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प्रेम कथा के बहाने समाज को संदेश देती फिल्म 'टॉयलेट...'

वीर अर्जुन सिंह /  August 11, 2017

अक्षय कुमार की नई फिल्म 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' एक अरुचिकर विषय को भी हास्यपूर्ण अंदाज में पेश करने की कोशिश करती है। उपदेश देने वाले संवादों से भरी यह फिल्म स्वच्छता अभियान को प्रोत्साहन देने के लिए मौजूदा सरकार की तारीफ भी करती है। इसके बावजूद प्रतिभावान कलाकारों की खासियत, कुछ तीखे संवादों और सबसे ऊपर हास्य में लिपटे एक सामाजिक संदेश के चलते यह फिल्म सिनेमाघर में जाने वाले दर्शकों को गुदगुदाने की क्षमता रखती है। आज का दौर ही ऐसा है कि औसत दर्जे की हंसी-मजाक वाली फिल्म भी मल्टीप्लेक्स में महंगे बिकने वाले पॉपकॉर्न की ही तरह खूब बिकती है। 

 
उत्तर प्रदेश के दो पड़ोसी गांवों की पृष्ठभूमि में बुनी गई कहानी दो घंटे से अधिक समय तक खिंचती है लेकिन इसमें चौंकाने वाला कोई भी तत्त्व नहीं है। फिल्म का शीर्षक ही इसके विषय को काफी हद तक स्पष्ट कर देता है। एक प्रेमी जोड़ा एक पुरानी प्रथा के चलते मुश्किल में फंस जाता है। एक पुरातनपंथी परिवार में पला-बढ़ा नायक कहीं पर भी हल्का हो लेने में संकोच नहीं करता है लेकिन पढ़ी-लिखी नायिका हरेक सुबह शौच के लिए खेतों में जाने से इनकार कर देती है। हालांकि इस मतभेद के बावजूद इस नए शादीशुदा जोड़े में टकराहट नहीं होती है। अक्षय कुमार प्यार में पड़े एक हंसोड़, ठीक-ठाक पढ़े-लिखे और एक प्रगतिशील सोच वाले युवक केशव की भूमिका में नजर आते हैं। घर में शौचालय बनवाने की मांग से इत्तफाक नहीं रखने पर भी वह बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करता है। दोनों पति-पत्नी जल्द ही एक साथ मिलकर समाज की इस बुराई के खिलाफ लडऩा शुरू करते हैं। उनका समाज अब भी यही मानता है कि खुले मैदान में शौच के लिए जाना उनके धार्मिक ग्रंथों में भी लिखा हुआ है और एक ही घर में खाना और शौच जाना कहीं से भी ठीक नहीं है।
 
फिल्म का पहला हिस्सा प्रगतिशील सोच बयां करने की कोशिश करता है। फिल्म का पूर्वाद्र्ध पुरानी सोच में डूबे एक गांव की गहराई तक जड़ें जमाए बैठी परंपराओं को उजागर करता है। महिलाएं भी धीरे-धीरे इस बात को महसूस करने लगी हैं कि इन पुरानी प्रथाओं के चलते उन्हें काफी असुविधा हो रही है और खुले में शौच के लिए जाना खतरनाक भी है। उन्हें जया (भूमि पेडणेकर) के तौर पर अपनी आवाज बुलंद करने का मौका मिलता है। भूमि की पहली फिल्म 'जोर लगा के हइशा' में भी अधिक वजन वाली महिला को पारिवारिक जीवन में पेश आने वाली मुश्किलों को दिखाया गया था। वह अपनी इस भूमिका में भी पुराने अंदाज को ही कायम रखे हुए नजर आती हैं। जया सही लगने वाली बात को बिना झिझक के बोल देती है और उसे बड़ी जल्द गुस्सा भी आता है। उनके संवाद कई बार थोड़े उपदेश भी लगते हैं।
 
जहां तक अक्षय कुमार के अभिनय का सवाल है तो वह केशव के करीने से कटी मूंछों की ही तरह सटीक है। हालांकि इस बार फिल्म का बोझ उठाने का जिम्मा अकेले अक्षय ने ही नहीं उठाया है। 'प्यार का पंचनामा' फिल्म में अपने हास्य किरदार से सुर्खियों में आए दिव्येंदु शर्मा इस बार भी प्रभावित करते हैं। अक्षय के छोटे भाई के किरदार में दिव्येंदु खासे दिलचस्प लगे हैं। जब वह पर्दे पर नहीं दिखते हैं तो आप उन्हें याद कर रहे होते हैं। केशव के पिता के किरदार में सुधीर पांडे एक सख्त-मिजाज और परंपरावादी पंडित के रूप में काफी वास्तविक लगे हैं। अनुपम खेर और रजत शर्मा की भूमिकाएं छोटी होते हुए भी काफी असरदार हैं।
 
इस फिल्म की पटकथा के केंद्र में तो शिक्षा है जो समाज को पुरातनपंथी ढकोसलों से निजात दिलाने का एकमात्र विकल्प है। इसी तरह इस कहानी के खलनायक के रूप में परंपरा और सभ्यता को दिखाया गया है। फिल्म के लेखक और निर्देशक ने गरीबी और विकास की कमी वाले पहलू को पूरी तरह नजरअंदाज किया है। इसी तरह फिल्म में देश को स्वच्छ बनाने के लिए जताई जा रही राजनीतिक इच्छाशक्ति की काफी तारीफ की गई है। उत्तर प्रदेश के इस गांव के घरों और सार्वजनिक स्थानों पर शौचालयों की कमी का ठीकरा लोगों के पिछड़ेपन पर ही फोड़ा गया है।
 
फिल्म अपने चरम पर काफी नाटकीय हो जाती है। मुख्यमंत्री का किरदार समाज की भलाई के लिए बड़े नोटों को चलन से बाहर करने के प्रधानमंत्री के फैसले की जमकर तारीफ करता है। यह फिल्म दिलचस्प घटनाओं के जरिये आगे बढ़ती है लेकिन पूरी तरह पैसा-वसूल नहीं बन पाती है। हालांकि काफी हद तक यह फिल्म अपनी साधारण कहानी के इर्दगिर्द ही घूमती है और हर घर में साफ शौचालय बनवाने की बात शिद्दत से रखने में सफल भी रहती है। लेकिन इस फिल्म की कहानी में थोड़ा कसाव लाया जा सकता था। इसी तरह पाश्र्व संगीत के मामले में भी यह फिल्म थोड़ा निराश करती है। फिल्म के क्लाइमैक्स में घटनाएं बड़ी तेजी से घटती हैं। इन सब खामियों के बावजूद यह फिल्म एक बार देखने के लिहाज से एक रोचक मनोरंजन पेश करती है।
Keyword: film, movie, toilet,,
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