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निवेशकों के दबाव से एमएनसी का बदला रुख

विवेट सुजन पिंटो / मुंबई August 04, 2017

बतौर मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) लंबे समय से मोंडेलेज की कमान संभालने वाली इरेन रोसेनफेल्ड ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट जगत को अचंभित कर दिया। अमेरिका में सबसे ताकतवर महिला सीईओ की सूची में शामिल रोसेनफेल्ड ने अपना इस्तीफा ऐसे समय में दिया है जब वारेन बफेट के नेतृत्व वाली कंपनी क्राफ्ट-हेंज के साथ संभावित विलय के लिए बातचीत चल रही है।
 
समझा जाता है कि नए सीईओ डिर्क वान डे पुट कारोबारी रणनीति का एक नया खाका तैयार करेंगे क्योंकि कैडबरी चॉकलेट और ओरियो कुकीज बनाने वाली कंपनी इन श्रेणियों में आगे बढऩे के लिए संघर्ष कर रही है। शेयरधारकों को लाभ देने के लिए मोंडेलेज पर पिछली कुछ तिमाहियों से निवेशकों का दबाव बढ़ रहा है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि नवंबर में अपना कार्यभार संभालने के तुरंत बाद वान डे पुट तेजी से पहल करेंगे।
 
चॉकलेट बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मोंडेलेज की भारतीय इकाई के लिए इसका मतलब नई कारोबारी रणनीति हो सकता है। उद्योग के विशेषज्ञों एवं विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी अपनी नई कारोबारी रणनीति के तहत नई श्रेणियों में उतरते हुए बाजार में तमाम नए ब्रांड उतार सकती है। मोंडेलेज के मुख्य वित्तीय अधिकारी ब्रायन ग्लैडन ने कहा है कि भारत, वियतनाम और मैक्सिको सहित कई उभरते बाजार अब स्थिर हो रहे हैं और वृहत आर्थिक परिदृश्य में सुधार दिख रहा है। वान डे पुट भारत में फिलहाल इसे भुना सकते हैं क्योंकि उसे अमेरिका से बाहर वृद्धि की जरूरत है।
 
हालांकि मोंडेलेज एकमात्र ऐसी कंपनी नहीं है जिसे हाल के महीनों में अपने निवेशकों से बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ा है। यूनिलीवर से लेकर आरबी (पूर्व में रेकिट बेंकिजर), नेस्ले, प्रॉक्टर ऐंड गैंबल और ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन (जीएसके) तक तमाम बहुराष्ट्रीय कंपनियों को निवेशकों के दबाव में लाभप्रदता और मार्जिन में सुधार पर कहींं अधिक ध्यान केंद्रित करना पड़ा है। इसी क्रम में वे अपनी गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों को भुनाते हुए लागत में कटौती, अन्य कंपनियों के साथ विलय और यहां तक कि छोटी-छोटी इकाइयों को अलग करने जैसी पहल कर रही हैं ताकि शेयरधारकों को बेहतर मूल्य मिल सके।
 
हालांकि कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियां फिलहाल विलय अथवा अपनी इकाइयों को अलग करने के प्रस्ताव को टाल रही हैं। जीएसके ऐसी ही एक कंपनी है जो मुनाफा कमाने वाली अपनी उपभोक्ता स्वास्थ्य सेवा इकाई को बंद करने का दबाव झेल रही है। इसी प्रकार यूनिलीवर के फूड कारोबार में हिस्सेदारी लेने के लिए क्राफ्ट हेंज ने इस साल के आरंभ में असफल कोशिश की थी।
 
बहरहाल, ये कंपनियां फिलहाल लाग में कटौती, मार्जिन में सुधार और अपने प्रमुख कारोबार पर ध्यान केंद्रित करने जैसे बुनियादी बातों पर ध्यान दे रही हैं। अप्रैल में यूनिलीवर ने कहा था कि वह अपनी दो कारोबारी इकाइयों- फूड और रिफ्रेशमेंट- का विलय करने, अलग-थलग पड़े कारोबार को बेचने, 5 अरब मूल्य के शेयरों की पुनर्खरीद करने, लाभांश को 12 फीसदी बढ़ाने और परिचालन मार्जिन को 2020 तक 20 फीसदी (पिछले साल 16.4 फीसदी) करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
यूनिलीवर की भारतीय सहायक इकाई हिंदुस्तान यूनिलीवर ने जून 2017 में समाप्त तिमाही के दौरान अपनी लागत में कटौती करने और परिचालन मार्जिन में 170 से 180 आधार अंकों की वृद्धि दर्ज की। जबकि प्रॉक्टर ऐंड गैम्बल ने 16 से 10 उत्पाद श्रेणियों की ओर रुख किया। भारत के लिहाज से इसका मतलब है कि कंपनी डिटरजेंट, शैंपू, पर्सनल केयर और मेल ग्रूमिंग जैसी श्रेणियों पर अधिक ध्यान देते हुए टूथपेस्ट, बैटरी, आफ्टरशेव लोशन और एयर प्यूरिफायर जैसे कारोबार से दूर होने की रणनीति पर चल रही है।
Keyword: company, मोंडेलेज,
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