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सिनर्जी में एसडीएएल का विलय

बीएस संवाददाता / हैदराबाद August 16, 2017

नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के हैदराबाद पीठ ने सिनर्जीज डोरे ऑटोमोटिव लिमिटेड (एसडीएएल) के लिए दिवालिया समाधान योजना को मंजूरी दे दी, जो वैश्विक कार निर्माताओं मसलन फोर्ड को एल्युमीनियम एलॉय व्हील्स की आपूर्ति करती थी। दिवालिया संहिता 2016 के तहत यह पहला ऐसा आदेश है। विशाखापत्तनम स्थित एल्युमीनियम एलॉय व्हील्स निर्माता सिनर्जीज कास्टिंग्स लिमिटेड (एससीएल) एनसीएलटी के आदेश के तहत दिवालिया समाधान योजना के हिसाब से एसडीएएल का विलय करेगी। एससीएल संबंधित पक्षकार है। 23 जनवरी को एनसीएलटी ने एसडीएएल की याचिका स्वीकार की थी, जिसने आईबीसी 2016 की धारा 30 (6) और 31 के तहत दिवालिया समाधान की मांग की थी। नई दिवालिया संहिता के तहत एनसीएलटी के पीठ में इसे पहला आवेदन माना जाता है।
 
1995 में गठित एसडीएएल परिचालन समाप्त होने से पहले एल्युमीनियम एलॉय व्हील्स का विनिर्माण करती थी। याची के ऊपर 972.15 करोड़ रुपये कर्ज था और यह चार लेनदारों को चुकाया जाना था। इसमें से सिनर्जी कास्टिंग्स का बकाया 89.26 करोड़ रुपये था और इसके कार्यालय का पता भी देनदार कंपनी का ही है। तीन अन्य लेनदार हैं अल्केमिस्ट एआरसी लिमिटेड (122.06 करोड़ रुपये), एडलवाइस एआरसी लिमिटेड (86.92 करोड़ रुपये) और मिलेनियम फाइनैंस लिमिटेड (673.91 करोड़ रुपये)। एडलवाइस एआरसी ने एग्जिम बैंक से कर्ज का अधिग्रहण किया था, जिसने पहले कंपनी से कर्ज वसूली के लिए कानूनी कदम उठाया था।
 
मंजूर दिवालिया समाधान योजना कंपनी की दिवालिया समाधान प्रोफेशनल (आईआरपी) ममता बिनानी ने तैयार की है। आईआरपी को तीन इकाइयों एसएमबी ऐशेज इंडस्ट्रीज, सिनर्जीज कास्टिंग्स लिमिटेड और सुइआज इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड से समाधान योजना मिली थी। लेनदारों की समिति ने सिनर्जीज कास्टिंग्स की योजना का चयन कुछ संशोधन के साथ किया। पहले एडलवाइस एआरसी ने एनसीएलटी के पास आपत्ति जताई थी और उसने कहा था कि सिनर्जीज कास्टिंग्स के लिए मंजूर समाधान योजना आईबीसी की कुछ धाराओं का उल्लंघन करती है।
 
एडलवाइस एआरसी ने यह भी आरोप लगाया था कि मिलेनियम फाइनैंस लिमिटेड को लेनदारों की समिति में गलती से शामिल कर लिया गया। इसने सिनर्जीज कास्टिंग्स लिमिटेड की समाधान योजना पर सवाल उठाया था क्योंकि यह देनदार की संबंधित पक्षकार थी। हालांकि पीठ ने इन आपत्तियों को दरकिनार कर दिया। पीठ ने अपने आदेश में कहा है, समाधान योजना में एसडीएएल के दिवालिया समाधान की प्राकल्पना की गई है और एसडीएएल की संपत्तियों व उपकरणों के प्रभावी इस्तेमाल के साथ कारोबार जारी रहना सुनिश्चित किया है। साथ ही देनदार कंपनी के साथ विलय से परिचालन व वित्तीय क्षेत्र में काफी मदद मिलेगी क्योंकि दोनों कंपनियां एल्युमीनियम एलॉय व्हील्स विनिर्माण उद्योग की हैं। समाधान योजना की फंडिंग अन्य लेनदारों से मिलने वाली रकम व परिचालन से मिलने वाली रकम से होगी। लेनदारों को भुगतान और सांविधिक बकाया भुगतान छह साल में होगी और ये बातें एनसीएलटी के आदेश में कही गई है।
Keyword: NCLT, एनसीएलटी, नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल,
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