बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी से घटेगा सोने का आयात
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जीएसटी से घटेगा सोने का आयात

राजेश भयानी / मुंबई July 28, 2017

चालू कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही में सोने का आयात 500 टन से अधिक रहा है और जून तिमाही में मांग 126 फीसदी बढ़ी है। लेकिन वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के कारण 2017 की दूसरी छमाही में सोने के आयात में भारी कमी के आसार हैं। एक अनुमान के मुताबिक आयात में यह गिरावट इस साल की जुलाई-दिसंबर अवधि में 50 फीसदी या करीब 250 टन हो सकती है। 
 
थॉमसन रॉयटर्स जीएफएमएस के स्वर्ण सर्वेक्षण : 2017 की पहली छमाही की समीक्षा एवं परिदृश्य के मुताबिक, 'पहली छमाही का आयात पहले ही पूरे वर्ष 2016 के स्तर पर पहुंच चुका है और हमारे अनुमान से दूसरी छमाही में आयात 250 टन से अधिक नहीं रहेगा।' इसका मतलब है कि इस साल की दूसरी छमाही में आयात में भारी कमी के बावजूद पूरे वर्ष में कुल आयात 758 टन रहेगा, जो वर्ष 2016 के आयात 510 टन से करीब 50 फीसदी अधिक है। 
 
दूसरी छमाही में मांग घटने के आसार की वजह यह है कि पहली छमाही में गहनों की खरीद हो चुकी है और पिछले साल अच्छे मॉनसून के कारण कृषि गतिविधियों में तेजी आई है। वर्ष 2016 में मॉनसून आने से पहले ग्रामीण खरीदार बाजार से लगभग पूरी तरह दूरी बनाए हुए थे। यह साल भी कृषि के लिए बेहतर रहने के आसार हैं, जिससे दिसंबर तिमाही में मांग आ सकती है। 
 
जीएफएमएस सर्वे के मुताबिक, 'सराफा पर 3 फीसदी और आभूषण मेकिंग चार्ज पर 5 फीसदी जीएसटी है। यह इतना अधिक नहीं है कि ग्राहक खरीदारी से दूरी बना लें। हालांकि असंगठित बाजार पर हमारे हालिया सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि यह और ज्यादा फलेगा-फूलेगा क्योंकि यह नकद आधारित कारोबार होगा और इसमें कम निगरानी होगी।' सर्वेक्षण में कहा गया है, 'पहली छमाही में आयात पहले ही पूरे 2016 के आयात के आसपास पहुंच चुका है, इसलिए दूसरी छमाही में आयात 250 टन से ज्यादा नहीं रहने के आसार हैं। लेकिन इसमें यह कहा गया है कि वर्ष के अंत तक उपभोक्ता मांग 660 टन के आसपास तक पहुंच सकती है, जो पिछले साल की तुलना में 10 फीसदी अधिक होगी। आयात के आंकड़ों में निर्यात केे लिए होने वाला आयात भी शामिल है।'
 
जीएफएमएस का अनुमान है कि निकट भविष्य में कीमतें कमजोर रहेंगी क्योंकि भारत में दूसरी छमाही में मांग कम रहने के आसार हैं। सर्वेक्षण में कहा गया है, 'भारत में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से इस समय वहां आयात में ठहराव है और इससे सोने की कीमतें कमजोर हो सकती हैं। इसकी वजह यह है कि आमतौर पर कीमतों में कमजोरी को भारतीय मांग से ही सहारा मिलता है। इसका मतलब है कि उत्तरी गोलाद्र्ध में गर्मियों के दौरान कीमतें कमजोर रह सकती हैं। लेकिन हमारा मानना है कि यह दौर थोड़े समय रहेगा। हालांकि कीमतें 1,200 डॉलर से नीचे आ सकती हैं। अनुमान है कि वर्ष के अंत में कीमतें सुधरेंगी क्योंकि एशिया में मांग में मौसमी बढ़ोतरी हुई है और पश्चिम में निवेश मांग बढ़ी है।' 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी, gold,,
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