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कृषि स्टार्टअप को शुरुआती मदद संवारेगी कारोबार की बिगड़ी बात

खेती-बाड़ी
सुरिंदर सूद /  August 04, 2017

पिछले दो वर्षों में कृषि क्षेत्र से जुड़ी स्टार्टअप की गतिविधियों में काफी तेजी देखी गई है। हालांकि इन स्टार्टअप की संख्या अब भी अन्य क्षेत्रों की स्टार्टअप की तुलना में काफी कम है लेकिन कृषि प्रौद्योगिकी एवं किसानों की समस्याओं के नवाचार-आधारित समाधान की संभावनाओं को देखते हुए इसके विकास की व्यापक संभावनाएं बनी हुई हैं। हालांकि मौजूदा समय में सक्रिय कृषि उद्यमों में से अधिकांश को शुरुआती दौर में सफलता मिली थी लेकिन एक सीमा से आगे बढऩे में उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह यह है कि उनके पास समुचित कारोबारी मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। आम तौर पर प्रोजेक्ट इनक्यूबेटर स्टार्टअप कंपनियों को क्षमता निर्माण, नेटवर्किंग, ज्ञान एवं संसाधन संबंधी पहुंच और अन्य जरूरी सेवाएं मुहैया कराते हुए उनकी मदद करते हैं। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से करीब 300 इनक्यूबरेटर और उनके उन्नत संस्करण कहे जाने वाले एक्सीलरेटर में से अधिकांश के पास खेती से संबंधित उद्यमों का मार्गदर्शन करने की विशेषज्ञता और काबिलियत ही नहीं है। अधिकांश स्टार्टअप एक्सीलरेटरों का ध्यान मुख्यत: सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य देखभाल और हरित प्रौद्योगिकी जैसे अधिक मांग वाले क्षेत्रों पर ही रहता है।

 
ऐसी स्थिति में कृषि आधारित स्टार्टअप के कारोबारी हितों का ध्यान रखने के बेहद मुश्किल काम का जिम्मा हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंध अकादमी (नार्म) ने संभाला है। इस संस्थान ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से अपने मुख्यालय में 'ए-आइडिया' यानी कृषि क्षेत्र में उद्यमशीलता के नवाचारपरक विकास संघ नामक इकाई का गठन किया है। इस इकाई का गठन खाद्य एवं कृषि उद्यम से जुड़ी स्टार्टअप को अपना  कारोबारी मॉडल एवं रणनीतियों का पालन-पोषण करने और उनमें सुधार करने के मकसद से किया गया है। इससे नए उद्यम कारोबार संबंधी चुनौतियों का सामना करने के काबिल बन सकते हैं। 
 
इस अभियान के तहत चुनिंदा उद्यमों को संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों, मार्गदर्शकों और संभावित निवेशकों के साथ संपर्क स्थापित करने का मौका दिया जाता है। इसके पीछे असली मकसद यह है कि नई कंपनियों को अपनी पूरी क्षमता से काम करने लायक बनाने में पूरी मदद की जा सके। इस कार्यक्रम के तहत 2015 में चुनी गई आठ स्टार्टअप में से कुछ को तो इससे काफी फायदा हुआ है और अब वे वाणिज्यिक रूप से काफी बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। उनमें से तीन स्टार्टअप तो अपने कारोबार के विस्तार के लिए अच्छा-खासा निवेश आकर्षित करने में भी सफल रही हैं। 
 
ए-आइडिया ने अपनी इस कामयाबी से प्रेरित होकर अब इस कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू करने का फैसला किया है। इस महत्त्वाकांक्षी अभियान को 'एग्री-उड़ान' का नाम दिया गया है। इस अभियान के तहत पहला कार्यक्रम इस साल सितंबर के महीने से शुरू होने वाला है। इसके पहले देश के विभिन्न शहरों में छह बड़े रोडशो भी किए जाएंगे जिनकी शुरुआत दिल्ली के रोडशो से होगी। नार्म की संयुक्त निदेशक कल्पना शास्त्री के दावे को अगर  मानें तो यह अभियान कृषि क्षेत्र की उन स्टार्टअप के लिए अनूठा मंच साबित होगा जो भले ही शुरुआती दौर में हैं लेकिन उनका कामकाज चल रहा है। उन्हें अपने उत्पादों एवं सेवाओं का प्रदर्शन करने और विशेषज्ञों, इनक्यूबेटरों, शोध एवं विकास संगठनों, अन्य उद्योगों और निवेशकों से बहुमूल्य सुझाव एवं जानकारियां भी मिलेंगी। इस कार्यक्रम के जरिये स्टार्टअप को अनुभव से सीखने की वर्षों लंबी प्रक्रिया के बजाय कुछ ही महीनों में सघन एवं भागीदारी-जनित सीख मिल सकेगी। खास तौर पर उन उद्यमियों को इससे अधिक फायदा मिलेगा जो अपने कामकाजी प्रोटोटाइप के साथ अपनी टीम बना चुके हैं और उनके पास पहले से एक बुनियादी ग्राहक आधार मौजूद है।
 
भारतीय कृषि की तस्वीर बदल देने की क्षमता रखने वाली तकनीकों के विकास में राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली लगातार लगी हुई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के करीब सौ संस्थानों के अलावा 650 से अधिक कृषि विज्ञान केंद्र और तमाम राज्य कृषि विश्वविद्यालय इन तकनीकों के विकास में लगे हुए हैं। इन संस्थानों में विकसित कई नई एवं बेहद उपयोगी तकनीकें, कृषि विज्ञान प्रक्रियाएं, उपकरण एवं उत्पाद किसानों के स्तर पर या तो इस्तेमाल ही नहीं हो पाती हैं या अगर होती भी हैं तो उन्हें सुविधाजनक उपयोगी स्वरूप नहीं मिल पाता है। इसी तरह इन तकनीकों एवं उत्पादों को कारगर विपणन माध्यमों के अभाव में किसानों तक पहुंचाना भी संभव नहीं हो पाता है। 
 
कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने वाली स्टार्टअप अगर किसानों को उनकी उपज बढ़ाने, लागत घटाने और खेती संबंधी कार्यों में लगने वाली कड़ी मेहनत को कम करने में मददगार साबित होते हैं तो आगे चलकर उनके लिए कारोबार का नया क्षेत्र तलाशने की संभावनाएं भी बेहतर होंगी। फसल उपज में सुधार, कचरा कटौती और मूल्य-संवद्र्धन, कारगर लागत उपयोग, खेती में लगने वाली मेहनत कम करने और दक्षता सुधार के लिए मशीनीकरण को बढ़ावा देने के साथ ही सूचना एवं संचार की आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल में कृषि स्टार्टअप के लिए लुभावने अवसर तलाशे जा सकते हैं। ये स्टार्टअप कृषि और डेयरी, मुर्गी पालन एवं मत्स्य पालन जैसे उसके सहयोगी क्षेत्रों में आपूर्ति शृंखलाओं के विकास में भी खुद को शामिल कर अच्छा-खासा कारोबार कर सकती हैं। उम्मीद है कि हैदराबाद के नार्म संस्थान द्वारा संचालित 'एग्री-उड़ान' अभियान की सफलता कृषि स्टार्टअप के लिए परिवर्तनकारी साबित होगी। इससे कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के स्टार्टअप मिशन को भी प्रोत्साहन की राह आसान हो सकेगी। 
Keyword: agri, आधुनिक मशीन, किसान, कृषि उपकरण,,
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