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दिवालिया बिल्डर और मुश्किल में फंसा घर

तिनेश भसीन /  August 13, 2017

मकान खरीदने वालों की चिंता खत्म होती नहीं दिख रही हैं। अभी तक वे परियोजनाओं के लटके होने और बिल्डरों की वादाखिलाफी से परेशान थे। अब नई मुसीबत उनको फिर से डरा रही है। कई परियोजनाओं के लिए डेवलपरों ने कर्ज लिया मगर चुकाया नहीं। लिहाजा, वे दिवालिया होने के कगार पर हैं। अब ऋणदाता और बैंक कर्ज में दबी परियोजनाओं पर कब्जे की चेतावनी दे रहे हैं। बिल्डर और बैंकों की लड़ाई में बेचारे खरीदार फंस गए हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने हाल में रियल एस्टेट डेवलपर एचडीआईएल की कुर्ला (मुंबई) परियोजना पर 'प्रतीकात्मक कब्जे' का नोटिस जारी किया। वर्ष 2009 में शुरू हुई इस परियोजना में पहले ही 8 साल की देरी हो चुकी है। अब इस नए कदम ने खरीदारों की चिंता और बढ़ा दी है।

 
विलंब के बावजूद 32 वर्षीय सुप्रियो राणा ने 2015 में इस परियोजना में कुछ अग्रिम रकम चुकाकर फ्लैट खरीदा था। जब उन्होंने आवास ऋण के लिए आवेदन किया तो उनके बैंक ने उन्हें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (सीबीआई) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने को कहा क्योंकि बिल्डर ने अपनी परियोजना इसी बैंक के पास गिरवी रखकर रकम ली थी। एचडीआईएल पहले ही अपने ऋण का भुगतान नहीं कर पा रही थी। इसलिए सेंट्रल बैंक ने एनओसी देने से साफ इनकार कर दिया। राणा कहते हैं, 'कई दूसरे खरीदारों को भी इसी तरह की परेशानी से जूझना पड़ रहा है।' जब बिजनेस स्टैंडर्ड ने डिफॉल्ट और खरीदारों की अन्य समस्याओं के बारे में एचडीआईएल से पूछा तो कंपनी ने कहा, 'हमने शेयर बाजारों को अपने स्टेटमेंट मुहैया कराए हैं जिनमें कहा है कि हमने ऋण भुगतान के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को पत्र लिखा है। हमने ऋण भुगतान की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है। हम अपने सभी ग्राहकों के संपर्क में हैं और इधर-उधर की बातों पर प्रतिक्रिया नहीं करते हैं।'
 
एचडीआईएल ऐसी अकेली कंपनी नहीं है। ऑर्बिट की परेल जैसी परियोजना को बंबई उच्च न्यायालय ने 4 जून को कोर्ट कमिश्नर के जरिए अपने हाथ में ले लिया। इसमें टावरों के साथ साथ सभी आवासीय या वाणिज्यिक कार्यालय परिसर (मौजूदा समय में निर्मित या जिनका निर्माण किया जाएगा) शामिल होंगे। यह मामला अलग तरह का है, क्योंकि आम तौर पर संपत्ति की नीलामी और ऋण की वसूली के लिए कोई बैंक अदालत जाता है। ऑर्बिट का मामला इस लिहाज से खास है कि जिन खरीदारों ने लोअर परेल में निर्माणाधीन ऑर्बिट टैरेसेज में निवेश किया, उन्होंने रकम जुटाने और परियोजना को अपने हाथ में लेने के लिए उच्च न्यायालय से संपर्क किया है। 
 
गाजियाबाद में मीडिया मैजेस्टिक टावर्स और कोलकाता में तीन कन्या प्रोजेक्ट के ग्राहकों को भी इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा है। खरे लीगल चैंबर्स के संस्थापक एवं प्रबंधन भागीदार अभिषेक खरे कहते हैं, 'न्यायालय व्यावहारिक दृष्टिïकोण अपना रहे हैं।' उन मामलों में अदालतों ने पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को धन के इस्तेमाल की जांच का निर्देश दिया है जिनमें डेवलपरों ने कहा है कि उनके पास परियोजना पूरी करने के लिए पैसे नहीं है। वे इन सुझावों पर भी विचार कर रही हैं कि अगर मूल डेवलपर परियोजना पूरी करने में असमर्थता जताता है तो किसी और बिल्डर को काम पूरा करने के काम में शामिल किया जाए। खरे कहते हैं, 'ये बहुत अच्छे समाधान नहीं हैं, लेकिन इन्हें आजमाय जा रहा है।' यदि डेवलपर डिफॉल्ट करता है और बैंक संबद्घ संपत्ति पर कब्जे की प्रक्रिया शुरू करता है तो क्या हो सकता है?
 
