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रहेंगे सावधान तो चोरी नहीं होगी आपकी पहचान

तिनेश भसीन और संजय कुमार सिंह /  July 30, 2017

डेटा चोरी होने की घटनाएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं। अगर आपका सेवा प्रदाता सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाता है तो आप बहुत कुछ तो नहीं कर सकते हैं। अलबत्ता, आप कुछ कदम उठाकर यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हैकर आपकी उन गोपनीय सूचनाओं तक नहीं पहुंच पाए जिनसे आपको वित्तीय नुकसान हो सकता है। हाल में रिलायंस जियो के ग्राहकों के व्यक्तिगत ब्योरे एक वेबसाइट पर पोस्ट किए जाने की खबरें आई थीं। इससे पहले एक हैकर ने जोमैटो के डाटाबेस से ईमेल एड्रेस और हैशड पासवर्ड चुरा लिए थे। इस साल अप्रैल में इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को एक पत्र भेजा था। इसमें कहा गया था कि लोगों की बैंक जानकारियों एवं आधार नंबर समेत गोपनीय सूचनाएं ऑनलाइन प्रकाशित हुई हैं। आगे से ऐसी घटनाएं न हों, यह सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।

 
कमजोर कानून 
 
कानून में कहा गया है कि सरकारी विभागों, सेवा प्रदाताओं और बिचौलियों को ग्राहकों की निजता और सूचनाओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाने होंगे। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन पर असीमित नुकसान के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है। उच्चतम न्यायालय के वकील और साइबर कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल कहते हैं, 'लेकिन नियम बहुत व्यापक नहीं हैं। 
 
उदाहरण के लिए कानून इस बात पर मौन है कि किसी कंपनी को कौनसे न्यूनतम सुरक्षा उपाय करने की जरूरत होगी। इस वजह से कंपनियां और सरकार आसानी से बच निकलती हैं। अगर कोई ग्राहक किसी कंपनी पर मुकदमा करना चाहे तो उसी पर यह साबित करने की जिम्मेदारी है कि इसमें कंपनी की गलती है।' विशेषज्ञों का कहना है कि कानून कंपनियों के पक्ष में झुका हुआ है, इसलिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कभी किसी ग्राहक को कोई हर्जाना नहीं दिया गया है। हालांकि इस अधिनियम को बने 17 साल हो चुके हैं और इसमें कई संशोधन भी किए जा चुके हैं। चूंकि कानून लोगों के पक्ष में नहीं हैं, इसलिए उन्हें अपनी निजता की रक्षा खुद ही करने की जरूरत है। उन्हें जरूरत पडऩे पर ही अपनी सूचनाएं देनी चाहिए, समय-समय पर पासवर्ड और पिन में बदलाव करना चाहिए और किसी वेबसाइट या डिवाइस पर कार्ड का ब्योरा सेव नहीं करना चाहिए।
 
आपका ब्योरा बेचा जाता है  
 
वित्तीय जानकारियां आमतौर पर स्कैमर्स (जालसाजों) को बेच दी जाती हैं, जो अवैध लेनदेन के लिए  कार्ड के ब्योरों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसी सूचनाओं की भी काफी मांग है, जिनसे लोगों के प्रोफाइल और व्यवहार का पता चलता है। स्कैमर व्यक्तिगत जानकारियों का इस्तेमाल आपका भरोसा जीतने और ठगने में करते हैं। माना कि आपको एक नई शुरू हुई किसी वेबसाइट से कॉल आती है। कॉलर आपको अपनी वेबसाइट पर विशेष छूट इसलिए देता है क्योंकि आपने पिछले सप्ताह अन्य रिटेलर की वेबसाइट पर 5,000 रुपये खर्च किए हैं। आप यह नहीं सोच पाते हैं कि अगर आपने उस कॉल करने वाले की वेबसाइट पर खरीदारी की तो उत्पाद की कभी आपको डिलिवरी ही नहीं होगी और आपको पूरे पैसे का नुकसान हो जाएगा।
केवल अपराधी ही आपका ब्योरा हासिल नहीं करना चाहते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, चैट ऐप और अन्य सेवा प्रदाता भी इसलिए मुफ्त सेवाएं एवं उत्पादों की पेशकश करते हैं क्योंकि वे आपकी व्यक्तिगत जानकारियां विज्ञापनदाताओं को मुहैया कराकर कमाई करते हैं। दुग्गल कहते हैं, 'स्कैमर और टेलीमार्केटर के अलावा बड़ी कंपनियां भी अवैध रूप से ब्योरे जुटाती हैं। वे इनका इस्तेमाल व्यक्ति के व्यवहार, प्रोफाइल और आदतों को समझने में करती हैं और फिर उसी के मुताबिक उत्पाद एवं सेवाएं बेचती हैं।'
 
