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भारतीय रेल और दुर्घटना की श्रेणी

विवेक देवराय /  August 07, 2017

भारतीय रेल में दुर्घटनाओं को अलग-अलग तरह से वर्गीकृत किया गया है। इस संबंध में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं विवेक देवराय

 
उस दुर्घटना में इंजन के पहियों में से एक टूट गया और इंजन एक ओर झुक गया। वह बेपटरी हो गया और अपने ही बोझ से दोहरा हो गया। इससे जुड़े हुए मालवाहक डिब्बों की हालत बुरी हो गई। सबकुछ पूरी तरह तहस नहस हो गया। इंजन पर सवार दो चालक और दो फोरमैन मारे गए। पांच ब्रिटिश सैनिकों की तत्काल मृत्यु हो गई जबकि 31 ब्रिटिश जवान तथा देसी व्यक्ति घायल हो गए। इस दुर्घटना से शहर में खासा शोर मचा। खासतौर पर अधिकारियों और सैनिकों के बीच।' आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह आजादी के पहले की एक रिपोर्ट का हिस्सा है। 
 
यह उद्धरण 6 नवंबर 1891 के द ग्लासगो हेरल्ड से लिया गया है। इसमें 5 नवंबर 1891 को नागपुर के निकट हुई एक रेल दुर्घटना का जिक्र है। यह अखबार रेलवे में खास रुचि रखता था। अखबार के इसी संस्करण में मिजूरी रेलवे की कैंजस एक्सप्रेस में हुई ट्रेन लूट और बीवाइज-एमीन रेलमार्ग पर एक मालगाड़ी और यात्री ट्रेन में हुई भिड़ंत का भी जिक्र था। ऐसा नहीं है कि इससे पहले रेल दुर्घटनाएं नहीं हुई होंगी लेकिन सन 1891 पहला ऐसा वर्ष था जब किसी रेल के पटरी से उतरने की घटना दर्ज की गई।
 
हर वर्ष रेलवे सुरक्षा आयोग (सीआरएस) रेल दुर्घटनाओं से जुड़े आंकड़े मुहैया कराता है। इस बारे में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े भी मौजूद हैं। वर्ष 2015 में रेल दुर्घटनाओं में 26,066 लोगों की मौत हुई जबकि 2,650 लोगों की मौत रेलवे फाटकों पर हुई दुर्घटनाओं में हुई। वर्ष 2014 में भी यह आंकड़ा कमोबेश इतना ही था। लेकिन ये आंकड़े भारतीय रेल अथवा सीआरएस के आंकड़ों से मेल नहीं खाते। 
 
भारतीय रेल के मुताबिक वर्ष 2014-15 में ट्रेनों के टकराने से एक भी मौत नहीं हुई जबकि क्रॉसिंग पर हुई दुर्घटनाओं में 159 लोगों का मृत्यु हो गई। दुर्घटनाओं की परिभाषा को लेकर भी समस्या है। 'रेलवे के कामकाज की बात करें दुर्घटना रेलवे के कामकाज का वह हिस्सा है जहां रेलवे, उसके इंजन, रोलिंग स्टॉक, उसके स्थायी कामकाज और स्थायी संपत्तियों, यात्रियों या उसके कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ समझौता होता है या जिसकी वजह से ट्रेनों के परिचालन में देरी होती है या हो सकती है। या फिर रेलवे को नुकसान होता है। आंकड़ों के अनुसार दुर्घटनाओं को ए से लेकर आर तक कई श्रेणियों में बांटा गया है। 
 
दुर्घटनाओं की एक न्यूनतम सीमा तय की गई है। जिसके पार जाने पर किसी भी दुर्घटना के बारे में यह माना जाता है रेलवे की संपत्ति की क्षति हुई है या संचार बाधित हुआ है। इसके दो हिस्से हैं: (अ) रेलवे की परिसंपत्ति की मूल्य सीमा (ब) संचार बाधित होने की मूल्य सीमा आंशिक या पूरी। यहां बाधा की अवधि घंटों से अधिक या समतुल्य होती है।' हमें लगता है कि भारतीय रेल सारी दुर्घटनाओं को रिपोर्ट करता है जबकि यह केवल महत्त्वपूर्ण दुर्घटनाओं को ही दर्ज करता है। यानी जो उपरोक्त दी गई सीमा से अधिक होते हैं। भारतीय रेल के आंकड़े ऐसी ही गंभीर दुर्घटनाओं से ताल्लुक रखते हैं। 
 
