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पहली छमाही में सोने की मांग 30 फीसदी बढ़ी

दिलीप कुमार झा / मुंबई August 03, 2017

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने की चिंताओं के बीच ग्राहकों ने अप्रैल-जून तिमाही के अंत में सोने की भारी खरीदारी की, जिससे चालू कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही के दौरान देश में इस पीली धातु की मांग 30 फीसदी बढ़ी है। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) के आंकड़े दर्शाते हैं कि इस साल जनवरी से जून तक की अवधि में भारत में सोने की मांग बढ़कर 298.4 टन रही, जो पिछले साल की इसी अवधि में 229.4 टन थी। चालू कैलेंडर वर्ष की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च के दौरान बिक्री महज 131 टन रही, लेकिन अप्रैल से जून तिमाही में उपभोक्ताओं का रुझान सुधरा और कुल बिक्री बढ़कर 167.4 टन रही। देश में सोने की मांग डॉलर और रुपये के लिहाज से भी करीब 30 फीसदी बढ़ी है। जीएसटी लागू होने से सोने के पूरे कारोबार में पारदर्शिता आने और इस बार सामान्य मॉनसून रहने के पूर्वानुमानों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिति अच्छे रहने से दूसरी छमाही में सोने की मांग अच्छी रहने के आसार हैं। मुंबई में आज चालू कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही में सोने की मांग के रुझान जारी करते हुए डब्ल्यूजीसी के प्रबंध निदेशक (भारत) सोमसुंदरम पीआर ने कहा, 'समष्टि आर्थिक कारक सकारात्मक हैं। हमारा अनुमान है कि  पूरे साल के दौरान सोने की मांग 650 से 750 टन के बीच रहेगी। पहली छमाही में 298.4 टन की बिक्री के बाद हमारा अनुमान है कि आखिरी छह महीनों में मांग ज्यादा से ज्यादा 450 टन और कम से कम 350 टन रह सकती है।' 
 
दूसरी छमाही में घटेगा सोने का आयात 
 
विश्व स्वर्ण परिषद ने कहा है कि भारत में सोने का आयात चालू कैलेंडर वर्ष की दूसरी छमाही में पहले छह महीनों की तुलना में घटने के आसार हैं। इसकी वजह यह है कि एक जुलाई से नई कर प्रणाली लागू होने से पहले सराफों ने स्टॉक कर लिया था। ऐसे देश में, जहां निवेश से लेकर शादी के उपहारों के रूप में सोना इस्तेमाल किया जाता है, वहां सोने की मांग घटने से वैश्विक कीमतों में तेजी पर अंकुश लग सकता है। इस समय सोने की वैश्विक कीमतें करीब 7 सप्ताह के अपने उच्च स्तर पर बनी हुई हैं। 
 
सोमसुंदरम पी आर ने कहा, 'निश्चित रूप से ज्यादा करों के आसार की वजह से दूसरी छमाही में होने वाले आयात का जून तिमाही में ही आयात किया गया है।' जुलाई में नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली लागू होने से सोने पर वस्तु एवं सेवा कर 3 फीसदी हो गया है, जो पहले 1.2 फीसदी था। सराफों को बैंकों से सोना खरीदते समय यह कर चुकाना होगा, जबकि उनके खरीदार खरीदारी करते समय कर चुकाएंगे। सोने की खपत के लिहाज से  भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। सोमसुंदरम ने कहा कि इस साल भारत में सोने की तस्करी पिछले साल के 120 टन के मुकाबले बढऩे के आसार हैं। इसकी वजह यह है कि कर में बढ़ोतरी से 'ग्रे मार्केट' में धंधा करने वालों का मार्जिन बढा है। विश्व स्वर्ण परिषद ने कहा कि सोने का अवैध आयात या तस्करी आगे भी जारी रहेगी क्योंकि तस्करों को 13 फीसदी कर (10 फीसदी सीमा शुल्क और 3 फीसदी जीएसटी) का फायदा मिलता है। चालू कैलेंडर वर्ष में तस्करी से 100 से 120 टन सोना बाजार में आने का अनुमान है, जो पिछले साल 119 टन था। 
 
निकट भविष्य में सोने की निवेश मांग तेजी से बढ़ेगी 
 
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से सराफा कारोबार में पारदर्शिता बढ़ी है, जिससे आने वाले वर्षों में देश में सोने की कुल मांग में निवेश उत्पादों (कागजी सोना, सिल्ली और सिक्कों सहित) का हिस्सा बढ़कर 33 फीसदी पर पहुंच सकता है।  इस समय देश में सोने की कुल मांग में निवेश उत्पादों का हिस्सा 22 फीसदी है। विश्व स्वर्ण परिषद की रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि भारत में सोने (सिल्ली और सिक्के) की निवेश मांग कैलेंडर वर्ष 2017 की जनवरी से जून अवधि में 72.7 टन रही, जो पिछले साल की इसी अवधि में 59.8 टन थी। चालू कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही के दौरान देश में सोने की कुल मांग में निवेश मांग का हिस्सा करीब 24 फीसदी रहा है। पिछले साल की इसी अवधि में सोने में निवेश माग 59.8 टन रही थी, जो 2016 में जनवरी से जून तक की कुल मांग का 26 फीसदी थी। जून में समाप्त तिमाही में कुल निवेश मांग 40.7 टन रही, जो 167.4 टन की कुल मांग का 24 फीसदी है। देश में सोने की कुल मांग में शेष हिस्सा आभूषणों की मांग का होता है। 
 
सोमसुंदरम पीआर ने कहा, 'इस समय खरीदार जंजीर, अंगूठी के रूप में सोना खरीदते हैं और इन्हें मूल्यवान संपत्ति के रूप में संग्रहित कर रखते हैं। लेकिन जीएसटी लागूू होने से सराफा कारोबार में पारदर्शिता आने से सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड, सिल्ली और सिक्के जैसे उत्पादों की मांग बढऩे की संभावना है और हमारा अनुमान है कि इनकी मांग निकट भविष्य में 33 फीसदी पर पहुंच सकती है।' 
Keyword: gold,सराफा बाजार, आभूषण,
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