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एलआईसी घटाए एलऐंडटी व आईटीसी में हिस्सा : आईआरडीएआई

सुब्रत पांडा / मुंबई August 07, 2017

बीमा नियामक आईआरडीएआई ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम को एलऐंडटी व आईटीसी में अपनी हिस्सेदारी दिसंबर 2018 तक घटाकर 15 फीसदी करने का निर्देश दिया है। हालांकि जिन कंपनियों में एलआईसी का रणनीतिक निवेश है मसलन कॉरपोरेशन बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस आदि, उनमें एलआईसी को अपनी हिस्सेदारी 15 फीसदी या इससे कम करने की दरकार नहीं होगी। 
 
एलआईसी दूसरी कंपनियों में अपना रणनीतिक निवेश पहले की तरह 15 फीसदी या इससे ज्यादा बनाए रख सकेगी, खास तौर से कॉरपोरेशन बैंक व एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस में। यह जानकारी आईआरडीएआई के सदस्य निलेश साठे ने सीआईआई के 19वें बीमा सम्मेलन के बाद दी। नियामक ने इन दो कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी तत्काल बेचने का निर्देश एलआईसी को नहीं दिया है क्योंकि इससे बाजार में उतारचढ़ाव होगा। साठे ने कहा, इसके अतिरिक्त नियामक इन दो कंपनियों में एलआईसी को हिस्सेदारी घटाने के लिए और वक्त देगा, अगर एलआईसी इसकी जरूरत महसूस करेगी।
 
बीएसई को भेजी जानकारी के मुताबिक, सरकारी बीमा कंपनी के पास आईटीसी और एलऐंडटी की जून 2017 में क्रमश: 16.25 फीसदी व 17.97 फीसदी हिस्सेदारी थी। आईटीसी का शेयर सोमवार को 0.27 फीसदी टूटकर 280 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुआ, वहीं एलऐंडटी का शेयर 1,178 रुपये पर स्थिर बंद हुआ। इससे पहले सम्मेलन में आईआरडीएआई के चेयरमैन टी एस विजयन ने कहा कि भारतीय बीमा उद्योग विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज कर रहा है, लेकिन चिंता इसके फैलाव को लेकर है। उन्होंने कहा, हम देख रहे हैं कि आखिर कितने लोग बीमा कवर का फायदा उठा रहे हैं।
 
पिछले साल सामान्य बीमा कारोबार 31 फीसदी बढ़ा और जीवन बीमा कारोबार 25 फीसदी बढ़ा। एक साल में करीब 5 लाख करोड़ रुपये का प्रीमियम संग्रह हुआ, इस तरह से बीमा कंपनियों की कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां 32 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई। विजयन ने कहा, तकनीक का हालांकि गहराई से अपनाया गया है, लेकिन जीवन बीमा योजनाओं के वितरण के लिए मानवीय संपर्क की जरूरत है। एलआईसी के चेयरमैन वी के शर्मा ने कहा, डिजिटलीकरण या तकनीक धोखाधड़ी की समस्या का समाधान नहीं कर सकता।
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