गंभीर दुर्घटना ऐसी दुर्घटना है जहां किसी सवारी गाड़ी में लोगों की जान चली जाए, या वे गंभीर रूप से घायल हो जाएंगे या फिर रेलवे की परिसंपत्ति को उल्लेखनीय नुकसान हो। या फिर ऐसी कोई दुर्घटना जो रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त की नजर में जांच के काबिल हो उसे भी गंभीर दुर्घटना माना जा सकता है। बहरहाल, निम्नलिखित को इस दायरे से बाहर रखा जा सकता है: (अ) अपनी लापरवाही की वजह से घायल होने या मारा जाने वाला कोई यात्री या कोई घुसपैठिया (ब) ऐसे मामले जिनमें शामिल लोग रेलवे के कर्मचारी हों या जिनके पास वैध पास और टिकट हों और जो किसी कोच या डिब्बे से दूर कहीं घायल हों या मारे जाएं या किसी लेवल क्रॉसिंग पर या किसी और जगह जिनके ऊपर ट्रेन चढ़ जाए। (स) एक लेवल क्रॉसिंग दुर्घटना जहां कोई यात्री या रेलवे का कोई कर्मचारी मारा नहीं जाए और जिसके बारे में रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने यह विचार प्रकट नहीं किया हो कि संबंधित मामले की जांच की जरूरत है। 
 
सीआरएस हर रेल दुर्घटना की जांच नहीं करता और दुर्घटनाओं से संबंधित उसके आंकड़ों में केवल वही मामले शामिल होते हैं जहां सीआरएस जांच की गई हो। इसके अलावा यह प्रावधान एक और बात स्पष्टï करता है कि गंभीर दुर्घटना केवल उन मामलों को माना जाएगा जहां भारतीय रेल अभियोज्य हो। ऊपर ए से आर की श्रेणी का जिक्र आया है। विभिन्न दुर्घटनाओं को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है और ए श्रेणी का अर्थ होता है टकराव। उदाहरण के लिए ए1 और ए3 श्रेणी में ऐसी रेलों का टकराव आता है जो यात्रियों को ले जा रही हों। ए2 या ए4 श्रेणी में ऐसी ट्रेनों के टकराने के मामले आते हैं जिनमें यात्री नहीं हों। बी श्रेणी में ट्रेनों में विस्फोट या आग लगने की घटनाएं आती हैं। सी श्रेेणी में लेवल क्रॉसिंग और ऐसी घटनाएं आती हैं जहां ट्रेन और सड़क यातायात का टकराव हो। 
 
डी श्रेणी में ट्रेनों का बेपटरी होना शामिल है, ई में अन्य तरह की ट्रेन दुर्घटनाएं, एफ में ऐसे टकराव जिनसे बचने में सफलता मिली, जी यानी ब्लॉक नियमों का उल्लंघन, एच यानी किसी ट्रेन का सिग्नल पार कर जाना, जे यानी उपकरणों की खराबी, के यानी स्थायी रास्ते की विफलता, एल यानी इलेक्ट्रिकल उपकरण की खराबी। एम यानी सिग्नल और संचार की नाकामी, एन यानी अस्वाभाविक घटनाएं, पी यानी लोगों की मौत, क्यू यानी अन्य घटनाएं और आर यानी विभिन्न बातें। यहां प्रश्न यह है कि अस्वाभाविक घटनाओं और अन्य घटनाओं में क्या अंतर है? 
 
अस्वाभाविक घटनाओं में तोडफ़ोड़ और नुकसान पहुंचाने की बात शामिल है जो आमतौर पर नहीं होता। क्यू 6 का अर्थ है विरोध प्रदर्शन आदि के चलते रेल सेवाओं का बाधित होना। जाहिर है इसे अस्वाभाविक घटनाक्रम नहीं माना जा सकता है। आप देख सकते हैं कि आखिर क्यों दुर्घटनाओं को लेकर भारतीय रेल का रुख अलग-अलग है। एल 2 श्रेेणी में वे घटनाएं आती हैं जहां ट्रेन को गति देने वाले बिजली के तार में तीन मिनट तक करंट न हो। यह दुर्घटना के हमारे आम मानसिक खाके में भले फिट नहीं होता हो लेकिन इसका असर बहुत व्यापक हो सकता है। 
 
(लेखक नीति आयोग के सदस्य हैं। लेख में प्रस्तुत विचार पूरी तरह निजी हैं।) 
Keyword: railway, रेल accident,,
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