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बैंकों ने की ब्याज दरों में कटौती, क्या हो निवेश की युक्ति?

संजय कुमार सिंह /  August 20, 2017

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल में रीपो दर घटाकर 6 प्रतिशत कर दी है। पिछले कुछ समय से बैंकों की सावधि जमा (एफडी) की दरें घटती जा रही हैं। अब रीपो दरों में ताजा कटौती के बाद बैंक भी एफडी पर ब्याज दरें और घटा सकते हैं। बीती 31 जुलाई को देश के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने बचत खाते पर ब्याज 4 प्रतिशत से घटाकर 3.5 प्रतिशत कर दिया था। उसकी देखादेखी कुछ और बड़े बैंकों ने भी बचत खाते की दर में कमी कर दी है। इनमें एचडीएफसी और आईासीआईसीआई बैंक जैसे निजी क्षेत्र के दिग्गज बैंक शामिल हैं। ब्याज दरों में गिरावट के ऐसे माहौल के बीच निश्चित आय वाले परंपरागत निवेशकों और सेवानिवृत्त लोगों को अपने पोर्टफोलियो के प्रतिफल में गिरावट रोकने के लिए अपनी निवेश रणनीतियों में बदलाव करने की जरूरत होगी।
सवाल यह है कि क्या ब्याज दरें और नीचे जाएंगी? जानकारों का नहीं लगता कि ब्याज दरें एक ही दिशा में जा रही हैं और आगे भी इनमें गिरावट आएगी। आरबीआई ने फरवरी में अपना रुख तटस्थ कर लिया था। इसका मतलब था कि दरें किसी भी दिशा में जा सकती हैं यानी घट भी सकती हैं और बढ़ भी। महंगाई और पूंजी प्रवाह की स्थिति देखकर उसने दरों में कटौती के जरिए अर्थव्यवस्था को थोड़ी रफ्तार देने का फैसला किया। हालांकि केंद्रीय बैंक लंबी अवधि में महंगाई की संभावना को लेकर चिंतित है और उसने इसे 4 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य तय किया है। राज्यों में वेतन बढ़ोतरी और किसानों को कर्ज माफी और इस साल के कम आधार के मद्देनजर भविष्य में महंगाई दर का 4 प्रतिशत का लक्ष्य चुनौती भरा हो सकती है। एचडीएफसी बैंक में मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ कहते हैं, 'आरबीआई ने रीपो दर में कमी के लिए आंकड़ों का इस्तेमाल किया है। लेकिन इस वित्त वर्ष में एक और कटौती मुश्किल लग रही है। कटौती तभी हो सकती है जब महंगाई एकदम निचले स्तर पर रहेगी, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। मुझे लगता है कि कुछ समय के लिए वह दरें बरकरार रखेगा।'एसबीआई ने बचत खाते की दर में इसलिए कमी की है क्योंकि उसके पास नकदी बहुत अधिक है, लेकिन ऋण आवंटन कमजोर बना हुआ है। हालांकि यह स्थिति भी स्थायी नहीं है। अगर कर्ज की मांग बढ़ती है तो बैंक अपनी जमा दरों में फिर इजाफा कर सकता है। लब्बोलुआब यह कि निवेशकों को घटनाओं  पर नजर रखनी चाहिए और गिरती ब्याज दरों की चर्चा से निराश नहीं होना चाहिए।

