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बाजार भागीदारी और मार्जिन बढ़ाने को तैयार अशोक लीलैंड

राम प्रसाद साहू /  August 06, 2017

जून तिमाही के खराब प्रदर्शन की वजह से भले ही अशोक लीलैंड में थोड़ी कमजोरी आई हो लेकिन इस शेयर के लिए नकारात्मक खबरों का दौर खत्म हो गया है और विश्लेषक इस शेयर में अच्छे दमखम की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि कंपनी की आगे की संभावनाएं बेहतर लग रही हैं। कुल बिक्री में 8 फीसदी की गिरावट के कारण राजस्व सपाट ही रहा। इस गिरावट को बीएस-4 मॉडलों की ऊंची कीमतों ने थामा और राजस्व को नहीं गिरने दिया। कमजोर बिक्री के साथ साथ कर्मचारी लागत अधिक होने से भी कंपनी का मार्जिन सालाना आधार पर 3.6 फीसदी गिरकर 7.6 फीसदी रह गया। मझोले और भारी वाहनों की बिक्री 17 फीसदी गिरी जबकि हलके वाणिज्यिक वाहनों की बढ़ी। शुद्ध मुनाफा अनुमान से कम रहा। 

 
कमजोर प्रदर्शन के बावजूद कई ब्रोकरेज फर्मों ने अशोक लीलैंड पर सकारात्मक रुख अपनाया है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज की स्नेहा प्रशांत और अभिषेक जैन ने बढ़ते वितरण नेटवर्क, मजबूत मॉडल पोर्टफोलियो, कंपनी के कर्ज में कमी और आर्थिक गतिविधियों में सुधार की उम्मीद को देखते हुए अपना रुख सकारात्मक रखा है। इस सकारात्मक रुख का कारण पिछले दो वर्षों के दौरान कंपनी को हुए कुछ लाभ हैं। एडलवाइसज सिक्योरिटीज के चिराग शाह और कार्तिक सुब्रमण्यम का मानना है कि कुछ संरचनात्मक रुझानों से अशोक लीलैंड को मदद मिलेगी। पहला है 'ज्यादा टन वाले क्षेत्र की मांग में इजाफा' होना। इस क्षेत्र में अशोक लीलैंड की स्थिति मजबूत है। इससे उसे अपनी बाजार भागीदारी मजबूत बनाने में मदद मिलनी चाहिए। ज्यादा टन वाले वाहनों की मांग बढऩे का कारण सड़कों की स्थिति में सुधार, चालकों की कमी और ओवरलोडिंग पर रोक लगना है।
 
अशोक लीलैंड 26 से 35 टन ट्रैक्टर-ट्रेलर खंड में बाजार दिग्गज है। इस खंड में उसकी बाजार भागीदारी 42.5 फीसदी है। साथ ही, 35 टन से अधिक के सेगमेंट में भी वह दूसरे पायदान के करीब है। वितरण और बिक्री बाद की सेवा ने भी अशोक लीलैंड के प्रदर्शन में अहम योगदान दिया है। छोटे, मझोले और भारी वाणिज्यिक वाहनों के अपने पोर्टफोलियो में कमी खत्म करने के बाद कंपनी 2015 से 17 के दौरान अपना नेटवर्क 28 फीसदी तक बढ़ाने में सफल रही है। इससे इस अवधि में उसे अपनी बिक्री 24 फीसदी बढ़ाने में मदद मिली है।
 
वाणिज्यिक वाहनों के खंड में कंपनी की बाजार भागीदारी 34.7 फीसदी पर है जो पिछले चार वर्षों के मुकाबले 8 फीसदी अधिक है। कंपनी अपनी इंटेलीजेंट एक्जॉस्ट गैस रीसर्कुलेशन (आईईजीआर) टेक्नोलॉजी की कामयाबी के बल पर पिछली 13 में से 12 तिमाहियों में बाजार भागीदारी में इजाफा करने में सफल रही है। कंपनी का कहना है कि यह पारंपरिक ईजीआर प्रणालियों के आधार पर प्रतिस्पर्धियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नोलॉजी के मुकाबले श्रेष्ठï (कम रखरखाव लागत, टिकाऊ इंजन) है। मझोले और भारी वाणिज्यिक वाहनों के अलावा कंपनी निर्यात, रक्षा और एलसीवी में भी कई पहल पर काम कर रही है। हलके वाहन व्यवसाय (पहले रेनो के साथ संयुक्त उपक्रम में) का कुल बिक्री में लगभग 32 फीसदी योगदान रहा है। इस पर अब कंपनी का पूर्ण नियंत्रण है। अशोक लीलैंड अब हरेक मल्टीपल सब-सेगमेंटों की जरूरतें पूरी करने के लिए अपनी पेशकश बढ़ाने के लिए मॉडल विकास पर अधिक ध्यान दे रही है। दरअसल, एलसीवी व्यवसाय में हाल के महीनों में बिक्री में तेजी आई है जबकि ट्रक सेगमेंट पीछे रहा है और या तो उसकी बिक्री में गिरावट आई है या फिर बिक्री वृद्घि एक अंक में रही है।
 
कंपनी अफ्रीका में नए बस संयंत्र स्थापित करने और और अंतरराष्टï्रीय परिचालन मजबूत करने के लिए बिक्री कर्मियों की संख्या बढ़ाने की संभावना तलाश रही है। उसकी नजर मौजूदा प्लेटफॉर्मों पर आधारित सॉल्युशन के साथ भारत और विदेशों के रक्षा क्षेत्र पर भी लगी हुई है। निर्यात, रक्षा और कलपुर्जा क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने की योजना को देखते हुए कंपनी को अपना मार्जिन 2016-17 के 11 फीसदी के स्तर से बढ़ाने में मदद मिलनी चाहिए। इन क्षेत्रों में मार्जिन ऊंचा है। 
 
मजबूत बिक्री और विस्तार के बीच कंपनी कम कार्यशील पूंजी के साथ लागत को नियंत्रित रखने में सफल रही है। साथ ही उसे परिचालन से मजबूत नकदी प्रवाह हासिल हुआ है। इससे एकल स्तर पर उसका ऋण स्तर लगभग न के बराबर है। उसका कर्ज-पूंजी अनुपात मौजूदा समय में 0.3 गुना पर है। यह शेयर मजबूत बना हुआ है और कंपनी की पहल में तेजी को देखते हुए इसमें और तेजी के आसार दिख रहे हैं। यह शेयर मौजूदा समय में 2018-19 के आय अनुमानों के करीब 15 गुना पर कारोबार कर रहा है और 130-135 रुपये के कीमत लक्ष्य को देखते हुए 25 से 30 फीसदी का और प्रतिफल दिला सकता है। 
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