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खुली पेशकश टालने के लिए सरकार ने बदलीं शर्तें

एजेंसियां / नई दिल्ली August 09, 2017

सरकार ने एचपीसीएल की 51.11 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री ओएनजीसी को किए जाने की शर्तों में बदलाव किया है, जिससे कंपनी को खुली पेशकश टालने में मदद मिलेगी। आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने 19 जुलाई को हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड में सरकार की मौजूदा 51.11 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री ओएनजीसी को किए जाने की सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। साथ ही प्रबंधन का नियंत्रण भी हस्तांतरित होगा, जिसके चलते एचपीसीएल अब ओएनजीसी की सहायक कंपनी बन जाएगी। विनिवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने 21 जुलाई को इसी फॉम्र्युले का इस्तेमाल करते हुए इस सौदे के प्रबंधन की खातिर निवेश व मर्चेंट बैंकरों से अभिरुचि पत्र आमंत्रित किए थे।
 
इसके तहत चूंकि प्रबंधन का नियंत्रण सरकार से निकलकर ओएनजीसी के हाथ में जाएगा, लिहाजा सवाल उठ रहे हैं कि क्या अल्पांश शेयरधारकों की अतिरिक्त 26 फीसदी हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिए सेबी की अधिग्रहण संहिता लागू होगी और ओएनजीसी को खुली पेशकश लानी होगी?   ऐसे में दीपम ने 7 अगस्त को शर्तों में संशोधन किया, जिसमें कहा गया है कि एचपीसीएल कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 2 (45) की शर्तों के तहत सरकार की कंपनी बनी रहेगी और इसका नियंत्रण पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण वाली ओएनजीसी के जरिए सरकार के पास रहेगा। अधिकारी ने कहा, सरकार अपनी हिस्सेदारी बेच रही है, लेकिन संशोधित शर्तों में स्पष्ट किया गया है कि वह एचपीसीएल का नियंत्रण बनाए रखेगी। क्योंकि वास्तविक नियंत्रण का हस्तांतरण नहीं हो रहा है और इस वजह से खुली पेशकश की जरूरत नहीं होगी।
 
आज के भाव के हिसाब से ओएनजीसी को सरकारी हिस्सा खरीदने के लिए 33,633 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। अगर खुली पेशकश के जरिए अधिग्रहण होता तो बाजार से 26 फीसदी हिस्सा खरीदने के लिए इसे 17,100 करोड़ रुपये और खर्च करने होते। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि ओएनजीसी को सरकारी हिस्सा खरीदने के लिए करीब 25,000 करोड़ रुपये उधार लेना होगा। कंपनी की 15,000 करोड़ रुपये की नकदी का आधा हिस्सा गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्प की केजी बेसिन गैस ब्लॉक में हिस्सेदारी लेने पर खर्च हो गया है और इस साल की पूंजीगत खर्च का हिसाब लगाने के बाद ओएनजीसी के पास महज 4,000-5,000 करोड़ रुपये बचेंगे। बाकी रकम कंपनी को उधार लेनी होगी।
Keyword: HPCL, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल),
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