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समय पर आयकर रिटर्न के कई फायदे

संजय कुमार सिंह /  08 01, 2017

5 अगस्त तक रिटर्न भरने वाले ही अपने रिटर्न में संशोधन कर पाएंगे, घाटे को भविष्य में होने वाली आमदनी से समायोजित कर सकेंगे और जिस कर का भुगतान नहीं हुआ है
उसके ब्याज से बच सकेंगे

नेट बैंकिंग के जरिये कैसे करें ई-सत्यापन

  • अपने नेटबैंकिंग खाते को खोलें
  • आयकर ई-फाइलिंग टैब पर जाएं
  • इससे आप आयकर विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर पहुंच जाएंगे
  • 'व्यू रिटर्न/फॉर्म्स पर क्लिक करें'
  • 'ई-सत्यापन के लिए लंबित रिटर्न देखने के लिए यहां क्लिक करें' को सलेक्ट करें
  • ई-सत्यापन के विकल्प पर क्लिक करें
  • एक नई विंडो खुलेगी। 'कॉन्टिन्यू' पर क्लिक करें
  • ट्रांजेक्शन आईडी और ईवीसी के साथ एक मैसेज दिखेगा
  • अटैचमेंट को डाउनलोड करने के लिए हरे बटन पर क्लिक करें

आयकर विभाग ने टैक्स रिटर्न भरने की अंतिम तिथि शनिवार तक बढ़ाने का फैसला किया है। अगर आपने अभी अपना रिटर्न नहीं भरा है तो इस मोहलत का फायदा उठाएं क्योंकि समय पर रिटर्न भरने के कई फायदे हैं। इसका एक अहम फायदा यह है कि आप संशोधित रिटर्न भरकर कोई ब्योरा छूटने या कटौती का दावा न करने जैसी अपनी कुछ गलतियों को सुधार सकते हैं। अगर आप अंतिम तिथि निकलने के बाद रिटर्न भरेंगे तो आप अपने रिटर्न में संशोधन नहीं कर सकेंगे। दूसरा अगर आपने देरी से अपना रिटर्न भरा तो आप अपने घाटे को भविष्य में समायोजित करने का फायदा नहीं ले पाएंगे। 

आरएसएम एस्ट्यूट कंसल्टिंग ग्रुप के संस्थापक सुरेश सुराणा कहते हैं, 'हालांकि समय पर रिटर्न भरने की शर्त उन मामलों में लागू नहीं होती है, जिनमें नुकसान आवास संपत्ति से आय' पर होता है। धारा 139(1) के तहत ऐसे नुकसान को अंतिम तिथि के बाद भी रिटर्न भरने पर भी कैरी फारवर्ड किया जा सकता है। समय पर रिटर्न भरकर आप धारा 234ए के तहत वसूले जाने वाले ब्याज से भी बच सकते हैं। गौरतलब है कि देरी से रिटर्न भरने पर 1 फीसदी प्रतिमाह की दर से ब्याज लगता है। हालांकि यह ब्याज उन मामलों में लागू नहीं होता है, जिनमें स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) या अग्रिम कर के जरिये पहले ही ब्याज देनदारी चुका दी गई है।

देरी से रिटर्न भरने से आपको तुरंत रिफंड का भी फायदा नहीं मिलता है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक 2016-17 में रिटर्न भरने के बाद 30 दिन में 67 फीसदी और 60 दिनों में 90 फीसदी रिफंड जारी कर दिए गए थे। सुराणा कहते हैं, 'किसी भी समझदार करदाता को अंतिम तिथि से पहले रिटर्न भरना चाहिए ताकि इसकी जल्द प्रक्रिया शुरू हो और जल्द रिफंड मिले।'

आखिर में आपको कर रिफंड पर ब्याज का भी नुकसान होता है क्योंकि इसकी गणना रिटर्न भरने की तारीख से की जाती है। क्लियरटैक्स के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी अर्चित गुप्ता ने कहा, 'अग्रिम कर और टीडीएस के कर रिफंड पर ब्याज की गणना 1 अप्रैल से होती है और अगर आपने देरी से रिटर्न भरा तो आपको ब्याज का नुकसान होगा।'  इसके बाद हम आपके रिटर्न के सत्यापन की प्रक्रिया पर नजर डालते हैं। गुप्ता कहते हैं, 'आयकर रिटर्न को तब तक वैध नहीं माना जाता, जब तक वे सत्यापित नहीं होते हैं।' रिटर्न अपलोड करने के 120 दिनों के भीतर सत्यापन पूरा होना चाहिए। 

करदाता डिजिटल रूप में हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र (डीएससी) का इस्तेमाल करके अपने रिटर्न का सत्यापन कर सकते हैं। जिन लोगों के पास डीएससी नहीं है, वे नेट बैंकिंग, आधार ओटीपी, आयकर विभाग की वेबसाइट पर ईवीसी (इलेक्ट्रॉनिक वैरिफिकेशन कोड) और डीमैट या बैंक खाते के जरिये ई-सत्यापन कर सकते हैं। एक और विकल्प भौतिक सत्यापन है। आधार के जरिये ई-सत्यापन के लिए आपके आधार नंबर और पैन कार्ड का लिंक होना जरूरी है। इसके लिए आप आयकर विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर जा सकते हैं।

आपका आईटीआर अपलोड होने के बाद इस विकल्प को चुनें- 'मैं मेरे रिटर्न के ई-सत्यापन के लिए आधार ओटीपी सृजित करना चाहता हूं।' इसके बाद आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाता है, जो 10 मिनट के लिए वैध होता है। इस ओटीपी को प्रविष्ट करें और सबमिट बटन पर क्लिक करें। आपको रिटर्न के सफलतापूर्वक ई-सत्यापित होने का मैसेज मिलेगा। इसके बाद आप एकनोलेजमेंट को डाउनलोड करें। 

ईवीसी 10 अंकों का अक्षरों एवं अंकों से मिलकर बना कोड होता है, जिसे ई-फाइलिंग पोर्टल पर सृजित किया जा सकता है और यह 72 घंटों तक वैध होता है। बैंक खाते या डीमैट खाते के जरिये ईवीसी सृजित करने के लिए इन खातों का पहले वैध होना जरूरी है। अंत में आईटीआर-5 फॉर्म को डाउनलोड करें। इसका प्रिंट लें, नीली स्याही से हस्ताक्षर करें और इसे साधारण डाक या स्पीड पोस्ट से (कूरियर से नहीं) बेंगलूरु में सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी) के पते पर भेज दें। सीपीसी को यह दस्तावेज मिलने के बाद आपको एसएमएस या ईमेल के जरिये प्राप्ति की सूचना मिलेगी।
Keyword: आमदनी, नेट बैंकिंग, ई-सत्यापन, आयकर, ई-फाइलिंग, टैक्स रिटर्न, आवास, संपत्ति, टीडीएस,
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