बिजनेस स्टैंडर्ड - डेवलपरों को और कटौती की आस
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डेवलपरों को और कटौती की आस

राघवेंद्र कामत / मुंबई August 02, 2017

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रीपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती किए जाने से प्रॉपर्टी डेवलपरों के बीच उत्साह दिख रहा है लेकिन उनका कहना है कि इस क्षेत्र की मदद के लिए केंद्रीय बैंक कहीं अधिक पहल कर सकता है। नरमी के अलावा डेवलपर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़ी समस्याओं का भी सामना कर रहे हैं जिससे महंगे अपार्टमेंट की बिक्री को झटका लगा है और अनुपालन के लिहाज से रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम यानी रेरा के प्रावधान काफी सख्त हैं।
 
डेवलपर फिलहाल रेरा प्रावधानों के अनुपालन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जिससे बिक्री और नई परियोजनाओं की रफ्तार भी सुस्त पड़ गई है। हीरानंदानी कम्युनिटीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक निरंजन हीरानंदानी ने कहा, 'हालांकि यह मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) को तय करना है लेकिन भारत में कारोबार और उद्योग की मौजूदा परिदृश्य के मद्देनजर आरबीआई द्वारा दरों में कटौती के लिए यह अनुकूल समय है क्योंकि मुद्रास्फीति के औसत स्तर पर बरकरार रहने के आसार हैं।'
 
हीरानंदानी ने कहा कि 50 आधार अंकों की कटौती स्वागतयोग्य होता लेकिन लगातार चार समीक्षा दरों में स्थिरता के बाद 25 आधार अंकों की कटौती भी स्वागतयोग्य कदम है। आरबीआई के गवर्नर ऊर्जित पटेल ने मौद्रिक समिति से कहा कि निजी निवेश को पुनर्जीवित करना, बुनियादी ढांचा संबंधी बाधाओं को दूर करना और प्रधानमंत्री आवास योजना में लोगों की दिलचस्पी बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा, 'यह राज्यों द्वारा परियोजनाओं को दी जाने वाली मंजूरियों में तेजी पर निर्भर करेगा।' सस्ती आवासीय परियोजनाओं में निवेश करने वाली कंपनी ब्रिक ईगल के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी राजेश कृष्णन ने कहा कि 25 आधार अंकों की कटौती से सस्ते आवासीय क्षेत्र को कोई खास फायदा नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'बुनियादी ढांचा का दर्जा मिलने के बावजूद बैंक सस्ती आवासीय परियोजनाओं को पर्याप्त ऋण नहीं दे रहे हैं और इसलिए इस क्षेत्र को हमेशा पूंजी की कमी जैसी समस्या से जूझना पड़ता है। हमारा मानना है कि इसमें बदलाव तभी आएगा जब सस्ती आवासीय परियोजनाओं को ऋण के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल किया जाएगा।'
 
टाटा हाउसिंग डेवलपमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ ब्रोटिन बनर्जी ने कहा कि दरोंं में कटौती के साथ-साथ उधारकर्ताओं के लिए उपयुक्त लाभ से आवास ऋण दरों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और उपभोक्ता धारणा मजबूत होगी। के रहेजा कॉर्प के प्रबंध निदेशक (वाणिज्यिक रियल एस्टेट एवं रीट) विनोद रोहिरा ने कहा, 'हालिया सुधारों और नीतियों में बदलाव के मद्देनजर इस कटौती से ग्राहक धारणा में सुधार होगा। हमें उम्मीद है कि बैंक इस कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक भी पहुंचाएंगे जिससे इस उद्योग की वृद्धि को रफ्तार मिलेगी।'
 
एमसीएलआर व्यवस्था की होगी समीक्षा
 
उधारी दर घटाने के लिए बैंकों की तरफ से पर्याप्त कदम नहीं उठाने पर नाखुशी जताते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि आंतरिक समूह इस व्यवस्था की समीक्षा करेगा। आरबीआई बैंक की उधारी दर को बाजार से तय होने वाले बेंचमार्क से सीधे जोडऩे के तरीके की खोज भी करेगा। हालांकि फंड आधारित उधारी दर (एमसीएलआर) की सीमांत लागत की व्यवस्था आधार दर की व्यवस्था के मुकाबले सुधार प्रदर्शित करता है, लेकिन बैंकों की तरफ से उधारी में नरमी के लिए उठाए गए कदम असंतोषजनक हैं। आरबीआई ने एक बयान में यह जानकारी दी। एमसीएलआर व्यवस्था का शुभारंभ अप्रैल 2016 में हुआ था और यह नीतिगत दरोंं में कटौती का फायदा आगे ले जाने के लिए हुआ था। आंतरिक बेंचमार्क उधारी दर एमसीएलआर को हर महीने संशोधित करना होता है।
Keyword: bank, repo rate, RBI, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई),
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