सक्रिय रहें  
 
हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जहां स्मार्ट डिवाइस, स्मार्ट टेलीविजन, स्मार्ट लाइटिंग, स्मार्ट रेफ्रिजरेटर, स्मार्ट टीवी  जैसी सभी चीजें इंटरनेट से जुड़ी हैं और इन्न सभी को हैक किया जा सकता है। हैकर इन डिवाइसों में सेंध लगा सकता है और ब्योरा चुरा सकता है। इसलिए लोगों को बुनियादी सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाना चाहिए। ट्रेंड माइक्रो, इंडिया में तकनीक प्रमुख शारदा टिक्कू कहती हैं, 'दुनियाभर के देश उन बड़े भीषण साइबर हमलों के खतरे को लेकर सजग हो गए हैं, जो साइबर अपराधी निकट भविष्य में कर सकते हैं। जो प्रमुख देश साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं, उनमें भारत भी एक है।' 
 
जरूरी ब्योरा ही साझा करें  
 
किसी सोशल मीडिया वेबसाइट पर प्रोफाइल बनाते समय फोन नंबर, जन्म तिथि, ईमेल जैसी अपनी सभी जानकारियां साझा न करें। अगर कुछ सूचनाएं साझा करना जरूरी है तो अपनी जरूरत के मुताबिक प्राइवेसी सेटिंग्स का इस्तेमाल करें। ई-कॉमर्स कंपनी पर खरीदारी करते समय केवल इतनी ही जानकारी दीजिए, जितनी से काम चल जाए। टिक्कूू कहती हैं, 'प्लेटफॉर्म पर कार्ड या बैंक खाते का ब्योरा सेव करने से बचें। इस उपाय से यह फायदा होगा कि अगर कभी वह वेबसाइट हैक हो गई तो आपकी गोपनीय जानकारी सुरक्षित रहेगी।'
 
मजबूत पासवर्ड बनाएं 
 
अपनी जन्म तिथि या जीवन साथी के नाम के पासवर्ड बनाने से बचें। अक्षरों, संख्याओं और चिन्हों का उलट-पुलट करके मजबूत पासवर्ड बनाएं।  बेंगलूरु स्थित सेंटर फॉर इंटरनेट ऐंड सोसाइटी के पॉलिसी ऑफिसर उद्भव तिवारी कहते हैं, 'अलग-अलग वेबसाइटों के लिए अलग-अलग पासवर्ड रखें। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अगर हैकर को किसी एक साइट का पासवर्ड मिल गया तो आपके दूसरे खाते सुरक्षित रहेंगे।'
 
वेबसाइट सुरक्षित है?
 
कंप्यूटर स्क्रीन पर एकदम बायें कोने में नीचे की तरफ बंद ताले का निशान देखें। आमतौर पर 'एचटीटीपीएस' से शुरू होने वाले वेब एड्रेस सुरक्षित होते हैं और अगर आप ताले के निशान पर क्लिक करेंगे तो इसमें भी वैसा ही 'एचटीटीपीएस' लिखा दिखना चाहिए। कंप्यूटर, मोबाइल फोन और अन्य डिवाइसों पर संवेदनशील जानकारियां सेव करने से बचें। बहुत से लोग बैंक खाते की जानकारियां, कार्ड का ब्योरा और पासवर्ड अपने डिवाइस (मोबाइल या कंप्यूटर) पर सेव कर लेते हैं और अगर इनमें से एक भी डिवाइस हैक हो गई तो हैकर को आपकी सभी गोपनीय जानकारियां मिल जाती हैं। 
 
इसके अलावा अपने सभी डिवाइसों के लिए जाने-माने सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें। अपनी गोपनीय जानकारियां सभी डिवाइस पर न रखें। अपने वित्तीय सेवा प्रदाता से तत्काल अलर्ट मिलने की सेवा लें, भले ही वे इसका शुल्क वसूल करते हों। यह भी पता करें कि क्या आपका बैंक या क्रेडिट कार्ड प्रदाता लेनदेन की राशि की अधिकतम सीमा तय करने का विकल्प देते हैं।
 
अंतरराष्ट्रीय साइबर कानून और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और अधिवक्ता प्रशांत माली कहते हैं, 'अपने नाम का एक गूगल अलर्ट सृजित करें। अगर किसी बड़े हमले में आपकी जानकारियां चोरी हो जाती हैं तो आपको तत्काल इसका पता चल जाएगा।' इसके अलावा ऐसे मोबाइल ऐप के इस्तेमाल से बचें, जो बिना किसी जरूरत के आपके सेल फोन को एक्सेस करने के लिए पूछता है। उदाहरण के लिए किसी फ्लैशलाइट ऐप को आपके कॉन्टैक्ट या लोकेशन तक पहुंचने की कोई जरूरत नहीं है। तिवारी कहते हैं कि आप हैवआईबीनपॉन्ड डॉट कॉम जैसी वेबसाइट इस्तेमाल कर सकते हैं और यह पता लगा सकते हैं कि आपका ब्योरा ऑनलाइन या वेबसाइटों पर तो नहीं है। अगर ऐसा मिले तो आप जोखिम वाले अपने खातों को सुरक्षित बना सकते हैं।
 
Keyword: aadhar, data,,
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