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स्टेट बैंक के फैसले को वित्त मंत्री ने बताया सही

वीणा मणि / नई दिल्ली August 03, 2017

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज भारतीय स्टेट बैंक द्वारा एक करोड़ रुपये से कम राशि वाले बचत खाते पर ब्याज दरों में कटौती किए जाने के फैसले को सही बताया और कहा कि यह फैसला उधारी दर कम किए जाने और महंगाई कम होने के हिसाब से है। स्टेट बैंक के फैसले के एक दिन बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों में 25 आधार अंक की कटौती की थी। उन्होंने कहा कि ब्याज दरें धीरे धीरे तार्किक हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि जब महंगाई दर 10 प्रतिशत के स्तर पर था तो जमा दरें 9 प्रतिशत थीं। लेकिन बैंक 14-15 प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज देते थे और इतनी ज्यादा ब्याज दरों पर वैश्विक औद्योगिक निवेश नहीं आते। लोकसभा में बैंकिंग नियमन (संशोधन) विधेयक पर चर्चा करते हुए जेटली ने कहा कि 14-15 प्रतिशत की ब्याज दर भारत को वैश्विक बाजार में अप्रतिस्पर्धी बना देगी और उद्योग जगत इतनी ज्यादा ब्याज दरों पर निवेश नहीं कर सकता। 
 
इसके पहले शून्य काल में राज्यसभा में जेटली ने कहा कि बचत खाते और सावधि जमा पर उच्च ब्याज दर उस समय थी, जब महंगाई दर 10-11 प्रतिशत थी और अर्थव्यवस्था में मंदी की स्थिति थी। अब जब उधारी दर नीचे आ रही है तो बचत खाते पर ब्याज भी घट रहा है। भारतीय स्टेट बैंक ने एक करोड़ रुपये से कम जमा पर ब्याज दर 4 प्रतिशत से घटाकर 3.5 प्रतिशत कर दिया है। सामाजिक सुरक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के हितोंं की रक्षा के लिए सरकार ने पहले ही जमा योजनाएं पेश की है, जिन पर 8 प्रतिशत ब्याज की गारंटी दी गई है। 
 
उन्होंने कहा कि प्रभावी दर 8.3 प्रतिशत आती है, क्योंकि इसका प्रबंधन एलआईसी कर रहा है। सुस्त अर्थïव्यवस्था और नौकरियां जाने पर चर्चा की विपक्ष की मांग पर उन्होंने कहा कि अगर हर रोज 11 बजे से 6 बजे तक संसद की कार्रवाई चलने दी जाए तो विपक्ष की हर मांग पर चर्चा हो सकती है।  जेटली ने स्पष्ट किया कि बैंकों में गैर निष्पादित संपत्तियोंं (एनपीए) के मामले पुराने हैं और आरबीआई ने ऐसे बड़े 12 मामलों को लिया है जिन्हें वे डूबत ऋण मानते हैं। जेटली ने साथ ही कहा कि सरकार चिटफंड कंपनियों के नियमन के संबंध में एक केंद्रीय कानून भी लाने जा रही है। 
 
वित्त मंत्री ने लोकसभा में कहा कि इन एनपीए के साथ जूझना राजनीतिक विषय नहीं है। स्वभाविक है कि ये (एनपीए) 2014 से पहले के हैं। ये साल 2008-09 से 2012- 13 तक बढ़े जा रहे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि 2008-09 में जिंसों का मूल्य गिर जाएगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी आ जाएगी। वैश्विक मंदी का इस्पात पर भी असर पड़ा। चीन से इस्पात आयात हो रहा था। हमने इस स्थिति को ठीक करने की पहल की और कई तरह की बचावकारी ड्यूटी और एंडी डंपिंग ड्यूटी लगाई। बिजली के क्षेत्र में भी चुनौती थी। राज्यों ने सस्ते दर पर बिजली बेची जिससे उनका वित्तीय भार बढ़ गया। अतिरिक्त बिजली के खरीदार नहीं मिल रहे थे। हमने उदय योजना बनाई। राज्यों के सरकारी डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनियां) का हल ढूंढने का प्रयास किया।  वित्त मंत्री ने कहा, 'जो अब बढ़ रहा है, वह सिर्फ ब्याज बढ़ रहा है। यह कोई नया कर्ज नहीं है। इसका हल करने का तरीका ढूंढना है।' बैंकिंग नियमन अधिनियम के संशोधनों को लोकसभा में पारित कर दिया गया है और अब उसे संसद के उच्च सदन में भेजा जाएगा। 
 
जीएसटी : सुधार के प्रयास जारी रहेंगे
 
जेटली ने लोकसभा में कहा कि सरकार जीएसटी कानून के लागू होने के बाद इसकी खामियों में सुधार के प्रयास जारी रखेगी और सर्वाेत्तम स्तर तक पहुंचने तक सुधार का यह सिलसिला बना रहेगा। जेटली ने साथ ही लोकसभा में कुछ सदस्यों की इन चिंताओं को निराधार बताया कि राज्य सरकारों को करों के संबंध में केंद्र सरकार के अधिकार जीएसटी के तहत स्थानांतरित किए जाने से उनका दुरुपयोग होगा और जनता पर मनमाने तरीके से कर लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें भी जनता के प्रति जवाबदेह हैं। वित्त मंत्री ने पंजाब नगर निगम विधि (चंडीगढ़ पर विस्तार) संशोधन विधेयक 2017 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही। यह विधेयक अध्यादेश के स्थान पर लाया गया। 
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