बिजनेस स्टैंडर्ड - लौह अयस्क खदानों के लिए इस्पात कंपनियों की ऊंची बोली
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लौह अयस्क खदानों के लिए इस्पात कंपनियों की ऊंची बोली

दिलीप सत्पथी / भुवनेश्वर August 06, 2017

देश में लौह अयस्क खदानों की नीलामी के दौरान तगड़ी प्रतिस्पर्धा देेखने को मिली है। इसमें निजी इस्तेमाल के लिए आरक्षित खदानों की गैर-निजी उपयोग के उद्देश्य वाली खदानों की तुलना में ज्यादा बोली लगी है। निजी उपयोग के लिए आरक्षित लौह अयस्क की 9 खदानों में से 5 उन बोलीदाताओं को मिली हैं, जिन्होंने संबंधित राज्यों के साथ 100 फीसदी से ज्यादा राजस्व साझेदारी की पेशकश की है। अब तक 27 खनिज खदानों की नीलामी हो चुकी है, जिनमें 10 लौह अयस्क की खदान हैं। इन 10 खदानों में 9 निजी इस्तेमाल के लिए आरक्षित हैं, जबकि एक गैर-निजी उपयोग के लिए है। यहां तक कि गैर-निजी उपयोग वाली खदान भी इस्पात कंपनी (भूषण पावर ऐंड स्टील) ने हासिल की है, जिसने नेत्रबंध पहाड़ खदान के लिए बोली लगाने में व्यावसायिक खनिकों को पीछे छोड़ दिया। 

 
एक विश्लेषक ने कहा, 'यह रुझान यह दर्शाता है कि निजी खनिज संसाधनों के बिना चल रहीं इस्पात कंपनियों को कारोबारी खनिकों की तुलना में कच्चे माल की आपूर्ति सुरक्षित करने की ज्यादा दरकार है। लौह अयस्क खदान खरीदने में कारोबारी खनिकों का मकसद केवल कारोबार होता है।' देश में 75 फीसदी इस्पात का उत्पादन कारोबारी खनिकों से लौह अयस्क खरीदकर हो रहा है। देश में लौह अयस्क की कीमतें तय करने को लेकर कोई व्यवस्था न होने से कुछ बड़े खनिकों पर कीमतें और आपूर्ति नियंत्रित करने के लिए सांठगांठ करने के आरोप भी लगे हैं। इस वजह से लौह अयस्क की घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में अधिक हैं, जबकि कारोबारी खनिक खुद द्वारा उत्खनित पूरा अयस्क नहीं बेच पा रहे हैं। वित्त वर्ष 2017 में 19.4 करोड़ टन लौह अयस्क का उत्पादन हुआ, जिसमें इस्पात उद्योग में 12.66 करोड़ टन की खपत हुई और 2.5 करोड़ टन का निर्यात कर दिया गया। शेष 4 करोड़ टन निम्न ग्रेड का अयस्क खदानों के बाहर पड़ा हुआ है। 
 
निजी इस्तेमाल के लिए आरक्षित खदानों के लिए इस्पात कंपनियों द्वारा ऊंची बोलियां लगाए जाने से कारोबारी खनिकों के ये दावे खारिज हो गए कि अगर निजी इस्तेमाल के लिए ज्यादा खदानें आरक्षित की गईं तो लौह अयस्क की कीमतें घटेंगी और राज्यों को रॉयल्टी एवं कम नीलामी कीमत के रूप में राजस्व का नुकसान होगा। एक इस्पात कंपनी के अधिकारी ने कहा, 'इसके विपरीत निजी इस्तेमाल के लिए आरक्षित खदानों की बोली कीमत लगातार बढ़ती जा रही है और हाल की कुछ नीलामियों में इस्पात कंपनियों ने खदान से होने वाली बिक्री का 100 फीसदी राजस्व राज्य सरकारों के साथ साझा करने की पेशकश की है। अगर निजी उपयोग के लिए आरक्षित खदानों में उत्पादन की लागत कारोबारी खनिकों के समान रही तो इससे रॉयल्टी से प्राप्त होने वाले राजस्व पर कोई असर नहीं पड़ेगा। निजी उपयोग के लिए और ज्यादा खदानें आरक्षित करने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि जब पेलेट और स्पंज आयरन विनिर्माताओं सहित सभी अंतिम उपयोगकर्ता निजी खनन के लिए आरक्षित खदानों को खरीदने के लिए पात्र हैं तो किसी भी लौह अयस्क खदान को कारोबारी खनन के लिए नीलामी करने की जरूरत नहीं है। 
Keyword: iron ore, लौह अयस्क,
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