बिजनेस स्टैंडर्ड - प्रोत्साहन से कपड़ा क्षेत्र को मामूली मदद
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, October 20, 2017 03:56 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम अर्थव्यवस्था खबर

प्रोत्साहन से कपड़ा क्षेत्र को मामूली मदद

टी ई नरसिम्हन और विनय उमरजी /  July 30, 2017

कपड़ा उद्योग, विशेष रूप से पावर लूम खंड को मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण से मुश्किल से ही कोई राहत मिली है कि केवल 20 लाख रुपये या उससे अधिक सालाना कारोबार वाले जॉब वर्कर (ठेके पर काम करने वाले) या इकाइयों को ही वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिए पंजीकरण करना होगा। एक जुलाई को यह नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली लागू होने के बाद से ही कपड़ा क्षेत्र यह मांग कर रहा है कि उसके लिए दरें एवं नियम आसान बनाए जाएं। 

 
हाल की अपनी अधिसूचना में कपड़ा मंत्रालय ने न केवल जॉब वर्कर्स के लिए नियम आसान बनाए हैं बल्कि उन मास्टर बुनकरों के खिलाफ कार्रवाई की भी चेतावनी भी दी है, जो छोटी जॉब यूनिटों को खुद जीएसटी के लिए पंजीकृत होने को बाध्य करते हैं। जॉब वर्कर्स की तरफ से मंत्रालय को विभिन्न नोटिस और पत्र मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है। कपड़ा मंत्रालय में उप निदेशक और कार्यालय प्रभारी जे एल बालाकुमार ने कहा कि छोटे जॉब वर्कर और जॉब वर्किंग के लिए जीएसटी पंजीकरण जरूरी नहीं है क्योंकि जीएसटी के तहत 20 लाख रुपये तक के कारोबार को छूट दी गई है।
 
हालांकि अधिसूचना से यह क्षेत्र खुश नहीं हैं। पावर लूम और जॉब वर्कर्स के मुताबिक उद्योग जीएसटी से डेढ़ साल छूट दिए जाने की मांग कर रहा था, इसलिए यह मामूली राहत है। सूरत में पंडेसारा वीवर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष गुजराती ने कहा, 'ऐसे बहुत से छोटे जॉब वर्कर हैं, जिनका सालाना कारोबार 20 लाख रुपये से कम है और जिनकी पावल लूम उद्योग विशेष रूप से मास्टर बुनकरों को सेवाएं लेनी पड़ती हैं। उन्हें जीएसटी पंजीकरण से छूट मिलने से मास्टर बुनकर रिवर्स चार्ज प्रणाली के तहत आएंगे।'
 
दूसरे शब्दों में मास्टर बुनकरों को जॉब वर्कर की तरफ से शुल्क का भुगतान करना होगा। गुजराती ने कहा कि विकेंद्रित इकाइयां बुनाई और कढाई के काम के लिए जॉब वर्कर्स की सेवाएं लेती हैं, जिन पर 18 फीसदी जीएसटी है। पावर लूम क्षेत्र भी दोहरे झटके से बचने की कोशिश कर रहा है। बुनाई और कढाई का ज्यादातर काम महिलाएं घरों से करती हैं, लेकिन इनपुट में बिजली एवं श्रम की लागत 80 फीसदी होती है, जो जीएसटी प्रणाली में इनपुट क्रेडिट के तहत नहीं आती हैं। इससे पावर लूम मालिक सरकारी रिफंड से महरूम रह जाएंगे। गुजराती ने कहा, 'सरकार को पावर लूम क्षेत्र पर कोई कर लगाने से पहले उसे औपचारिक कर प्रणाली के तहत आने देना चाहिए था।' जॉब वर्कर का भी मानना है कि भविष्य से ज्यादा उम्मीदें नहीं हैं। 
 
पंडेसारा जीआईडीसी में 100 लूम की इकाई चलाने वाले मेहुल पटेल ने कहा कि कपड़ा मंत्रालय की अधिसूचना से ऑर्डरों की संख्या घटेगी। उन्होंने कहा, 'इससे मास्टर बुनकर ऑर्डर जारी करने से हतोत्साहित हो सकते हैं।' हालांकि कोयंबटूर डिस्ट्रिक्ट जॉब वर्किंग पावर लूम यूनिट ओनर्स एसोसिएशन के सचिव पी कुमारस्वामी ने कहा कि यह अधिसूचना एक बड़ी राहत है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में करीब 6 लाख पावरलूम इकाइयां हैं। इनमें से 80 फीसदी का सालाना कारोबार 10 से 12 लाख रुपये है। कुमारस्वामी ने कहा कि मास्टर बुनकर नए जॉब वर्क ऑर्डर नहीं दे रहे हैं क्योंकि उनमें से ज्यादातर उस स्टॉक की बिक्री नहीं कर पा रहे हैं, जिसके उचित बिल नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि अगले दो महीनों में सब कुछ सामान्य हो जाएगा। जीएसटी लंबी अवधि में पूरे तंत्र को बेहतर बनाने में मददगार होगा।'
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या स्टेशनों के पास आवासीय परिसर का विकल्प उचित कदम है?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.