी? इसके अलावा, इसके बाद अच्छी बारिश हुई जो कुछ दिनों बाद रुक गई। इस सबको हमारी पुणे शाखा द्वारा भेजी गई साप्ताहिक कृषि सलाह में दिया गया है। इसके अलावा, जिन किसानों ने भारतीय मौसम विभाग के खिलाफ शिकायत की है,
उनमें से ज्यादातर किसानों ने वर्षाजल पर निर्भर रहने वाली कपास की खेती की है जो अपने आप में जोखिमभरी फसल है।

लेकिन मुख्य शिकायत यह है कि भारतीय मौसम विभाग ने सामान्य मॉनसून की भविष्यवाणी की है, जबकि उनके भाग में पर्याप्त बारिश नहीं हुई?
हमने पूरे देश के लिए सामान्य मॉनसून की भविष्यवाणी की है, किसी खास क्षेत्र के लिए नहीं क्योंकि हमारे पास जिलेवार मौसमी भविष्यवाणी करने की क्षमता नहीं है।

इस आरोप पर आप क्या कहेंगे कि किसानों को गुमराह करने के लिए भारतीय मौसम विभाग की बीज और खाद कंपनियों के साथ सांठगांठ रहती है?
हम यह कैसे कर सकते हैं? क्या हमारा कोई व्यावसायिक उत्पाद है जिसे हम बेचने के लिए गलत या गुमराह करने वाली भविष्यवाणी करेंगे? हमारी तो एक सीजनल कृषि मौसम संबंधी सेवा है जो विश्व की सबसे बेहतर सेवाओं में से एक है तथा हम इसमें आगे और सुधार करने का प्रयास कर रहे हैं।

Keyword: monsoon, Rain, Agriculture,
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