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जीएसटी की पैरवी: लोगों की चिंताओं पर कैसी रही सरकार की प्रतिक्रिया

इंदिवजल धस्माना /  July 30, 2017

देश में जन-जन तक वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का संदेश पहुंचाने के लिए सरकार फिलहाल अभिनेता अमिताभ बच्चन की अपील पर ही भरोसा कर रही है। हालांकि जब कर ढांचे को स्पष्टï करने अथवा उभरते मुद्दों के समाधान की बात आई तो सरकार ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली, राजस्व सचिव हसमुख अढिया, केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) की चेयरपर्सन वनजा एन सरना और जीएसटी नेटवर्क के चेयरमैन नवीन कुमार को आगे कर दिया।

 
इन सब प्रयासों के अलावा मंत्रिमंडल में जेटली के सहयोगियों- पीयूष गोयल, सुरेश प्रभु, स्मृति इरानी, नितिन गडकरी, जयंत सिन्हा और निर्मला सीतारामण- को भी विभिन्न हितधारकों के बीच नई कर व्यवस्था के बारे में आशंकाओं को दूर करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। जीएसटीएन पर पंजीकरण करते समय, इनवॉइस तैयार करते समय और इनपुट टैक्स क्रेडिट लेते समय लघु एवं मझोल उममियों, व्यापारियों और डीलरों की चुनौतियों का समाधान करना सरकार के लिए सबसे बड़ी समस्या थी क्योंकि इससे उनके बीच जीएसटी को लेकर तमाम आशंकाएं पैदा हो रही थीं। उद्योग केंद्रित शिकायतों के अलावा कारोबारियों के बीच ऐंटी-प्रॉफिटीयरिंग प्रावधानों को लेकर भी स्पष्टïता का अभाव है। 
 
विभिन्न मुद्दों पर सरकार की जीएसटी टीम की तत्परता के उदाहरण: जब लोगों में यह चर्चा होने लगी कि जीएसटी कर व्यवस्था के तहत सिगरेट की लागत कम हो जाएगी अथवा उसके विनिर्माताओं का मार्जिन पुरानी कर व्यवस्था के मुकाबले कहीं अधिक बढ़ जाएगा तो जेटली ने इस मुद्दे को निपटाने के लिए तत्काल जीएसटी परिषद की बैठक बुलाई। समय के अभाव में यह बैठक वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये संपन्न हुई जिसमें सिगरेट पर निर्धारित उपकर में इजाफा का करने का निर्णय लिया गया।
 
इसी प्रकार जब रिटर्न अपलोड करने की 'बोझिल' प्रक्रिया की बात सामने आई तो नई कर व्यवस्था को लेकर एसएमई की चिंता बढ़ गई। ऐसे में अढिया ने राष्टï्रीय टेलीविजन के जरिये इन मुद्दों को स्पष्टï किया और उनसे जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया। इसके लिए उन्होंने खास तौर पर ट्ïिवटर हैंडल- जीएसटी ऐट द रेट जीओआई- शुरू किया ताकि हितधारकों की प्रक्रिया ली जा सके और उनकी चिंताओं को स्पष्टï किया जा सके। उन्होंने कई भ्रांतियों को दूर किया जैसे: इनवॉइस तैयार करने के लिए कंप्यूटर और इंटरनेट सुविधा की जरूरत, अथवा जीएसटी के तहत पंजीकृत हरेक कारोबारी के लिए महीने में तीन बार रिटर्न भरने की आवश्यकता आदि। उन्होंने स्पष्टï किया कि इनवॉइस को मैनुअली भी तैयार किया जा सकता है और केवल एक ही रिटर्न भरने की जरूरत है जो तीन भागों में है।
 
नवीन कुमार ने जीएसटी पोर्टल पर पंजीकरण करने के तरीके की जानकारी दी ताकि किसी भी समस्या से बचा जा सके। उन्होंने इस आशंका को दूर किया कि सूचनाओं की अधिकता के कारण जीएसटी पोर्टल ठप हो सकता है। उन्होंने एक बातचीत में कहा, 'जीएसटी पोर्टल डाउन नहींं है। यह सही है और ठीक तरीके से काम कर रहा है। मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि 25 जून को चालू होने के बाद यह एक बार भी ठप नहीं हुआ है।' उन्होंने स्पष्टï किया कि सॉफ्टवेयर को उन्नत करने और रखरखाव के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को कुछ समय के लिए रोकने की जरूरत पड़ सकती है। उन्होंने कहा, 'वेबसाइट पर बकायदा नोटिस जारी करने के बाद इसे केवल रात में किया जाएगा।'
 
अढिया ने जीएसटी मास्टर की क्लास के जरिये कर अधिकारियों और वरिष्ठï आईटी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की। इसके तहत देश भर से पूछे गए सवालों का हिंदी और अंग्रेजी में जवाब दिया गया। इसके तहत कंपोजिशन स्कीम, अंतरराज्यीय आपूर्ति, वस्तुओं की अंतरराज्यीय आवाजाही के लिए छूट, हरेक राज्य के लिए अलग-अलग रिटर्न फाइल करने की आवश्यकता, बिलों पर कंपोजिशन स्कीम का उल्लेख, परिवारों द्वारा पुराने आभूषणों की बिक्री पर कर, बाहर जाकर खाना खाने की महंगाई आदि पर लोगों सवालों का जवाब दिया गया। उन्होंने धैर्यपूर्वक कई मुद्दों को स्पष्टï किया।
 
सूरत में जब कपड़ा कारोबारी जीएसटी ढांचे के खिलाफ हड़ताल पर चले गए तो सीबीईसी सहित राजस्व विभाग ने एक स्पष्टïीकरण जारी किया कि परिधान पर लगाए गए 5 फीसदी दर को क्यों शून्य तक लाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्टï किया कि इससे इस श्रेणी में इनपुट क्रेडिट को नुकसान पहुंच सकता था। सरना ने स्पष्टï तौर पर कहा है कि दरों में विसंगति अथवा उसे अनुचित न ठहराए जाने तक फिलहाल कोई संशोधन नहीं किया जाएगा। लेकिन उन्होंने कपड़ा क्षेत्र की कुछ मांग को समायोजित करने की भी कोशिश की।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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