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बचत खाते का गम कैसे करें कम

जयदीप घोष और तिनेश भसीन /  August 06, 2017

देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी बचत खाते पर ब्याज की दर में 50 आधार अंकों की कटौती कर दी है। इस तरह देश के दो बड़े बैंकों के बचत खाते में अब 3.5 फीसदी ब्याज मिलेगा। तुरंत नकदी के लिए बैंक के बचत खाते में पैसे रखने वाले लोग यह सोचने को जरूर मजबूर होंगे कि क्या अब बचत खाते में ज्यादा पैसा रखना समझदारी है? ऐसे में वे चाहें तो दूसरे विकल्प भी आजमा सकते हैं।

 
वित्तीय सलाहकार हर्ष रूंगटा का मानना है कि नकदी के लिए ब्याज दर से आय गंवाना अपने आप में अच्छी बात नहीं है। उनकी दलील है, 'आप सभी तरह के भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं और एक सीमित अवधि के लिए इस भुगतान पर कोई शुल्क भी नहीं है। बिल चुकाने की अंतिम तारीख से पहले अपने क्रेडिट कार्ड का बकाया भुगतान चुकाइए। फिर आपको बैंक में ज्यादा नकदी रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।' वह कॉर्पोरेट बॉन्ड और सावधि जमा की सलाह देते हैं जिनमें नकदी पाने में 3-4 दिन लग जाते हैं लेकिन इनमें बेहतर प्रतिफल मिलता है।
 
अलबत्ता अगर आपको साप्ताहिक एसएमएस सेवा सुविधाजनक लगती है तो आप ऑटो स्वीप फैसिलिटी का विकल्प चुन सकते हैं। इसमें आपको हर हफ्ते अपने खाते में मौजूद नकदी की जानकारी मिलती है। सभी बैंक यह सेवा देते हैं। ऑटो स्वीप के तहत एक खास सीमा से ऊपर की राशि अपने आप सावधि जमा में तब्दील हो जाएगी। स्थानांतरित होने वाली राशि 1,000 या 5,000 रुपये या  10,000 रुपये तक के गुणक में हो सकती है। इसमें खाता धारक को न केवल ज्यादा ब्याज मिलता है बल्कि जरूरत पडऩे पर पैसे भी तुरंत मिल जाते हैं। इसके लिए उसे न बैंक से अनुरोध करने की जरूरत पड़ती है और न ही कोई जुर्माना लगता है। मान लीजिए आप बैंक से कहते हैं कि 50,000 रुपये से अधिक की कोई भी रकम ऑटो स्वीप फैसिलिटी में जाएगी तो जाहिर है इस अतिरिक्त राशि पर आपको ज्यादा प्रतिफल मिलेगा। एसबीआई का सेविंग्स प्लस अकाउंट और आईसीआईसीआई बैंक का मनी मल्टीप्लायर प्लान इस तरह के खाते हैं। इन खातों में ग्राहकों को एक साल और 5 साल की जमा अवधि चुनने का विकल्प है। ये सभी खाते रिवर्स स्वीप मैकेनिज्म की पेशकश करते हैं जिससे ग्राहक को भुगतान करने, बचत खाते में उपलब्ध शेष राशि से अधिक नकदी निकालने या चेक जारी करने की सुविधा मिलती है। पैसे लास्ट इन, फस्र्ट आउट (एलआईएफओ) आधार पर निकलते हैं। शेष राशि पर ज्यादा ब्याज मिलता रहता है। अधिकांश बैंकों में सावधि जमा पर ब्याज दर 6 फीसदी से अधिक है।
 
निवेशकों के पास लिक्विड फंड और अल्पकालिक ऋण फंड का भी विकल्प है। रिलायंस, डीएसपी ब्लैकरॉक और बिड़ला सन लाइफ जैसे कुछ फंडों ने अपने लिक्विड फंड को तुरंत भुनाने की पेशकश भी शुरू कर दी है। अधिकांश दूसरे लिक्विड फंडों में पैसों की निकासी में 24 घंटे लगते हैं। उदाहरण के लिए रिलायंस म्युचुअल फंड एक वीजा संचालित कार्ड देता है। रिलायंस एनी टाइम मनी डेबिट कार्ड की तरह काम करता है और यह फंड हाउस के लिक्विड फंड से जुड़ा रहता है। इस कार्ड के जरिये निवेशक एटीएम से पैसे निकाल सकते हैं और दुकानों में सामान के लिए भी भुगतान कर सकते हैं। इसकी रोजाना की न्यूनतम सीमा बैलेंस की 50 फीसदी राशि और अधिकतम सीमा 50,000 रुपये है। 
 
रिलायंस म्युचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी (निश्चित आय निवेश) अमित त्रिपाठी ने कहा, 'ट्रेजरी बिलों, बैंकों के जमा पत्र और बड़ी कंपनियों के वाणिज्यिक पत्रों जैसे विकल्पों में निवेश करके म्युचुअल फंड ज्यादा प्रतिफल कमा सकते हैं। इन फंडों से आपको बचत बैंक ब्याज दर से 2 से 4 फीसदी तक ज्यादा प्रतिफल मिल सकता है।' लेकिन निवेशकों को यह बात याद रखनी चाहिए कि ऋण पत्र बैंकों की बचत जमा की तरह सुरक्षित नहीं होते हैं। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार क्लीयरफंड्स डॉट कॉम के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी कुणाल बजाज कहते हैं, 'किसी ग्राहक के बैंक खाते में मौजूद राशि का अधिकतम 1 लाख रुपये तक का बीमा होता है। ऋण फंडों में निवेश करने में कुछ जोखिम होता है जिसमें नुकसान भी शामिल है। साथ ही लिक्विड फंडों से भविष्य में मिलने वाला प्रतिफल पुराने रिटर्न से अलग हो सकता है।
Keyword: bank, loan, debt, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई),
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