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जीएसटी में उलझी धागे की कीमत

विनय उमरजी / अहमदाबाद August 04, 2017

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के बाद एफडीवाई (फुली ड्रॉन यॉर्न) और पीओवाई (पार्शली ओरियंटेड यॉर्न) के दामों में 5-7 प्रतिशत की वृद्धि से कृत्रिम कपड़ा बुनाई उद्योग के मुनाफे पर दबाव बन गया है। प्यूरिफाइड टेरेप्थैलिक एसिड (पीटीए) और मोनोइथाइलिन ग्लाइकॉल (एमईजी) जैसे कच्चे माल की कीमतों में इजाफे की वजह से इनके दामों में यह वृद्धि हुई है। एक ओर जहां अभी बहुत से बुनकरों, संसाधकों और व्यापारियों को जीएसटी के अंतर्गत पंजीकरण कराना बाकी है, वहीं दूसरी ओर संचयी ड्यूटी क्रेडिट और रिवर्स चार्ज मेकैनिज्म (आरसीएम) के संबंध में अस्पष्टïता की वजह से विकेंद्रीकृत करघों और वस्त्र संसाधन इकाइयों के लिए बढ़ती लागत के दबाव से जूझना मुश्किल हो रहा है। सूरत में पांडेसरा वीवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशिष गुजराती ने कहा कि उद्योग में अभी भी अनिश्चितता की स्थिति है क्योंकि पंजीकरण प्रक्रिया अभी भी चल रही है। बुनकर, प्रोसेसर और व्यापारी खरीदने और बेचने की स्थिति में नहीं है। ऐसे समय में कच्चे माल की कीमत में वृद्धि हमारी लागत के साथ-साथ मुनाफे पर भी खासा असर डाल रही है।

 
पहले की तुलना में जीएसटी के बाद करघों और संसाधकों पर 18 प्रतिशत का अतिरिक्त शुल्क लग रहा है। इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करना पड़ता है। हालांकि आरसीएम व इनपुट क्रेडिट संचय की अधिकता और मूल्य शृंखला में ठेके पर काम करने वालों का पंजीकरण न होने की वजह से करघों और संसाधकों को इस अतिरिक्त लागत को स्वयं वहन करना पड़ रहा है। इस तरह, प्रति किलोग्राम धागे पर होने वाली दो रुपये की वृद्धि पर 18 प्रतिशत का अतिरिक्त कर लगेगा जिसे मौजूदा हाल में इनपुट क्रेडिट के जरिये वापस नहीं लिया जा सकता है।
 
हाल में विभिन्न किस्म वाले धागे की कीमतों में इजाफा हुआ है। उदाहरण के लिए 75/72 डेनियर एफडीवाई की कीमतों में छह प्रतिशत का इजाफा देखा गया है। जीएसटी से पहले यह 95 रुपये प्रति किलोग्राम था और जीएसटी के बाद 101 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। इसी तरह, 70/36 एफडीवाई में सात प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। यह 98 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 105 रुपये प्रति किलाग्राम हो गया है। 80/72 रोटो, 50/24 एफडीवाई और 50/36 बीआरवाई के दाम क्रमश: पांच, छह और छह प्रतिशत तक बढ़कर 120, 112 और 140 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुके हैं। गुजराती ने कहा कि जीएसटी लागू होने की वजह से सुस्ती के बाद जब बाजार की शुरुआत हुई तो कताई करने वालों ने कीमतों में इजाफा करते हुए मांग की अफवाहों का लाभ उठा लिया। यह मुनाफाखोरी है। हालांकि धागा विनिर्माताओं का कहना है कि कच्चे तेल के दामों में इजाफा होने की वजह से यह कीमत वृद्धि हुई है और यह सीजन के दौरान होने वाली कीमत वृद्धि है। अग्रणी कृत्रिम धागा विनिर्माता इंडो रामा सिंथेटिक्स के अध्यक्ष ओपी लोहिया ने कहा कि यह धागा विनिर्माताओं की समय-समय पर होने वाली कवायद है। जीएसटी के बाद बने बाजार के परिदृश्य से इसका संबंध नहीं है।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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