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बिक्री बढ़ी तो बजाज ऑटो की गति भी बढ़ेगी

राम प्रसाद साहू /  August 02, 2017

बजाज ऑटो के जून तिमाही के नतीजे अनुमान की तुलना में कमजोर रहे। खासकर परिचालन मुनाफा मार्जिन के स्तर पर इसमें सुस्ती दर्ज की गई क्योंकि बिक्री वृद्घि कम रहने और अधिक लागत से कंपनी का संपूर्ण प्रदर्शन प्रभावित हुआ। असल में बाजार इसे पिछले तीन-चार महीने के दौरान एकबारगी घटनाक्रम के रूप में देख रहा है। आगामी तिमाहियों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है और उसे अच्छे निर्यात से भी मदद मिल सकती है।

 
घरेलू बिक्री कमजोर
 
बीएस-4 उत्सर्जन मानकों के साथ साथ वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की वजह से घरेलू बिक्री में 23 फीसदी की गिरावट आई। इस दौरान कंपनी की कुल बिक्री एक साल पहले की तुलना में लगभग 11 फीसदी घटकर 8,88,000 वाहन रह गई। इससे राजस्व प्रभावित हुआ। सालाना आधार पर राजस्व पांच फीसदी घटकर 5,442 करोड़ रुपये रहा, लेकिन यह खासकर निर्यात और मजबूत आय के कारण उम्मीद से बेहतर रहा। बेहतर मॉडल मिक्स और बीएस-4 मोटरसाइकिलों की कीमत बढऩे से प्राप्तियों में सुधार (6 प्रतिशत तक) देखा गया और इससे कंपनी को राजस्व पर दबाव से कुछ हद तक निपटने में मदद मिली। हालांकि कच्चे माल की लागत और उत्पाद शुल्क में वृद्घि (पंतनगर इकाई पर कर लाभ खत्म होना) से परिचालन मुनाफे में 20 फीसदी की गिरावट आई। परिचालन मुनाफा मार्जिन सालाना आधार पर 3.24 फीसदी घटकर 17.2 फीसदी रह गया। यह 9 तिमाहियों में समेकित स्तर पर सबसे कम है। कमजोर परिचालन प्रदर्शन से कंपनी का शुद्घ लाभ सालाना आधार पर 19.5 फीसदी गिरकर 837 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि इस गिरावट को अन्य आय में मजबूती ने रोका। कंपनी की अन्य आय में 21 फीसदी तक का इजाफा दर्ज किया गया। 
 
जीएसटी की चुनौती से निपटने के लिए कंपनी को डीलरों को 32 करोड़ रुपये तक की भरपाई करनी पड़ी है क्योंकि स्थानीय कर खत्म होने से डीलरों को नुकसान हो रहा था। कंपनी को मार्च तिमाही में प्रतिस्पर्धा के दबाव का सामना करना पड़ा क्योंकि उसके कम कीमत वाले बीएस-3 वाहनों की बिक्री बीएस-4 अनुकूल वाहनों की तुलना में काफी अधिक थी। मार्च तिमाही में वाहन क्षेत्र में कुल कारोबार में तेजी आई। इसका असर यह हुआ कि जून तिमाही के पहले दो महीनों के दौरान मांग धीमी बनी रही। इससे समूचे उद्योग के कुल कारोबार पर असर पड़ा। बजाज ऑटो की घरेलू मोटरसाइकिल बाजार भागीदारी वित्त वर्ष 2017 में 18 फीसदी थी जो घटकर जून के अंत में लगभग 14 फीसदी रह गई। कंपनी का कहना है कि फिर से स्टॉक बढ़ाने, नए मॉडल निकालने और बिक्री प्रोत्साहन से उसे सितंबर तिमाही में मदद मिलनी चाहिए। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषकों को उम्मीद है कि ग्रामीण मांग में सुधार, पल्सर/ केटीएम के नए वैरिएंट और डोमिनर 400 जैसी प्रीमियम मोटरसाइकिलों की बढ़ती लोकप्रियता से बिक्री में तेजी आएगी।
 
निर्यात से मदद
 
कंपनी के कारोबार को निर्यात बढऩे से भी मदद मिली है। कंपनी को कच्चे तेल पर निर्भर देशों की कमजोर मांग के कारण दबाव का सामना करना पड़ा है। लिहाजा, उसने निर्यात में विविधता पर जोर दिया है। नाइजीरिया तथा श्रीलंका जैसे देशों पर कम ध्यान देकर वह पोलैंड, मलेशिया तथा लैटिन अमेरिका जैसेे बाजारों पर जोर दे रही है। इन क्षेत्रों से निर्यात (कुल बिक्री का 46 फीसदी) वृद्घि में मदद मिलने की उम्मीद है। मजबूत रुपये के बावजूद कंपनी अपना निर्यात मार्जिन बनाए रखने में सफल रही है। निर्यात में उसकी महंगी बाइक का हिस्सा बढ़ा है।
 
वाणिज्यिक पर ध्यान
 
वाणिज्यिक वाहन (सीवी) के मोर्चे पर सकारात्मक बदलाव दिख सकते हैं। कारण कि महाराष्ट्र में नए परमिट से जुड़े प्रतिबंध समाप्त हो गए हैं और दिल्ली में नए परमिट जारी किए जा रहे हैं। हालांकि घरेलू बिक्री में वाणिज्यिक वाहनों का योगदान महज 11 फीसदी है, लेकिन इनमें मोटरसाइकिलों की तुलना में ज्यादा मार्जिन है। प्रबंधन को उम्मीद है कि इस मोर्चे पर कारोबार में किसी तरह का सुधार आया तो कुल प्राप्तियों और मार्जिन में सुधार होगा। कुल मिलाकर, यदि बिक्री में फिर से तेजी आती है (जैसा कि प्रबंधन कहता है) तो इस शेयर में तेजी आ सकती है। 
Keyword: bajaj auto, bike,,
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