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दरों में कटौती पर बंटी राय

बीएस संवाददाता / मुंबई July 28, 2017

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की जून में हुई बैठक से पहले अर्थशास्त्री इस बात पर एकराय थे कि 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक में नीतिगत दरें जस की तस रहेंगी, लेकिन इस बार राय बंटी हुई नजर आ रही है। समिति की बैठक 1-2 अगस्त को होगी। हालांकि इस बार स्थिति काफी बदली हुई है और मुद्रास्फीति 1.5 फीसदी पर है, जो आरबीआई के अपने पैमाने से भी करीब आधा फीसदी नीचे है। आरबीआई का प्रयास मुद्रास्फीति को 4 फीसदी के आसपास (2 फीसदी कम या ज्यादा) रखना था। मुख्य मुद्रास्फीति भी पिछले कुछ समय में 4 फीसदी के आसपास बनी हुई है।
 
6-7 जून को हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में आरबीआई गवर्नर ऊर्जित पटेल सहित पांच सदस्यों ने अभी इंतजार करने और हालात पर नजर रखने को तरजीह दी थी। इसीलिए उस बार रीपो दर 6.25 फीसदी पर बरकरार रखी गई थी। हालांकि इस बार रिजर्व बैंक के लिए स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण होगी और अर्थशास्त्रियों की राय भी बंटी हुई है। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने नीतिगत दर पर 12 अर्थशास्त्रियों के बीच सर्वेक्षण कराया है, जिनमें से पांच ने कहा कि इस बार भी आरबीआई दरों में यथास्थिति बनाए रख सकता है। जिन अर्थशास्त्रियों ने कटौती की उम्मीद जताई, वे भी पूरी मजबूती के साथ अपनी राय पर कायम नहीं थे। उदाहरण के लिए एलऐंडटी फाइनैंस की समूह मुख्य अर्थशास्त्री रूपा रेगे नित्सुरे ने कहा कि कटौती और यथास्थिति को लेकर उनकी कोई ठोस राय नहीं है। नित्सुरे ने कहा, 'आरबीआई जब खुले बाजार परिचालन से अतिरिक्त तरलता खींच रहा है तो वह दरों में कटौती क्यों करेगा? ऐसे में यथास्थिति की संभावना ज्यादा है लेकिन निवेश की भावना को बढ़ावा देने के लिए दर में कटौती की जा सकती है।'
 
ऐक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री सौगत भट्टïाचार्य ने भी कहा कि इस बार कोई राय बनाना काफी कठिन है। इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के सौम्यजित नियोगी ने कहा कि कटौती की संभावना है लेकिन आंकड़ों में उतार-चढ़ाव से अनिश्चितता की स्थिति है। नियोगी ने कहा, 'मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी की आशंका है, ऐसे में दरों में कटौती की संभावना काफी कम है।' इंडसइंड बैंक के गौरव कपूर के अनुसार विमुद्रीकरण और वस्तु एवं सेवा कर के बाद अर्थव्यवस्था बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इसके साथ ही मुख्य मुद्रास्फीति लगभग स्थिर है, ऐसे में दरों में कटौती से तत्काल कोई मकसद पूरा होने की संभावना नहीं है।
 
एसबीआई ग्रुप के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने कहा, 'वित्त वर्ष 2018 में खुदरा मुद्रास्फीति का औसत आरबीआई द्वारा तय सहज दायरे में है। ऐसे में आरबीआई को दरों में कटौती करनी चाहिए।' एचएसबीसी की प्रांजुल भंडारी ने उम्मीद जताई है कि अभी 25 आधार अंक की कटौती की संभावना है और साल के अंत तक एक और कटौती संभव है।
Keyword: bank, loan, debt, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई),
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