बैंक जब्त कर सकता है 
 
सांकेतिक कब्जा किसी संपत्ति का भौतिक कब्जा हासिल करने की दिशा में पहला कदम है। बैंक ऐसी परियोजना पर नोटिस चिपका देते हैं। हालांकि ऐसा नोटिस डेवलपर को परियोजना के निर्माण से नहीं रोकता है। बिल्डर ऋण निपटाने के साथ साथ परियोजना पूरी करने और मकान सौंपने के लिए बैंक से संपर्क कर सकता है। यदि डेवलपर डिफॉल्ट करता है तो परियोजना से जुड़ा ऋणदाता सभी फ्लैटों पर भौतिक कब्जे शुरू कर सकता है। सिर्फ वही खरीदार बचे रहते हैं जिन्होंने स्टांप शुल्क देकर पंजीकरण कराया है और जिन्होंने बैंक से एनओसी लिया हो। इन खरीदारों को ऐसा पत्र प्राप्त करने की जरूरत होती है जिसमें कहा गया हो कि बैंक उनके फ्लैट को गिरवी से मुक्त कर रहा है।  आमतौर पर कोई बिल्डर निर्माण के लिए ऋण लेने के बाद ही निर्माणाधीन फ्लैटों की बिक्री शुरू करता है। यह रियल्टर की जिम्मेदारी है कि वह जब परियोजना में कोई भी फ्लैट बेच रहा हो तो बैंक को सूचित करे और बैंक से उस फ्लैट के लिए शुल्क जारी करने का अनुरोध करे।
 
महाराष्टï्र जैसे कुछ राज्यों में कानून में यह स्पष्टï है कि किसी निर्माणाधीन संपत्ति के लिए डेवलपर की जिम्मेदारी है कि उसके पास स्पष्टï और बिक्री योग्य टाइटल हो। शार्दूल अमरचंद मंगलदास ऐंड कंपनीज में पार्टनर आशु गुप्ता का कहना है, 'यदि परियोजना बैंक के पास गिरवी है और डेवलपर आपको बैंक से एनओसी लिए बगैर फ्लैट के लिए स्टांप शुल्क चुकाने और इसे पंजीकृत कराने की अनुमति दे देता है यह धोखेबाजी है।' यदि खरीदार ने डेवलपर को सिर्फ आंशिक भुगतान किया है, लेकिन स्टांप शुल्क चुका दिया है और पंजीकरण पूरा करा लिया है तो उन्हें अदालत से संपर्क करने की जरूरत होगी। संपत्ति खरीदने से पहले यह खरीदार की जिम्मेदारी है कि वह सभी तरह की छानबीन पूरी करे। यदि परियोजना किसी बैंक के पास गिरवी है तो इसका पंजीकृत कागजात होता है जो सार्वजनिक होता है। अदालत यह नजरिया अपना सकती है कि खरीदार ने स्थिति की पूरी जानकारी होने के बावजूद फ्लैट खरीदा।  कानून महज आवंटन पत्र वाले खरीदारों की तुलना में सुरक्षित ऋणदाताओं को पहली प्राथमिकता देता है। 
 
ऋण वसूली पंचाट जाएं
 
बैंक को अपने फ्लैट पर कब्जा करने से रोकने के लिए खरीदारों को ऋण वसूली पंचाट जाने की जरूरत होगी। उन्हें ऋणदाता को भौतिक कब्जे से रोकने के लिए स्थगनादेश लेना होगा। खरीदारों को ट्रिब्यूनल को यह समझाने की जरूरत होगी कि अगर बैंक ने उनकी संपत्ति का भौतिक कब्जा ले लिया तो उनके अधिकार खतरे में पड़ जाएंगे। अग्रवाल कहते हैं, 'खरीदार अदालत में मुकदमा लडऩे के लिए संगठन भी बना सकते हैं। हालांकि मामला डेवलपर और बैंक के बीच का होता है लेकिन न्यायालय ऐसी अपीलों को स्वीकार करते हैं और परेशान पक्ष की बात सुनते हैं।' कई बार ऐसा भी होता है कि डेवलपर संपत्ति को गिरवी रख कर निर्माण के लिए ऋण लेता है तो साथ में पर्सनल गारंटी भी मुहैया कराता है। खरे कहते हैं, 'खरीदार अदालत से यह अनुरोध भी कर सकते हैं कि वह बकाया वसूली और परियोजना पूरी कराने के लिए रियल्टर की पर्सनल गारंटी का इस्तेमाल करने का निर्देश दे।'
 
भुगतान रोक लें
 
अधिकतर परियोजनाओं में भुगतान अब निर्माण से जुड़ा होता है। डिफॉल्ट की स्थिति में डेवलपर खरीदारों से बकाया चुकाने को कह सकता है जिससे कि वह बैंक के कब्जा करने की कोशिश को रोकने के लिए उनको  जल्द से जल्द फ्लैट सौंप सके। एक बार जब संपत्ति का कब्जा मिल जाता है तो फिर बैंक को हरेक कब्जेदार को बेदखल करने के लिए आदेश लेने की जरूरत होती है।  वकीलों का कहना है कि यह बैंक की कार्रवाई में देर कराने की एक रणनीति होती है और इसका लाभ सिर्फ डेवलपर को ही मिलता है। इसके बाद भी बैंक अदालत से संपर्क कर फ्लैट मालिकों को बेदखल कर सकता है। हाल के समय में खरीदार एकजुट हुए हैं और उन्होंने परियोजना में अपने हिस्से की संपत्ति का ऋण चुकाया और परियोजना पर नियंत्रण हासिल किया। यह हर उस संपत्ति के लिए संभव है जिसका निर्माण लगभग पूरा हो गया हो। जब खरीदार पिछले धोखेबाज डेवलपर के खिलाफ कानूनी मामला लड़ रहे होते हैं तो दूसरा डेवलपर परियोजना का बचा कार्य पूरा करता है। 
Keyword: real estate, property, रियल एस्टेट (नियमन एवं विकास) अधिनियम,,
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