परंपरागत निवेशकों के लिए विकल्प 
अगर आप बैंकों की सावधि जमाओं में ही निवेश करते रहे हैं और आयकर के निचले दायरे में हैं तो फिर आपको सबसे अच्छी दरें तलाश करनी चाहिए। कुछ बैंकों को अभी भी जमाओं की दरकार है। इसलिए वे अच्छी दरों की पेशकश कर रहे हैं। ये बैंक एक साल से पांच साल तक की सावधि जमाओं पर 7 से 7.5 प्रतिशत ब्याज की पेशकश कर रहे हैं। इन बैंकों में आईडीएफसी, आरबीएल, सिटी यूनियन, यस, इंडसइंड, डीसीबी, करूर वैश्य और देना बैंंक शामिल हैं। वरिष्ठï नागरिकों के लिए ये दरें 7.50 से 8.0 प्रतिशत तक हो सकती हैं। हालांकि आपको तभी इन दरों को फायदा मिल पाएगा जब इन बैंकों की शाखा आपके आसपास होगी।
सेवानिवृत्ति के लिए बचत कर रहे मध्य वय के लोगों को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) पर अपना भरोसा बरकरार रखना चाहिए। सेबी के पास पंजीकृत निवेश सलाहकार पर्सनलफाइनैंसप्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव कहते हैं, 'ईपीएफ पर 8.65 प्रतिशत जबकि पीपीएफ पर 7.8 प्रतिशत प्रतिफल मिल रहा है। ये दोनों उन लोगों के लिए सबसे अच्छे विकल्प हैं जो पारंपरिक निवेशक हैं।' इनसे प्राप्त होने वाले प्रतिफल पर निकासी के समय कर नहीं लगता है।
ऊंचे कर दायरे में आने वाले निवेशक कर मुक्त बॉन्डों पर विचार कर सकते हैं। अगर कोई नया निर्गम नहीं आता तो उनको द्वितीयक बाजार से बॉन्ड खरीदना चाहिए, जो 5.9 से 6.0 प्रतिशत प्राप्तियों (कर मुक्त, अर्थात कर पूर्व प्राप्ति करीब 8.5 प्रतिशत) के साथ कारोबार कर रहे हैं। ये बॉन्ड खरीद कर आप लंबे समय के लिए आय आर्जित कर सकते हैं। भारत सरकार के 8 प्रतिशत ब्याज वाले बॉन्ड भी एक विकल्प हो सकते हैं।
कुछ जोखिम लेने वाले निवेशक अपनी रकम डेट फंडों में लगाने पर विचार कर सकते हैं। जिस फंड में आप निवेश कर रहे हैं, उसमें अपने निवेश अवधि जरूर देख लें। जो तीन महीने के लिए निवेश करना चाहते हैं, वे लिक्विड फंडों में निवेश कर सकते हैं। तीन महीने से एक साल तक के लिए निवेश के इच्छुक लोग अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंडों में निवेश कर सकते हैं। एक साल से तीन साल तक के लिए रकम लगाने को तैयार निवेशक शॉर्ट-टर्म डेट फंडों पर दांव लगा सकते हैं। अगर तीन साल से अधिक के लिए निवेश की योजना है तो डायनामिक बॉन्ड फंड पर विचार करें। डेट फंडों में निवेश अगर तीन साल से अधिक अवधि के लिए किया जाता है तो उनमें इंडेक्सेशन बेनिफिट का लाभ मिलता है, जिससे कर देनदारी खासी कम हो जाती है। टाटा ऐसेट मैनेजमेंट में हेड (फिक्स्ड इनकम) मूर्ति नागराजन कहते हैं, 'डेट फंडों में पहली बार निवेश कर रहे निवेशकों को उन्हीं फंडों में निवेश करना चाहिए, जो ट्रिपल-ए प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं, ताकि भुगतान में चूक या रेटिंग घटने का जोखिम कम रहे।' किसी भी सूरत में एए-ऋणात्मक प्रतिभूतियों में निवेश से बचना चाहिए। मुंबई स्थित प्रमाणित वित्तीय योजनकार अर्णव पंड््या कहते हैं, 'उन फंड में भी निवेश करने से बचना चाहिए जिनके पोर्टफोलियो में कुछ खास ही प्रतिभूतियां ज्यादा हों।'
जिन लोगों के सेवानिवृत्त होने में 10 साल से अधिक का समय बचा है, उनको इक्विटी म्युचुअल फंडों के बारे में जानकारी हासिल कर धीरे-धीरे इनमें निवेश करना चाहिए। बेहतर फंडों के चयन और उपयुक्त पोर्टफोलियो बनाने के लिए किसी योग्य वित्तीय योजनाकार की सेवा ली जा सकती है। बैलेंस्ड और इक्विटी फंडों में कम से कम पांच साल के लिए निवेश करें। शुरू में उन फंडों में निवेश करें जिनका इक्विटी में कम निवेश हो। कोटक म्युचुअल फंड के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह कहते हैं, 'नए निवेशकों को आदर्श रूप में मंथली इनकम प्लान, इक्विटी सेविंग योजना, बैलेंस एडवांटेज फंड के साथ शुरुआत करनी चाहिए और बाद में बैलेंस्ड फंड में निवेश करना चाहिए।'
वरिष्ठï नागरिकों के लिए
अगर आप वरिष्ठï नागरिक हैं तो सेवानिवृत्ति के दौरान आपके लिए जरूरी है कि आपका कोष आपके लिए नियमित आय अर्जित करे। वरिष्ठï नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) एक अच्छा विकल्प है, जहां 8.3 प्रतिशत का आकर्षक प्रतिफल मिलता है। आप इसमें 5 साल के लिए अधिकतम 15 लाख रुपये (पत्नी के साथ 30 लाख रुपये) तक निवेश कर सकते हैं। इस निवेश पर धारा 80सी के तहत लाभ भी मिलता है। हाल में शुरू हुई प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) भी एक और अच्छा विकल्प है। यह दस साल के लिए हरेक महीने 8 प्रतिशत (सालाना प्रभावी दर 8.30 प्रतिशत) प्रतिफल की गारंटी देता है। हालांकि इसमें निवेश की अधिकतम सीमा 7.5 लाख रुपये तय की गई है। फिर भी, इस योजना में निवेश किया जा सकता है। निश्चित आय की एक और योजना डाकघर मासिक  आय योजना है जिस पर आप विचार कर सकते हैं। लेकिन इसमें ब्याज अब घटकर  7.50 प्रतिशत रह गया है। एक अकेला व्यक्ति इसमें 4.5 लाख रुपये और पत्नी के साथ 9 लाख रुपये तक निवेश कर सकता है। इन तीनों योजनाओं से प्राप्त प्रतिफल आपकी आय में जोड़ा जाता है और इस पर मामूली कर लगता है।

Keyword: banks, interest rates, investment,
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